{"_id":"63c9508bf1760e7f147b0b78","slug":"health-na-news-c-14-1-mrt1001-85530-2023-01-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Meerut News: पूरे शरीर को प्रभावित करती है फेफड़ों की कार्यक्षमता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Meerut News: पूरे शरीर को प्रभावित करती है फेफड़ों की कार्यक्षमता
विज्ञापन
फोटो
पूरे शरीर को प्रभावित करती है फेफड़ों की कार्यक्षमता
अस्थमा से जुड़ी भ्रांतियों को रोकने के लिए शुरू की गई सांस मुक्त यात्रा
मेरठ। बेगम पुल पर आदर्श नगर स्थित डॉ वीरोत्तम तोमर के क्लिनिक से बृहस्पतिवार को सांस मुक्त (ब्रीथ फ्री)
यात्रा शुरू की गई। यह अभियान अस्थमा से जुड़ी भ्रांतियों को रोकने के लिए और लोगों को अस्थमा के बारे में अवगत कराने के लिए चलाया जा रहा है।
सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ वीरोत्तम तोमर ने बताया कि हम अक्सर मानते हैं कि अगर हृदय स्वस्थ है तो शरीर भी सेहतमंद होगा, लेकिन यह एकमात्र कारण ही संपूर्ण सेहत का प्रतीक नहीं है। फेफड़ों की कार्यक्षमता हमारे पूरे शरीर को प्रभावित करती है, जिसकी आमतौर पर अनदेखी की जाती है। यह यात्रा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, अलीगढ़, आगरा और गाजियाबाद जाएगी। अस्थमा के रोगियों को अपने फेफड़ों की जांच कराते रहने की जरूरत है। सांस के मरीज़ों को इंहेलर लेना बंद नहीं करना चाहिए। रोगियों को डॉक्टर से परामर्श लेते रहना चाहिए और अपने फेफड़ों को स्वास्थ्य और फिट रखने के लिए जरूरी टेस्ट करवाने चाहिए। सूजन के कारण सांस की नलियों सिकुड़ जाती हैं और फेफड़े अति संवेदनशील हो जाते हैं। कोई भी एलर्जी, अस्थमा अटैक में ट्रिगर का काम करती है। अस्थमा पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकता लेकिन इसे नियंत्रित करके सक्रिय जिंदगी जी जा सकती है।
विज्ञापन
पूरे शरीर को प्रभावित करती है फेफड़ों की कार्यक्षमता
अस्थमा से जुड़ी भ्रांतियों को रोकने के लिए शुरू की गई सांस मुक्त यात्रा
मेरठ। बेगम पुल पर आदर्श नगर स्थित डॉ वीरोत्तम तोमर के क्लिनिक से बृहस्पतिवार को सांस मुक्त (ब्रीथ फ्री)
यात्रा शुरू की गई। यह अभियान अस्थमा से जुड़ी भ्रांतियों को रोकने के लिए और लोगों को अस्थमा के बारे में अवगत कराने के लिए चलाया जा रहा है।
सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ वीरोत्तम तोमर ने बताया कि हम अक्सर मानते हैं कि अगर हृदय स्वस्थ है तो शरीर भी सेहतमंद होगा, लेकिन यह एकमात्र कारण ही संपूर्ण सेहत का प्रतीक नहीं है। फेफड़ों की कार्यक्षमता हमारे पूरे शरीर को प्रभावित करती है, जिसकी आमतौर पर अनदेखी की जाती है। यह यात्रा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, अलीगढ़, आगरा और गाजियाबाद जाएगी। अस्थमा के रोगियों को अपने फेफड़ों की जांच कराते रहने की जरूरत है। सांस के मरीज़ों को इंहेलर लेना बंद नहीं करना चाहिए। रोगियों को डॉक्टर से परामर्श लेते रहना चाहिए और अपने फेफड़ों को स्वास्थ्य और फिट रखने के लिए जरूरी टेस्ट करवाने चाहिए। सूजन के कारण सांस की नलियों सिकुड़ जाती हैं और फेफड़े अति संवेदनशील हो जाते हैं। कोई भी एलर्जी, अस्थमा अटैक में ट्रिगर का काम करती है। अस्थमा पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकता लेकिन इसे नियंत्रित करके सक्रिय जिंदगी जी जा सकती है।