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‘जनता की सुरक्षा के लिए पहनी है हमने वर्दी’
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 11 May 2016 01:01 AM IST
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सीसीएस युनिवर्सटी में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेते पुलिसकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक जावीद अहमद ने कहा है कि हमने जनता की सुरक्षा के लिए यह वर्दी पहनी है। थाने में कोई पीड़ित अपनी समस्या लेकर ही आता है, इसलिए उसके प्रति हमें संवेदनशील रहना चाहिए।
विडंबना यह है कि कुछ ऐसे कारण बन जाते हैं कि सबसे ज्यादा काम करने के बाद भी हमारी आलोचना होती है। वे मंगलवार को सीसीएसयू के सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में आयोजित पुलिसकर्मियों के सम्मान समारोह में जिले के पुलिस अफसरों और जवानों को संबोधन दे रहे थे।
थानों में जिंदा रखें इंसानियत
डीजीपी ने कहा कि पुलिस थानों में इंसानियत को जिंदा रखे। इसमें कोई दो राय नहीं कि पुलिस ही सबसे ज्यादा काम करती है, फिर भी जनता उसकी आलोचना करती है। लेकिन इसके बावजूद भी जनता की सुरक्षा करना हमारा उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने अपनी ड्यूटी को शारीरिक से ज्यादा मानसिक रूप से करने की जरूरत बताते हुए पुलिसकर्मियों से कहा कि पीड़ित किसी परेशानी में ही पुलिस के पास जाता है, इसलिए हमें उसकी बात धैर्य से सुननी चाहिए।
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होना पड़ा है हमें शर्मसार
डीजीपी ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिसमें पुलिस को शर्मसार होना पड़ा है। जनता में पुलिस के प्रति विश्वास पैदा करने की बहुत जरूरत है। पुलिस का इकबाल तभी बुलंद होगा, जब हम बेहतर पुलिसिंग का नमूना पेश करेंगे।
कई बार ऐसे हालात बनते है कि पुलिस को गुस्सा आता है, लेकिन ऐसी स्थिति में खुद को कंट्रोल करना होगा। अक्सर थानों में देखा गया कि पुलिस के बर्ताव के चलते मामला तूल पकड़ता है। पीड़ित थानों में इंसाफ की उम्मीद के साथ जाता है।
अगर उसके साथ अच्छा बर्ताव न हो तो वह टूट जाता है। लाठी-डंडे की चोट का जख्म तो भर जाता है, लेकिन जुबान का जख्म उसको अंदर तक चोट करता है। हालांकि पिछले कुछ दिनों से पुलिस के बर्ताव में सुधार आया है, जिसे और बेहतर करने की जरूरत है।
अफवाहें बिगाड़ती हैं सांप्रदायिक सौहार्द
डीजीपी ने कहा कि अफवाहें सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ती है। अफवाह से निपटने के लिए पुलिस को एक्टिव होना होगा। बीट कांस्टेबल का स्थानीय लोगों से ज्यादा से ज्यादा संपर्क होना चाहिए, ताकि कोई भी अफवाह या सूचना पर पुलिस तुरंत पहुंचकर स्थिति को कंट्रोल कर सके। उन्होंने कहा कि बीट कांस्टेबिल स्तर से वाट्सएप ग्रुप बनाकर इससे स्थानीय लोगों को जोड़ा जाए। इससे पुलिस और जनता के बीच संवाद कायम रहेगा।
गर्व के ये क्षण बार-बार आएं
इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक ने सराहनीय कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि सराहनीय कार्य करने वाले को जब सम्मान मिलता है तो वह अपने आप पर बहुत गर्व महसूस करता है। मैं अपेक्षा करता हूं कि गर्व के ये क्षण बार-बार आएं और सराहनीय कार्य करने वालों को संख्या लगातार बढ़ती रहनी चाहिए।
इनको मिला सम्मान
अतिशय अपहरण केस : बीती 19 फरवरी को व्यापारी मयंक जैन के बेटे अतिशय जैन के अपहरण मामले में एसएसपी, एसपी सिटी, एसपी क्राइम, सीओ ब्रह्मपुरी रफीक अहमद, एसओ टीपीनगर प्रशांत कपिल, क्राइम ब्रांच प्रभारी संजीव यादव, विनीत सिंह, जयवर्धन, मनोज दीक्षित, आजाद सिंह तोमर, जितेश शर्मा, संजय, संजीव, धर्मवीर और महिला कांस्टेबल निर्मला आदि सम्मानित किए गए।
अंतर्राज्यीय गैंग : बीती 21 फरवरी को 50 हजार के इनामी सौरभ मलिक, 15 हजार के इनामी नितिन और चार आरोपियों से एक कारबाइन, दो रायफल, एक पिस्टल और भारी संख्या में कारतूस बरामद हुए। जिसमें एसएसपी, एसपी क्राइम, एसपी देहात, सीओ सरधना बृजेश कुमार, जानी इंस्पेक्टर संजीव कुमार, राजकुमार शर्मा, धर्मेंद्र पंवार, जरार हुसैन, विकास शर्मा, दीपक आदि सम्मानित किए गए।
बैंक कैशियर हत्याकांड: बैंक कैशियर रिंकू कुमार हत्याकांड में पुलिस ने जांच में नामजद आरोपियों को क्लीन चिट दिलाई और असली 11 आरोपियों को जेल भेजा। इस खुलासे में एसएसपी, एसपी सिटी, सीओ सिविल लाइन बीएस वीर कुमार, एसओ मेडिकल रविंद्र वशिष्ठ, संजीव कुमार, रहीश खान, रकम सिंह, तहजीब खान, रवि सिंह, वीर बोस, अनुराग सम्मानित किए गए।
रंगदारी प्रकरण : कचहरी पुल के पास शिवलोक कांपलेक्स में डॉ. विनोद कुमार से ऊधमसिंह ने रंगदारी मांगी थी। पुलिस ने ऊधम की पत्नी समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। इस मामले में एसटीएफ इंस्पेक्टर धर्मेंद्र सिंह यादव, भानू प्रताप सिंह, योगेंद्र सिंह, सुनील कुमार, संजय सोलंकी, नवीन, आशु, लालकुर्ती थाने के दरोगा हाकिम सिंह, ओमप्रकाश, जयेंद्र , सुनील शर्मा, दुर्वेश दवास, दीपक कुमार सम्मानित किए गए।
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विडंबना यह है कि कुछ ऐसे कारण बन जाते हैं कि सबसे ज्यादा काम करने के बाद भी हमारी आलोचना होती है। वे मंगलवार को सीसीएसयू के सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में आयोजित पुलिसकर्मियों के सम्मान समारोह में जिले के पुलिस अफसरों और जवानों को संबोधन दे रहे थे।
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थानों में जिंदा रखें इंसानियत
डीजीपी ने कहा कि पुलिस थानों में इंसानियत को जिंदा रखे। इसमें कोई दो राय नहीं कि पुलिस ही सबसे ज्यादा काम करती है, फिर भी जनता उसकी आलोचना करती है। लेकिन इसके बावजूद भी जनता की सुरक्षा करना हमारा उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने अपनी ड्यूटी को शारीरिक से ज्यादा मानसिक रूप से करने की जरूरत बताते हुए पुलिसकर्मियों से कहा कि पीड़ित किसी परेशानी में ही पुलिस के पास जाता है, इसलिए हमें उसकी बात धैर्य से सुननी चाहिए।
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होना पड़ा है हमें शर्मसार
डीजीपी ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिसमें पुलिस को शर्मसार होना पड़ा है। जनता में पुलिस के प्रति विश्वास पैदा करने की बहुत जरूरत है। पुलिस का इकबाल तभी बुलंद होगा, जब हम बेहतर पुलिसिंग का नमूना पेश करेंगे।
