कैराना उपचुनाव: भाजपा ने जातीय समीकरण साधने की विधायकों को सौंपी जिम्मेदारी
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कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव के लिए भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री सुनील बंसल ने पांच जिलों के सांसद, विधायकों और पदाधिकारियों के साथ बैठकें कीं। हर नेता को अलग-अलग सेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रदेश के संगठन महामंत्री सुनील बंसल और कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि कार्यकर्ता सेल्फी लेने से ज्यादा जनता में पार्टी की पहुंच बनाएं।
शामली में बृहस्पतिवार को करनाल रोड स्थित बीएसएम स्कूल में सुबह करीब 11.15 बजे से बैठक का दौर प्रारंभ हुआ। प्रदेश संगठन महामंत्री सुनील बंसल और कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने सबसे पहले सेक्टर प्रभारियों और सेक्टर संयोजकों के साथ बैठक की। सेक्टर प्रभारियों से कहा कि उपचुनाव में सेक्टर और बूथ स्तर पर मजबूती के लिए कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर कार्य करना है। भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री सुनील बंसल ने बैठक के दौरान दलितों और पिछड़ों के बीच उतारे नेताओं की जिम्मेदारी तय करने के साथ ही चुनाव कार्यालय खोलने को लेकर भी चर्चा हुई।
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इस दौरान तय किया गया कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र का चुनाव कार्यालय खोला जाएगा। कैराना, शामली, थानाभवन, नकुड़ और गंगोह में अलग अलग चुनाव कार्यालयों का शनिवार को उद्घाटन हो जाएगा। लोकसभा क्षेत्र के 13 मंडलों पर एक -एक विधायक की ड्यूटी लगाई गई है, जो संगठन के साथ जनता के बीच पहुंचकर चुनाव प्रचार की कमान संभालेंगे। प्रत्येक मंडल पर एक विधायक को लगाने में यह बात भी ध्यान में रखी गई है कि किस जाति या वर्ग के विधायक को कहां लगाया जाए। इसी लिहाज से मुजफ्फरनगर से विधायक कपिल देव अग्रवाल को शामली नगर मंडल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा पांचों विधानसभा क्षेत्रों पर अलग-अलग प्रभारी भी नियुक्त किए गए हैं। उनमें शामली विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी रामकुमार सहरावत और कैराना का प्रभारी रामजीलाल कश्यप को बनाया गया है, जबकि थानाभवन विधानसभा क्षेत्र के लिए भी अलग प्रभारी नियुक्त किया गया है।
कैराना उप चुनाव नहीं लड़ेगी कांग्रेस
कांग्रेस के कैराना लोकसभा का उप चुनाव लड़ने की अटकलों को विराम लग गया है। कांग्रेस चुनाव लड़कर भाजपा को मदद पहुंचाने और विपक्ष की एकता में दरार पैदा करने जैसे आरोपों से बचना चाहती है, जिसके चलते पार्टी ने उप चुनाव नहीं लड़ने का संदेश पार्टी नेताओं को दे दिया है। पार्टी का रुख देख पूर्व विधायक इमरान मसूद भी दावेदारी से पीछे हट गए हैं।मसूद ने कहा कि उनका विरोध गठबंधन से पूर्व सांसद तबस्सुम की उम्मीदवारी को लेकर है। यदि सपा तबस्सुम को उम्मीदवार बनाती है तो वह उसका खुलकर विरोध करेंगे। हालांकि सपा और बसपा गठबंधन के तरजीह न दिए जाने के कारण कांग्रेस पसोपेश में है। यही स्थिति रालोद की भी है, ऐसे में रालोद के चुनाव लड़ने और कांग्रेस के समर्थन की स्थिति में नफे और नुकसान का आकलन करने में पार्टी जुटी है। पार्टी महामंत्री गुलाम नबी आजाद और प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर ने बुधवार को कैराना उप चुनाव को लेकर इमरान मसूद और अन्य पश्चिमी यूपी के पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर गहन मंथन किया था। दिल्ली से लौटते ही बृहस्पतिवार को इमरान मसूद के सुर बदले हुए हैं। उन्होंने कहा कि उनका विरोध गठबंधन से पूर्व सांसद तबस्सुम की उम्मीदवारी को लेकर है। यदि सपा तबस्सुम को उम्मीदवार बनाती है तो वह उसका खुलकर विरोध करेंगे।
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