गिरोह का पर्दाफाश: ऑन डिमांड बनते थे अवैध हथियार, ऑनलाइन मिलते थे ऑर्डर, गजब तरकीब से होती थी सप्लाई
व्हाटसएप पर फोटो देखकर हथियार पसंद करिए और ऑर्डर कर दीजिए। ऑन डिमांड हथियार बनाकर सप्लाई करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। सप्लाई करने के लिए भी गजब की तरकीब इस्तेमाल की जा रही थी।
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ऑनलाइन ऑर्डर लेकर तमंचे बनाने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। कोतवाली क्षेत्र के महल तोपचीवाड़ा में हथियार बनाने की फैक्टरी चल रही थी। कोतवाली पुलिस और स्वाॅट टीम ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। तमंचे बनाने के बाद आरोपी इन्हें खाने के डिब्बों में रखकर सप्लाई करते थे।
आरोपियों के पास से 10 निर्मित, 12 अर्द्धनिर्मित तमंचे और इन्हें बनाने के उपकरण बरामद किए गए हैं। यह गिरोह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पिछले छह महीने में 200 से अधिक तमंचे सप्लाई कर चुका है।
एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि कोतवाली थाना पुलिस को काफी समय से अवैध हथियार बनाकर सप्लाई किए जाने की सूचना मिल रही थी। शनिवार रात पुलिस को जानकारी मिली कि दो लोग अवैध हथियारों की सप्लाई देने वाले हैं। सूचना पर स्वाॅट टीम और थाना पुलिस ने कोतवाली क्षेत्र के महल तोपचीवाड़ा में खाली पड़े मकान में छापा मारा। यहां अवैध हथियार बनाने की फैक्टरी मिली।
पुलिस ने मौके से तितावी मुजफ्फरनगर निवासी इकबाल और शौकीन को गिरफ्तार कर लिया। दोनों के खिलाफ केस दर्ज कर कोर्ट में पेश किया गया। यहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। आरोपी इकबाल और शौकीन पर मुजफ्फरनगर में मुकदमे दर्ज हैं। इकबाल मुजफ्फरनगर और बुलंदशहर जिले से जेल जा चुका है। आरोपियों के मोबाइल कब्जे में लेकर इनके हथियार बेचने के नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है। जांच में इस काम में अन्य आरोपियों के नाम सामने आने पर उन्हें भी गिरफ्तार किया जाएगा।
एसपी सिटी ने बताया कि इकबाल और शौकीन के मुताबिक लंबे समय से यह काम कर रहे थे। ये लोगों को व्हाट्सएप पर फोटो भेजकर तमंचों के ऑर्डर लेते थे। बिचौलियों के माध्यम से ये तस्वीरें खरीदारों तक भेजी जाती थीं। खरीदार तस्वीरें देखकर तमंचा पसंद करता था। इसके बाद इकबाल और शौकीन उस तस्वीर के अनुसार हथियार बनाकर तैयार करते थे। फिर तमंचे को खाने के डिब्बे, झोले, खाने की चीजों वाले पैकेटों में रखकर खरीदार तक भेजते थे। बिचौलियों के जरिए पूरी डील ऑनलाइन पूरी होती थी। उन्होंने बताया कि खाने के डिब्बों में इसलिए सप्लाई करते थे ताकि किसी को शक न हो। वह तीन हजार से पांच हजार रुपये में तमंचा दे रहे थे।
पुलिस की जांच में सामने आया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लाखों के हथियार सप्लाई किए जा चुके हैं। इन लोगों ने किस-किस को हथियार सप्लाई किए हैं, इसकी जानकारी भी पुलिस जुटा रही है। मेरठ, मुजफ्फरनगर सहित अन्य जिलों में अवैध हथियार बेचे गए हैं। पुलिस से बचने के लिए बार-बार अवैध हथियार बनाने की जगह बदल लेते थे। अपने साथ हथियार बनाने के उपकरण लेकर चलते थे। सुरक्षित स्थान तलाश कर काम शुरू कर देते थे।