कई बार ऐसे हालात बनते है कि पुलिस को गुस्सा आता है, लेकिन ऐसी स्थिति में खुद को कंट्रोल करना होगा। अक्सर थानों में देखा गया कि पुलिस के बर्ताव के चलते मामला तूल पकड़ता है। पीड़ित थानों में इंसाफ की उम्मीद के साथ जाता है।
अगर उसके साथ अच्छा बर्ताव न हो तो वह टूट जाता है। लाठी-डंडे की चोट का जख्म तो भर जाता है, लेकिन जुबान का जख्म उसको अंदर तक चोट करता है। हालांकि पिछले कुछ दिनों से पुलिस के बर्ताव में सुधार आया है, जिसे और बेहतर करने की जरूरत है।
अफवाहें बिगाड़ती हैं सांप्रदायिक सौहार्द
डीजीपी ने कहा कि अफवाहें सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ती है। अफवाह से निपटने के लिए पुलिस को एक्टिव होना होगा। बीट कांस्टेबल का स्थानीय लोगों से ज्यादा से ज्यादा संपर्क होना चाहिए, ताकि कोई भी अफवाह या सूचना पर पुलिस तुरंत पहुंचकर स्थिति को कंट्रोल कर सके। उन्होंने कहा कि बीट कांस्टेबिल स्तर से वाट्सएप ग्रुप बनाकर इससे स्थानीय लोगों को जोड़ा जाए। इससे पुलिस और जनता के बीच संवाद कायम रहेगा।
गर्व के ये क्षण बार-बार आएं
इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक ने सराहनीय कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि सराहनीय कार्य करने वाले को जब सम्मान मिलता है तो वह अपने आप पर बहुत गर्व महसूस करता है। मैं अपेक्षा करता हूं कि गर्व के ये क्षण बार-बार आएं और सराहनीय कार्य करने वालों को संख्या लगातार बढ़ती रहनी चाहिए।
इनको मिला सम्मान
अतिशय अपहरण केस : बीती 19 फरवरी को व्यापारी मयंक जैन के बेटे अतिशय जैन के अपहरण मामले में एसएसपी, एसपी सिटी, एसपी क्राइम, सीओ ब्रह्मपुरी रफीक अहमद, एसओ टीपीनगर प्रशांत कपिल, क्राइम ब्रांच प्रभारी संजीव यादव, विनीत सिंह, जयवर्धन, मनोज दीक्षित, आजाद सिंह तोमर, जितेश शर्मा, संजय, संजीव, धर्मवीर और महिला कांस्टेबल निर्मला आदि सम्मानित किए गए।
अंतर्राज्यीय गैंग : बीती 21 फरवरी को 50 हजार के इनामी सौरभ मलिक, 15 हजार के इनामी नितिन और चार आरोपियों से एक कारबाइन, दो रायफल, एक पिस्टल और भारी संख्या में कारतूस बरामद हुए। जिसमें एसएसपी, एसपी क्राइम, एसपी देहात, सीओ सरधना बृजेश कुमार, जानी इंस्पेक्टर संजीव कुमार, राजकुमार शर्मा, धर्मेंद्र पंवार, जरार हुसैन, विकास शर्मा, दीपक आदि सम्मानित किए गए।
बैंक कैशियर हत्याकांड: बैंक कैशियर रिंकू कुमार हत्याकांड में पुलिस ने जांच में नामजद आरोपियों को क्लीन चिट दिलाई और असली 11 आरोपियों को जेल भेजा। इस खुलासे में एसएसपी, एसपी सिटी, सीओ सिविल लाइन बीएस वीर कुमार, एसओ मेडिकल रविंद्र वशिष्ठ, संजीव कुमार, रहीश खान, रकम सिंह, तहजीब खान, रवि सिंह, वीर बोस, अनुराग सम्मानित किए गए।
रंगदारी प्रकरण : कचहरी पुल के पास शिवलोक कांपलेक्स में डॉ. विनोद कुमार से ऊधमसिंह ने रंगदारी मांगी थी। पुलिस ने ऊधम की पत्नी समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। इस मामले में एसटीएफ इंस्पेक्टर धर्मेंद्र सिंह यादव, भानू प्रताप सिंह, योगेंद्र सिंह, सुनील कुमार, संजय सोलंकी, नवीन, आशु, लालकुर्ती थाने के दरोगा हाकिम सिंह, ओमप्रकाश, जयेंद्र , सुनील शर्मा, दुर्वेश दवास, दीपक कुमार सम्मानित किए गए।