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पांच महीने में एक्सप्रेसवे पर आठवां सड़क हादसा
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पांच महीने में एक्सप्रेसवे पर आठवां सड़क हादसा
मोदीनगर। ओवर स्पीड और एक्सप्रेसवे पर अंधेरा से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर लगातार सड़क हादसे हो रहे हैं। सोमवार सुबह भोजपुर थाना क्षेत्र में कलछीना गांव के पास तेज रफ्तार ट्रक की कार में जोरदार टक्कर हुई। हादसे में कार सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को मेरठ स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पर एक की मौत हो गई। जबकि दूसरे की हालत नाजुक बनी हुई है। दुर्घटना में कार क्षतिग्रस्त हो गई।
पुलिस ने बताया है कि हादसे के बाद चालक ट्रक छोड़कर फरार हो गया। ट्रक को कब्जे में ले लिया है। राजस्थान के जिला झुंझुनू निवासी रमेश मोहाल 27 पुत्र बनवारी लाल अपने मित्र कैलाश गिल के साथ कार से मेरठ की तरफ जा रहे थे। सोमवार सवेरे जैसे ही वह भोजपुर थाना क्षेत्र के कलछीना गांव के सामने पहुंचे तो तभी तेज रफ्तार ट्रक ने कार को टक्कर मार दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों को मेरठ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां रमेश मोहाल की मौत हो गई। हादसे के बाद एक्सप्रेस वे पर जाम की स्थिति बन गई। जिसे पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद सामान्य कराया।
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अंधेरे में एक्सप्रेसवे पर नहीं थम रहे हादसे
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के चौथे चरण को एक अप्रैल से यातायात के लिए खोला गया था। हालांकि उससे पहले से एक्सप्रेसवे पर दौड़ रहे थे। विधिवत रूप से खुलने से दो दिन पहले भी भोजपुर थाना क्षेत्र में दो कार आमने सामने भीड़ गई थी लेकिन एक्सप्रेसवे खुला तो उसके बाद भी हादसे नहीं रुके। अब तक आठ बड़े हादसे हुए हैं। सबसे ज्यादा हादसे चौथे चरण (डासना से मेरठ के बीच) में हो रहे हैं। 32 किलोमीटर लंबे इस हिस्से में लाइट की कोई व्यवस्था नहीं है। वहीं, कुछ जगहों पर एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार गाड़ी जंप करती है, जिसे हादसों की एक वजह माना जा रहा है। बारिश के बाद इसी हिस्से में सबसे ज्यादा मिट्टी धसने और सड़क बैठने की समस्या सामने आई है।
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इंतजाम पूरे पर नहीं काटे जा रहे चालान
सराय काले खां से मेरठ के बीच पूरे एक्सप्रेसवे पर 130 ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर (एएनपीआर) कैमरे लगाए गए हैं। एनएचएआई ने कैमरों के माध्यम से पूरे एक्सप्रेसवे पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूम बनाया है। डासना में एकेजी इंजीनियरिंग कॉलेज के सामने कंट्रोल रूम से पूरे एक्सप्रेसवे पर वाहनों के हर मूवमेंट को देखा जा सकता है। करीब तीन हफ्ते पहले एनएचएआई ने ट्रैफिक पुलिस को अपने सर्वर का लिंक भी दिया है, जिसके माध्यम से वो एक्सप्रेसवे पर नजर रख सकते हैं लेकिन उसके बाद भी ट्रैफिक पुलिस ओवर स्पीड, गलत दिशा में वाहन चलाने वालों के चालान नहीं काट रही है। एसपी ट्रैफिक रामानंद कुशवाहा का कहना है कि पुलिस को अपने स्तर पर सिस्टम बनाने में समय लग रहा है। जल्द ही ऑनलाइन चालान काटने की व्यवस्था लागू होगी।
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प्रमुख हादसे
3 मार्च - एक्सप्रेसवे खुलने से पहले भोजपुर से आगे दो कारें आपस में टकराई। पांच लोग घायल हुए।
30 मार्च - भोजपुर से आगे और मेरठ की सीमा से पहले कार और ट्रक की टक्कर हुई।
1 अप्रैल - भोजपुर से पहले दो वाहन आपस में भिड़े
09 अप्रैल - मसूरी थाना क्षेत्र में एक्सप्रेसवे पर डंपर ने बाइक को टक्कर मारी, बुजुर्ग समेत दो की मौत।
05 जुलाई - अनियंत्रित कार डिवाइडर से जाकर टकराई, तीन दोस्तों की मौके पर ही मौत।
30 जुलाई - तीन वाहन आपस में भिड़े, कार सवार युवक की मौत हुई।
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मोदीनगर। ओवर स्पीड और एक्सप्रेसवे पर अंधेरा से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर लगातार सड़क हादसे हो रहे हैं। सोमवार सुबह भोजपुर थाना क्षेत्र में कलछीना गांव के पास तेज रफ्तार ट्रक की कार में जोरदार टक्कर हुई। हादसे में कार सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को मेरठ स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पर एक की मौत हो गई। जबकि दूसरे की हालत नाजुक बनी हुई है। दुर्घटना में कार क्षतिग्रस्त हो गई।
पुलिस ने बताया है कि हादसे के बाद चालक ट्रक छोड़कर फरार हो गया। ट्रक को कब्जे में ले लिया है। राजस्थान के जिला झुंझुनू निवासी रमेश मोहाल 27 पुत्र बनवारी लाल अपने मित्र कैलाश गिल के साथ कार से मेरठ की तरफ जा रहे थे। सोमवार सवेरे जैसे ही वह भोजपुर थाना क्षेत्र के कलछीना गांव के सामने पहुंचे तो तभी तेज रफ्तार ट्रक ने कार को टक्कर मार दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों को मेरठ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां रमेश मोहाल की मौत हो गई। हादसे के बाद एक्सप्रेस वे पर जाम की स्थिति बन गई। जिसे पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद सामान्य कराया।
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अंधेरे में एक्सप्रेसवे पर नहीं थम रहे हादसे
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के चौथे चरण को एक अप्रैल से यातायात के लिए खोला गया था। हालांकि उससे पहले से एक्सप्रेसवे पर दौड़ रहे थे। विधिवत रूप से खुलने से दो दिन पहले भी भोजपुर थाना क्षेत्र में दो कार आमने सामने भीड़ गई थी लेकिन एक्सप्रेसवे खुला तो उसके बाद भी हादसे नहीं रुके। अब तक आठ बड़े हादसे हुए हैं। सबसे ज्यादा हादसे चौथे चरण (डासना से मेरठ के बीच) में हो रहे हैं। 32 किलोमीटर लंबे इस हिस्से में लाइट की कोई व्यवस्था नहीं है। वहीं, कुछ जगहों पर एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार गाड़ी जंप करती है, जिसे हादसों की एक वजह माना जा रहा है। बारिश के बाद इसी हिस्से में सबसे ज्यादा मिट्टी धसने और सड़क बैठने की समस्या सामने आई है।
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इंतजाम पूरे पर नहीं काटे जा रहे चालान
सराय काले खां से मेरठ के बीच पूरे एक्सप्रेसवे पर 130 ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर (एएनपीआर) कैमरे लगाए गए हैं। एनएचएआई ने कैमरों के माध्यम से पूरे एक्सप्रेसवे पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूम बनाया है। डासना में एकेजी इंजीनियरिंग कॉलेज के सामने कंट्रोल रूम से पूरे एक्सप्रेसवे पर वाहनों के हर मूवमेंट को देखा जा सकता है। करीब तीन हफ्ते पहले एनएचएआई ने ट्रैफिक पुलिस को अपने सर्वर का लिंक भी दिया है, जिसके माध्यम से वो एक्सप्रेसवे पर नजर रख सकते हैं लेकिन उसके बाद भी ट्रैफिक पुलिस ओवर स्पीड, गलत दिशा में वाहन चलाने वालों के चालान नहीं काट रही है। एसपी ट्रैफिक रामानंद कुशवाहा का कहना है कि पुलिस को अपने स्तर पर सिस्टम बनाने में समय लग रहा है। जल्द ही ऑनलाइन चालान काटने की व्यवस्था लागू होगी।
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प्रमुख हादसे
3 मार्च - एक्सप्रेसवे खुलने से पहले भोजपुर से आगे दो कारें आपस में टकराई। पांच लोग घायल हुए।
30 मार्च - भोजपुर से आगे और मेरठ की सीमा से पहले कार और ट्रक की टक्कर हुई।
1 अप्रैल - भोजपुर से पहले दो वाहन आपस में भिड़े
09 अप्रैल - मसूरी थाना क्षेत्र में एक्सप्रेसवे पर डंपर ने बाइक को टक्कर मारी, बुजुर्ग समेत दो की मौत।
05 जुलाई - अनियंत्रित कार डिवाइडर से जाकर टकराई, तीन दोस्तों की मौके पर ही मौत।
30 जुलाई - तीन वाहन आपस में भिड़े, कार सवार युवक की मौत हुई।