{"_id":"61229a818ebc3e79c9017228","slug":"indian-schemers-spotted-at-haiderpur-wetland-meerut-news-mrt55292504","type":"story","status":"publish","title_hn":"हैदरपुर वेटलैंड में देखे गए इंडियन स्कीमर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हैदरपुर वेटलैंड में देखे गए इंडियन स्कीमर
विज्ञापन
बिजनौर में बैराज हैदरपुर वेटलैंड में उड़ते इंडियन स्कीमर।
- फोटो : BIJNOR
हैदरपुर वेटलैंड में देखे गए इंडियन स्कीमर
बिजनौर। हैदरपुर वेटलैंड में इंडियन स्कीमर (पनचीर) प्रजाति के दस पक्षी दिखे हैं। यह प्रजाति बहुत तेजी से विलुप्त हो रही है और इस समय खतरे में है। करीब साल भर बाद वेटलैंड में इंडियन स्कीमर दिखे हैं। अगस्त में ये पक्षी दिखने से बर्ड वॉचर भी गदगद हैं। वे उम्मीद कर रहे हैं कि वेटलैंड में इनकी संख्या बढ़ें।
हैदरपुर वेेटलैंड में अब तक 300 से अधिक प्रजाति के पक्षी दिख चुके हैं। यहां पक्षियों की संख्या और प्रजाति लगातार बढ़ती जा रही है। बर्ड वॉचर आशीष लोया को यहां कुछ दिन पहले इंडियन स्कीमर प्रजाति के पक्षी दिखे हैं। यह प्रजाति मुख्य रूप से चंबल क्षेत्र में नदी किनारे रहती है। दो साल पहले इसके 50 और पिछले साल भी कुछ पक्षी दिखे थे। यह प्रजाति इस समय संकट में है और इस समय इसके बहुत कम ही पक्षी बचे हैं। चंबल में इनकी संख्या एक हजार से भी कम बची है। ये आमतौर पर हैदरपुर वेटलैंड में मार्च-अप्रैल में आते थे, लेकिन अगस्त में इनके दस पक्षी यहां दिखे हैं। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि शायद इन पक्षियों ने वेटलैंड में अपनी बस्ती बसा ली है। हालांकि अभी बर्ड वॉचर को इन पक्षियों की बस्ती नहीं दिखी है।
ऐसे नष्ट हो जाते हैं घोंसले
इंडियन स्कीमर जिसे स्थानीय भाषा में पनचीर भी कहते हैं, नदी किनारे या नदी की धारा के बीच टापू की मिट्टी में ही घोंसला बनाकर रहते हैं। नदियों के किनारे खेती होने, नदियों की सिल्ट साफ होने या नदियों का जलस्तर बढ़ने से इनके घोंसले नष्ट हो जाते हैं। इस वजह से इस पक्षी की संख्या बहुत तेजी से घटी है।
विज्ञापन
अनूठा तरीका है शिकार का
इंडियन स्कीमर जलीय जीवों को खाता है। इसके शिकार करने का तरीका अनूठा रहता है। यह अपनी चोंच खोलकर चोंच के नीचे के हिस्से को पानी के अंदर डालकर और ऊपर के हिस्से को हवा में करके उड़ता है। वह ऐसा करके काफी देर तक उड़ता रहता है और जैसे ही मछली या कोई अन्य जीव उसकी चोंच में आ जाता है ये उसे खा जाता है।
शिकार का एरिया हुआ कम
हैदरपुर वेटलैंड में पहले जहां आमतौर पर इंडियन स्कीमर शिकार करते थे वहां अब जलकुंभी आ गई है। इस वजह से हैदरपुर वेटलैंड में उनके शिकार का एरिया भी थोड़ा कम हुआ है।
विज्ञापन
बिजनौर। हैदरपुर वेटलैंड में इंडियन स्कीमर (पनचीर) प्रजाति के दस पक्षी दिखे हैं। यह प्रजाति बहुत तेजी से विलुप्त हो रही है और इस समय खतरे में है। करीब साल भर बाद वेटलैंड में इंडियन स्कीमर दिखे हैं। अगस्त में ये पक्षी दिखने से बर्ड वॉचर भी गदगद हैं। वे उम्मीद कर रहे हैं कि वेटलैंड में इनकी संख्या बढ़ें।
हैदरपुर वेेटलैंड में अब तक 300 से अधिक प्रजाति के पक्षी दिख चुके हैं। यहां पक्षियों की संख्या और प्रजाति लगातार बढ़ती जा रही है। बर्ड वॉचर आशीष लोया को यहां कुछ दिन पहले इंडियन स्कीमर प्रजाति के पक्षी दिखे हैं। यह प्रजाति मुख्य रूप से चंबल क्षेत्र में नदी किनारे रहती है। दो साल पहले इसके 50 और पिछले साल भी कुछ पक्षी दिखे थे। यह प्रजाति इस समय संकट में है और इस समय इसके बहुत कम ही पक्षी बचे हैं। चंबल में इनकी संख्या एक हजार से भी कम बची है। ये आमतौर पर हैदरपुर वेटलैंड में मार्च-अप्रैल में आते थे, लेकिन अगस्त में इनके दस पक्षी यहां दिखे हैं। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि शायद इन पक्षियों ने वेटलैंड में अपनी बस्ती बसा ली है। हालांकि अभी बर्ड वॉचर को इन पक्षियों की बस्ती नहीं दिखी है।
विज्ञापन
ऐसे नष्ट हो जाते हैं घोंसले
इंडियन स्कीमर जिसे स्थानीय भाषा में पनचीर भी कहते हैं, नदी किनारे या नदी की धारा के बीच टापू की मिट्टी में ही घोंसला बनाकर रहते हैं। नदियों के किनारे खेती होने, नदियों की सिल्ट साफ होने या नदियों का जलस्तर बढ़ने से इनके घोंसले नष्ट हो जाते हैं। इस वजह से इस पक्षी की संख्या बहुत तेजी से घटी है।
विज्ञापन
अनूठा तरीका है शिकार का
इंडियन स्कीमर जलीय जीवों को खाता है। इसके शिकार करने का तरीका अनूठा रहता है। यह अपनी चोंच खोलकर चोंच के नीचे के हिस्से को पानी के अंदर डालकर और ऊपर के हिस्से को हवा में करके उड़ता है। वह ऐसा करके काफी देर तक उड़ता रहता है और जैसे ही मछली या कोई अन्य जीव उसकी चोंच में आ जाता है ये उसे खा जाता है।
शिकार का एरिया हुआ कम
हैदरपुर वेटलैंड में पहले जहां आमतौर पर इंडियन स्कीमर शिकार करते थे वहां अब जलकुंभी आ गई है। इस वजह से हैदरपुर वेटलैंड में उनके शिकार का एरिया भी थोड़ा कम हुआ है।