फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   hausele ke pair

हौसले के पैर, उड़ान आसमान की

Sat, 04 Jun 2016 02:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 04 Jun 2016 02:46 AM IST
विज्ञापन
hausele ke pair
परीक्षितगढ़ के जगमोहन सिंह परिवार के साथ - फोटो : अमर उजाला
 दोनों पैरों से विकलांग जगमोहन सिंह में गजब का आत्मविश्वास है। अपनी लगन और मेहनत के बल पर इन्होंने अपनी अलग पहचान बना ली है। विकलांग अपनी दैनिक जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं, लेकिन ये समाज की जरूरत बन गए हैं। खुद शिक्षित होकर विकलांग और गरीब बच्चों को निशुल्क पढ़ा रहे हैं। लोगों को शिक्षा का महत्व बताकर बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इनके शिष्य बड़े-बड़े पदों पर तैनात होकर देश सेवा में लगे हैं। इन्होंने हौसलों के पैरों से बुलंदी की उड़ान भरी है, जिसमें इनका पूरा परिवार साथ है।
विज्ञापन

परीक्षितगढ़ कस्बे में मेन रोड पर रहने वाले सरदार गुरुमुख सिंह के छह पुत्र थे। एक की मौत हो गई। गुरुमुख मोटर मैकेनिक का काम करते हैं। इसी पेशे से उन्होंने अपने तीन बच्चों को भी जोड़ लिया। लेकिन 5वें नंबर के पुत्र जगमोहन सिंह उर्फ जिम्मी को बचपन में ही पोलियो ने अपनी चपेट में ले लिया। ये दोनो पैरों से विकलांग हो गए। पिता ने इनका स्कूल में दाखिला करा दिया। जगमोहन को स्कूल ले जाने और लाने का जिम्मा छोटे भाई मनिंदर सिंह को सौंपा गया।
विज्ञापन

दोनों भाइयों ने एक साथ पढ़ाई शुरू की। दसवीं के बाद आर्थिक तंगी के चलते परिवार वालों ने पढ़ाई से हाथ खड़े कर दिए। लेकिन जगमोहन ने हिम्मत नहीं हारी। इन्होंने आठवीं तक के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया। अपने साथ छोटे भाई को भी लगा लिया। दोनों ने अपनी पढ़ाई का खर्च स्वयं निकाला। रेग्युलर शिक्षा में दिक्कत आने से जगमोहन ने स्नातक शिक्षा कला वर्ग से प्राइवेट शुरू की।
विज्ञापन
विज्ञापन

छोटे भाई मनिंदर सिंह को विज्ञान वर्ग की तरफ मोड़ दिया। जगमोहन ने स्नातकोत्तर अंग्रेजी से करते हुए बीएड किया। मनिंदर ने एमएससी गणित से करते हुए बीएड की। दोनों भाइयों ने बड़ा कोचिंग सेंटर खोल लिया। इस बीच मनिंदर सिंह शिक्षक बन गए। वर्तमान में डीएन इंटर कॉलेज मेरठ में प्रवक्ता हैं। जगमोहन ने घर ही कोचिंग जारी रखी। वे विकलांग और गरीब बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाते हैं।

जीवन साथी भी मिली अपने जैसी
जगमोहन (38) की शादी 2009 में खरखौदा क्षेत्र के गांव अटौला निवासी दीपिका सिंह से हुई है। दीपिका भी बचपन से ही विकलांग हैं। इन्होंने भी एमए एजूकेशन के साथ बीटीसी की हुई थी। शादी के बाद दीपिका प्राइमरी स्कूल में टीचर बन गईं। समय मिलने पर वह पति के साथ कोचिंग सेंटर में भी पढ़ाती हैं।

भाई और पत्नी करते हैं सहयोग
जगमोहन सिंह अंग्रेजी की कोचिंग देने के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराते हैं। दीपिका सिंह बालिकाओं को पढ़ाती हैं और जीके की तैयारी कराती हैं। मनिंदर सिंह विज्ञान और गणित पढ़ाते हैं।

परिवार का पूरा साथ
जगमोहन सिंह बताते हैं कि आज वह जिस मुकाम पर हैं वह परिवार की देन है। उनकी पत्नी और वह खुद इस लायक नहीं है कि अपना काम खुद कर सकें। तीनों बड़े भाई और छोटे भाई की पत्नी उनका पूरा ख्याल रखते हैं। उनके हर काम में भाई मदद करते हैं। माता-पिता उनके लिए प्रेरणास्रोत हैं।


शिष्य दिल से करते हैं इज्जत
जगमोहन सिंह की अपने शिष्यों के बीच प्यार और आस्था देखते ही बनती है। उनके शिष्य ट्राई साइकिल पर बैठाकर रोजाना उन्हें कस्बे की सैर कराते हैं। साथ ही सामाजिक कार्यक्रमों में सहभागिता कराते हैं। यही नहीं उनके पढ़ाये हुए छात्र आज सीआरपीएफ कमांडेंट, बैंक मैनेजर, यूपी और दिल्ली पुलिस में एसआई व कांस्टेबल हैं। आर्मी और शिक्षक बनकर देश की सेवा कर रहे हैं। ये जब भी घर आते हैं अपने गुरु जगमोहन से जरूर मिलकर जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed