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GST : कहीं दुकानें बंद तो कहीं खुलीं, कुछ संगठनों ने पुतला फूंक गुस्सा निकाला  

Sat, 01 Jul 2017 10:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Updated Sat, 01 Jul 2017 10:04 AM IST
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GST: Where the shops were closed, some were opened
विरोध में पूतला फूंकते व्यापारी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के विरोध में शुक्रवार को कई व्यापारी संगठनों ने दुकानें बंद रखीं, जबकि शहर में अधिकांश स्थानों पर व्यावसायिक प्रतिष्ठान आम दिनों की तरह खुले। जीएसटी का विरोध कर रहे उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल और उद्योग व्यापार मंडल ने मेघदूत चौराहे के पास जीएसटी की खामियों का पुतला फूंक गुस्से का इजहार किया। 
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व्यापारी संगठनों ने जीएसटी की खामियों को दूर करने के लिए केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली को संबोधित ज्ञापन कलक्ट्रेट में एसीएम को सौंपा। शहर में खंदक बाजार, घंटाघर, हापुड़ रोड, वैली बाजार, आबूलेन, खैरनगर और सर्राफा बाजार आदि में कुछ दुकानें बंद रहीं, जबकि अधिकांश खुलीं। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रांतीय महामंत्री लोकेश अग्रवाल ने बताया कि इसके अलावा मवाना, इंचौली, सरधना, खरखौदा आदि में काफी दुकानें बंद रहीं। उन्होंने बताया कि व्यापारियों की मांग है कि सरकार व्यापारिक संगठनों के सुझावों को स्वीकार कर विसंगतियां दूर करे। उन्होंने कहा कि साल में तीन बार विवरणिका दाखिल करना व्यापारियों के लिए समस्या खड़ी करेगा। वहीं, कपड़ा व्यापारियों का बंद चौथे दिन भी जारी रहा। वे 27 जून से बाजार बंद कर इसका विरोध कर रहे हैं। दूसरी तरफ, संयुक्त व्यापार संघ तटस्थ भूमिका में रहा। उसने बंद कर रहे व्यापारियों का न समर्थन किया और न ही विरोध।
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जीएसटी को लेकर ये हैं मांगे 
- कपड़ा व्यवसाय पर जीएसटी लागू किया गया है, लेकिन 30 जून को व्यापारियों के पास एक्साइज दिए हुए कपड़े का जो स्टॉक है, उस स्टॉक की बिक्री करने पर उनको जीएसटी देना पड़ेगा। इस प्रकार उन पर दोहरे कर का भार पड़ेगा। लिहाजा कपड़े के वर्तमान स्टॉक को जीएसटी से मुक्त रखने की व्यवस्था की जाए। 
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- किसी भी व्यापारी के पास 30 जून को टैक्स दिए माल का जो भी स्टॉक है, उसे जीएसटी से मुक्त रखा जाए, साथ ही जो टैक्स दिया गया है उसका इनपुट जीएसटी में दिया जाए। 

- मंडी शुल्क को जीएसटी में शामिल नहीं किया गया है। मध्य प्रदेश, बिहार और दिल्ली में मंडी शुल्क लागू नहीं है। इस कारण से उत्तर प्रदेश के किराना और गल्ला व्यापारियों को कठिनाइयां होंगी। इसलिए उत्तर प्रदेश से मंडी शुल्क तत्काल समाप्त किया जाए। मंडी शुल्क या तो पूरे भारत में एक समान किया जाए या मंडी शुल्क को जीएसटी में शामिल किया जाए। 
- किराने पर दो दरें, स्टेशनरी पर तीन, दवा पर चार और जनरल मर्चेंट व्यापार पर चार दरें रखी गई है, इसमें सुधार किया जाए। 
- जुर्माने की दरों को व्यवहारिक और सरल बनाया जाए, किसी भी हालत में 5 से 20 हजार रुपये के बीच में ही जुर्माने की दरें हों। 
- एलईडी बल्ब को कर मुक्त किया जाए। 
- बिजली-पंखे, कूलर को 28 प्रतिशत की जगह 18 प्रतिशत की श्रेणी में रखा जाए। 
- खाद्य पदार्थ ब्रांडेड हो या बिना ब्रांड के, सभी को कर मुक्त किया जाए। 
- धारा-54 में रिफंड देर होने पर ब्याज छह प्रतिशत की जगह 18 प्रतिशत किया जाए। 
- धारा-21 (2) में जीएसटी अधिकारियों को पूर्वगामी प्रभाव से पंजीयन निरस्तीकरण का अधिकार दिया गया है, जो अनुचित है। 
- धारा 35 (1) में व्यापारी को स्टॉक रजिस्टर रखने की अनिवार्यता समाप्त की जाए। 
- व्यापारी अपनी मर्जी से वकील, सीए नहीं बदल सकते, इससे खत्म किया जाए। 
- भवन निर्माण के काम आने वाले सामान पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाए, अब 28 प्रतिशत लगा है। 
- बनाए गए भवनों पर 12 प्रतिशत जीएसटी को घटाकर 5 प्रतिशत किया जाए। 
- खादी, हैंडलूम और हथकरघा को प्रोत्साहन देने के लिए इन कपड़ों व इनसे बने सभी सामानों को करमुक्त श्रेणी में रखें। 
- बच्चों के प्लास्टिक के खिलौने आदि को जीएसटी में कर मुक्त की श्रेणी में रखा जाए। 
- व्यापारी की बकाया रिफंड स्वत: ही व्यापारी के खाते में भेजा जाए। 
- डेयरी प्रोडक्ट्स को 12 की जगह पूर्व की भांति पांच प्रतिशत की श्रेणी में रखा जाए। 
- मावा जीएसटी में कर मुक्त की श्रेणी में रखा जाए। 
- रफ आयरन स्क्रैप की दो दरें 18 और पांच प्रतिशत की जगह एक दर 5 प्रतिशत रखें। 
- पुराने टायरों पर 18 प्रतिशत की जगह पांच प्रतिशत की दर से कर लगाया जाए। 
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