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हलाला के नाम पर देवर ने किया था दुष्कर्म, कोर्ट का फैसला आने पर...

Thu, 24 Aug 2017 02:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ बागपत
अमर उजाला ब्यूरो/ बागपत Updated Thu, 24 Aug 2017 02:26 PM IST
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In name of Halala, Devar had committed a rape in front of husband, when court decision comes
तीन तलाक मुद्दा

आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला दे दिया। तीन तलाक पर रोक लगा दी और इस पर सरकार को संसद में कानून बनाने की बात कही है। घर की मामूली बातों, दंपति के बीच कहासुनी को लेकर तीन तलाक के अजीबों-गरीब मामले सामने आते रहे हैं। पिछले कुछ सालों में तलाक दिए जाने के मामले बढ़े हैं। ऐसे भी मामले हैं, जब पीड़ितों ने कहा हलाला के नाम पर उनसे दुष्कर्म किया गया। देशभर में बहस छिड़ी है। जिले में मुस्लिम समाज की महिलाएं फैसले के पक्ष या विपक्ष में खुलकर सामने भले ही न आई हो, लेकिन तलाक के मसलों ने सबसे ज्यादा पीड़ा उन्हें ही पहुंचाई। 

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केस:1 
छपरौली क्षेत्र के नांगल गांव की शबनम और शबाना का निकाह बड़ौत निवासी दो भाई शहजाद और जुबैर के साथ हुआ था। दंपति में मनमुटाव हो गया। 16 मार्च को पुलिस ने सुलह समझौते के लिए बागपत महिला थाने में बुलाया । थाने में दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया। मौके पर ही दोनों युवकों ने अपनी पत्नी को तलाक दे दिया। थाने में संघर्ष हुआ, इसमें 11 लोग घायल हो गए।  
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केस : 2 
बड़ौत निवासी विवाहिता का निकाह दिल्ली के नंदनगरी थाना क्षेत्र के एक गांव में हुआ । दहेज के लिए ससुराल वाले उसको परेशान करते थे। 11 नवंबर 2016 को पति ने उसे फोन पर तलाक दिया। बाद में बहाने से घर पर बुलाया। हलाला के नाम पर देवर ने दुष्कर्म किया। इसके बाद पति ने दोबारा अपने सामने खड़ी करके उसको तलाक दिया। आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ।  
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केस : 3 
बागपत शहर निवासी एक युवक का निकाह बिहार की एक महिला से हुआ । एक सप्ताह पहले घर में बच्चे आपस में झगड़ा कर रहे थे। इसी बात पर महिला ने बच्चों को डांट दिया । इस पर दंपति के बीच विवाद हो गया। बाद में शौहर ने अपनी बीवी को तलाक दे दिया।  मामले थाने तक पहुंचा। पीड़ित ने कहा उसने सिर्फ आपस में उलझ रहे बच्चों को डांटा, पति ने तीन बार तलाक कह दिया। 

केस : 4 
दाहा गांव में करीब एक साल पहले मेरठ जिले से बारात आई । विदाई के दौरान दूल्हे की कहासुनी हो गई। दोनों पक्षों के बीच विवाद खड़ा हो गया। पंचायत बैठ गई। करीब दो घंटे तक चली पंचायत में वधू पक्ष ने एलान किया वह अपनी बेटी की विदाई नहीं करेंगे। तय किया  पंचायत से ही दूल्हा अब पहले दुल्हन को तलाक देगा। मोबाइल के जरिये यहां दुल्हन को तलाक दिलाया और बारात अपने घर बैरंग लौट गई।

इस्लाम ने जो बताया वही सरल तरीका: पूर्व कैबिनेट मंत्री

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पूर्व कैबिनेट मंत्री नवाब कोकब हमीद

पूर्व कैबिनेट मंत्री नवाब कोकब हमीद का कहना है कि इस्लाम ने जो राह दिखाई वही सरल तरीका है। इस पर कानून बनाया जाना गलत है। संसद को भी धर्म के मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। कुछ लोग तलाक की प्रक्रिया को गलत तरीके से प्रचलन में ला रहे हैं, जिससे देशभर में गलतफहमियां हो गई है। राह चलते, मोबाइल पर या किसी और अन्य तरीके से तलाक दिए जाने को जायज नहीं ठहराया जा सकता। इस तरह तलाक नहीं दिया जाना चाहिए, लेकिन इसके बावजूद शरीयत के कानून का मसला है, इस पर कानून बनाकर कैसे रोक लगाई जा सकती है।

महिलाओं के सम्मान का फैसला: सत्यपाल सिंह 
भाजपा सांसद डॉ सत्यपाल सिंह का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के सम्मान के पक्ष में फैसला दिया था। ऐसी कितनी ही मुस्लिम बहनें है, जो बेवजह तीन तलाक के मामले के चलते घुटनभरी जिंदगी जी रही थी। ऐसी महिलाओं के सम्मान की दृष्टि से इस फैसले को देखा जाना चाहिए। यह सच की जीत है। मुस्लिम समाज की महिलाएं इस फैसले के पक्ष में खड़ी है, क्योंकि परेशानी उन्हें झेलनी पड़ी है। जो लोग इसे गलत कह रहे हैं, वह खुद सोचें की अगर उनकी बेटी के साथ ऐसा हो, तो क्या इसे सही कहा जाएगा।

