{"_id":"5887a6bb4f1c1b9e7dcf3f82","slug":"kaali-ki-chaal-se","type":"story","status":"publish","title_hn":"विधानसभा चुनाव 2017: गोपाल काली की चाल से भाजपा में भूचाल ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विधानसभा चुनाव 2017: गोपाल काली की चाल से भाजपा में भूचाल
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
Updated Wed, 25 Jan 2017 05:25 PM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हस्तिनापुर सीट पर चुनाव से पहले ही भाजपा में भूचाल आना शुरू हो गया है। पूर्व विधायक गोपाल काली ने बागी होकर मंगलवार को नामांकन कर दिया। काली के इस कदम से भाजपा खेमे में बेचैनी बढ़ गयी है।
विज्ञापन
गोपाल काली 1993 में भाजपा से विधायक चुने गए थे। लेकिन 1996 में उनका टिकट काटकर अतुल खटीक को दे दिया गया। इससे क्षुब्ध होकर गोपाल काली ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन कर ली। इसके बाद गोपाल 2007 और 2012 का चुनाव कांग्रेस से लड़े, लेकिन जीत हासिल नहीं कर पाए। लोकसभा चुनाव के बाद गोपाल काली ने पुन: भाजपा में वापसी की और हस्तिनापुर सीट पर पार्टी नेतृत्व के सामने दावेदारी पेश की। लेकिन इस बार भी गोपाल काली टिकट पाने में कामयाब नहीं हो पाये और उनकी जगह संगठन में लंबे समय से जुड़े दिनेश खटीक को प्रत्याशी घोषित कर दिया।
विज्ञापन
इसके बाद नाराज गोपाल काली ने बगावत का सुर तेज कर दिया था। जिस पर संघ और भाजपा के नेता पिछले कई दिन से उन्हें मनाने में जुटे थे। सोमवार रात तक माना जा रहा था कि गोपाल काली पर्चा नहीं भरेंगे। लेकिन मंगलवार दोपहर वह कलक्ट्रेट पहुंचे और नामांकन दाखिल कर दिया। गोपाल काली से इस कदम से भाजपा में बेचैनी बढ़ गयी है। सूत्रों की मानें तो एक बार फिर गोपाल काली को मनाने और पर्चा वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है।
विज्ञापन