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कवि सम्मेलन।
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इस मिट्टी की खातिर मैं हूं कुर्बान लिखता है...
मवाना। विजय दिवस और महाकवि महाकवित्री मणिका दुबे के जन्मदिन के संयुक्त अवसर पर कवि व गीतकार कुमार मुनीश अक्स के पेज काव्य-ब्रह्मास्त्र पर एक ऑनलाइन कवयित्री सम्मेलन का आयोजन किया गया।
सम्मेलन का संचालन डॉ. सरला शर्मा ने तथा अध्यक्षता डॉ. शोभा त्रिपाठी ने की। मुख्यातिथि मणिका दुबे रहीं। डॉ. शोभा त्रिपाठी (लखनऊ) ने पढ़ा इस मिट्टी की खातिर मैं हूं कुर्बान लिखता है, मेरा भारत मेरा दिलबर है मेरी जान लिखता है, न कर अपमान उनका जो चढ़ाते शीश सीमा पर, शहीदों का लहू सरहद पे हिंदुस्तान लिखता है। मणिका दुबे (जबलपुर) ने पढ़ा मेरी रूठी सी तकदीरों को मेरी मां मनाती है, बलाओं की बलि देकर ही मां मुझको सुलाती है, है मंदिर मां, है मस्जिद मां, मदरसा भी है मेरी मां, तलवे के तले मां के मेरी दुनिया समाती है। डॉ. सरला शर्मा (लखनऊ) ने पढ़ा दूर होकर भी मेरे दिल से हुआ दूर नहीं, यानी दिल मेरा तेरे प्यार से बेनूर नहीं, ताज शोहरत का उसी सर पे रखा जाता है। शुक्र-ए मौला जो करे और हो मगरूर नहीं। प्रिया श्रीवास्तव ‘दिव्यम’ (उरई) ने पढ़ा समर्पण प्रेम में होना जरूरी यार होता है, नफा नुकसान जो देखे वो तो व्यापार होता है, खुशी जिसमें हो दिलबर की दिल अपना भी वहीं चाहिए, तो सचमुच प्रेम ‘दिव्यम’ और सच्चा प्यार होता है। इनके अति रिक्त एकता भारती (पीलीभीत), दीपा गुप्ता (दिल्ली) ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम देर रात तक चला और कार्यक्रम के दौरान गौरव विवेक, रश्मि शाक्या, पल्लवी त्रिपाठी, डॉ. अनिता त्यागी, नीरू श्रीवास्तव, पूजा अरोरा, प्रज्ञा बाजपेयी, कमल धमीजा, ज्योति उपाध्याय, निशा नवल, राखी कुलश्रेष्ठ, प्रीती पांडेय, सपना सक्सेना, सुमित्रा आहूजा, विनीता पांचाल आदि पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में दर्शक लगातार जुड़े रहे। संवाद
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मवाना। विजय दिवस और महाकवि महाकवित्री मणिका दुबे के जन्मदिन के संयुक्त अवसर पर कवि व गीतकार कुमार मुनीश अक्स के पेज काव्य-ब्रह्मास्त्र पर एक ऑनलाइन कवयित्री सम्मेलन का आयोजन किया गया।
सम्मेलन का संचालन डॉ. सरला शर्मा ने तथा अध्यक्षता डॉ. शोभा त्रिपाठी ने की। मुख्यातिथि मणिका दुबे रहीं। डॉ. शोभा त्रिपाठी (लखनऊ) ने पढ़ा इस मिट्टी की खातिर मैं हूं कुर्बान लिखता है, मेरा भारत मेरा दिलबर है मेरी जान लिखता है, न कर अपमान उनका जो चढ़ाते शीश सीमा पर, शहीदों का लहू सरहद पे हिंदुस्तान लिखता है। मणिका दुबे (जबलपुर) ने पढ़ा मेरी रूठी सी तकदीरों को मेरी मां मनाती है, बलाओं की बलि देकर ही मां मुझको सुलाती है, है मंदिर मां, है मस्जिद मां, मदरसा भी है मेरी मां, तलवे के तले मां के मेरी दुनिया समाती है। डॉ. सरला शर्मा (लखनऊ) ने पढ़ा दूर होकर भी मेरे दिल से हुआ दूर नहीं, यानी दिल मेरा तेरे प्यार से बेनूर नहीं, ताज शोहरत का उसी सर पे रखा जाता है। शुक्र-ए मौला जो करे और हो मगरूर नहीं। प्रिया श्रीवास्तव ‘दिव्यम’ (उरई) ने पढ़ा समर्पण प्रेम में होना जरूरी यार होता है, नफा नुकसान जो देखे वो तो व्यापार होता है, खुशी जिसमें हो दिलबर की दिल अपना भी वहीं चाहिए, तो सचमुच प्रेम ‘दिव्यम’ और सच्चा प्यार होता है। इनके अति रिक्त एकता भारती (पीलीभीत), दीपा गुप्ता (दिल्ली) ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम देर रात तक चला और कार्यक्रम के दौरान गौरव विवेक, रश्मि शाक्या, पल्लवी त्रिपाठी, डॉ. अनिता त्यागी, नीरू श्रीवास्तव, पूजा अरोरा, प्रज्ञा बाजपेयी, कमल धमीजा, ज्योति उपाध्याय, निशा नवल, राखी कुलश्रेष्ठ, प्रीती पांडेय, सपना सक्सेना, सुमित्रा आहूजा, विनीता पांचाल आदि पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में दर्शक लगातार जुड़े रहे। संवाद
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