सपा नेत्री आयशा ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया

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सुप्रीम कोर्ट

बिजनौर। समाजसेवी एवं सपा नेत्री आयशा सिद्दीकी ने सुप्रीम कोर्ट के तीन तलाक को रोकने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि वे शरीयत में यकीन रखती हैं, लेकिन तीन तलाक के मामले में पिछले कुछ समय से महिलाओं का शोषण बढ़ रहा था। इस फैसले से मुस्लिम महिलाओं का उत्पीड़न रुकेगा। मौलाना शम्सुद्दीन नोमानी ने कहा कि एक साथ तीन तलाक इस्लाम धर्म का उल्लंघन है। इससे लोगों को बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि शरीयत हमारा मुकम्मल कानून है। इसमें कोर्ट की दखलअंदाजी सही नहीं है। जमीयत उलेमा नजीबाबाद के सचिव मुफ्ती मो. अरशद ने कहा कि तलाक और निकाह मजहबी मामले हैं। एक साथ तीन तलाक देना बिल्कुल गलत है। इस्लाम में एक साथ तीन तलाक की मनाही है, लेकिन अगर कोई गुस्से में ऐसा करता है तो वह उसकी नासमझी है और उस पर अमल भी किया जाता है।

शरीयत के खिलाफ है सुप्रीम कोट का तलाक फैसला 
मुफ्ती मोहम्मद अशरफ मजाहिरी ने तीन तलाक मामले पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को शरीयत की दृष्टि से गलत बताया है। उन्होंने कहा कि तलाक देना बहुत बुरा है, लेकिन यदि कोई शख्स अपनी पत्नी को एक बार में तीन तलाक दे देता है, तो वे तीन ही मानी जाएंगी, एक नहीं। जैसा कि किसी व्यक्ति को मारे गए तीन चांटे गिनती में तीन ही होंगे। मौलवी शमशीर अहमद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय परेशानी भरा और सरकार, अदालत का शरीयत में मदाखलत (हस्तक्षेप) करना है। इस बारे में मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड की अगले महीने होने वाली अहम बैठक कोई फैसला लिया जा सकता है। उधर, पूर्व शिक्षाविद एवं निकाह पढ़ाने वाले काजी नूर अहमद ऐसे फैसले के लिए मुसलमानों को दोषी मानते हैं। उनका कहना है कि पुरुष सत्तात्मक समाज अपने अधिकार का नाजायज फायदा उठा रहा है। तीन तलाक नहीं, एक तलाक देना भी ठीक नहीं है। इसे अल्लाह और नबी ने नापसंद किया है, किंतु कुरआन और अहादीस के अनुसार शरीयत में हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं है।

इन देशों में तीन तलाक पर है प्रतिबंध

In name of Halala, Devar had committed a rape in front of husband, when court decision comes
तीन तलाक मुद्दा

सेवानिवृत्त अध्यापिका आयशा बेगम का कहना है कि फैसला उन लोगों के लिए सबक है, जो कम दहेज के चलते बात-बे-बात पत्नी को पीटकर तलाक दे देते हैं। इसमें मुस्लिम औरतों की बचत तो है, लेकिन इस्लामी शरीयत अपनी जगह है। इसमें कयामत तक तब्दीली नहीं की जा सकती। पीड़ित महिलाएं अपनी इच्छा से अदालत का दरवाजा खटखटाती रही हैं, भविष्य में भी न्यायालय की शरण ले सकती हैं। 

बाजीदपुर-बीरू की स्नातकोत्तर प्रधान रफत जहां तलाक को अनुचित बताती हैं। शरीयत ने जिस तरह पुरुष को तलाक का अधिकार दिया है, उसी प्रकार महिला को भी पति का परित्याग करते हुए उससे अलग होने का हक दिया है। मोहम्मदपुर भीक्कन की प्रधान शाहीन जैदी का कहना है कि तलाक के बढ़ते मामले गैर मुस्लिमों में अधिक हैं, किंतु कोई उनकी बात नहीं करता। गैर मुस्लिमों में तलाक का सहज प्रावधान न होने के कारण महिलाएं जलाई जाती हैं या फिर उनकी हत्या कर दी जाती है, जबकि मुसलमानों में औरतें अधिक सुरक्षित हैं।

गौरतलब है कि इजिप्ट, सूडान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, इराक, श्रीलंका, सीरिया, ट्यूनीशिया, मलेशिया, इंडोनेशिया, साइप्रस, तुर्की, इरान, सारावक, जॉर्डन, अल्जीरिया, इरान, ब्ररूनेई, मोरक्को, कतर और यूएई में ट्रिपल तलाक पर पाबंदी है।

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