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समझौत के बाद ही दी जा सकी समाधि

Thu, 31 Oct 2019 02:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 31 Oct 2019 02:15 AM IST
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funral could be given after agreement
समझौते के बाद ही दी जा सकी समाधि
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हस्तिनापुर। वन आरक्षित क्षेत्र से गुजरने वाली मध्य गंग नहर के किनारे स्थित मां भद्रकाली सिद्धपीठ मंदिर के प्रांगण में बुधवार को महराज की समाधि के स्थल बनाने को लेकर गिरी एवं पुरी संप्रदाय के लोग आमने-सामने आ गए। प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी द्वारा दोनों पक्षों में समझौता कराकर सूर्य अस्त से पूर्व ही महाराज के पार्थिव शरीर को समाधि दी गई।
ग्राम अकबरपुर इच्छाबाद के समीप मध्य गंग नहर किनारे स्थित प्राचीन मां भद्रकाली सिद्धपीठ मंदिर में महाराज नंदू गिरी महाराज रहते थे। बीमारी के चलते बीती मंगलवार देर रात्रि झुनझुनी निवासी 60 वर्षीय नंदू गिरी महाराज का निधन हो गया। वह गिरी पंथ से ताल्लुक रखते थे। इसके बाद गिरी पंथ के लोगों ने उनके अंतिम संस्कार की सभी क्रियाएं पूरी कर मंदिर प्रांगण में उनको समाधि देने का निर्णय किया। वे बुधवार सुबह पार्थिव शरीर को लेकर भद्रकाली मंदिर पहुंचे। इसके बाद वहां मौजूद रामा गिरी महाराज और उनके समर्थकों ने मंदिर प्रांगण में समाधि नहीं बनाने की बात कही। इसकी जानकारी मंदिर के रिसीवर खंड विकास अधिकारी शैलेंद्र कुमार को दी गई। उनसे जानकारी पाकर पुलिस पहुंच गई। पुलिस के मुताबिक नंदू गिरी महाराज के पार्थिव शरीर के साथ आए ग्रामीणों और पुरी समाज के संतों ने मंदिर प्रांगण में समाधि देने का कार्य रुकवा दिया। इससे वहां पर मौजूद गिरी पंथ के साधु संत आक्रोशित हो गए। इसके चलते मंदिर परिसर में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। दिनभर गहमागहमी के बाद शाम करीब पांच बजे मौके पर पहुंचे सहायक विकास अधिकारी विनीत भटनागर एवं एसएसआई करतार सिंह के प्रयास से दोनों पक्षों में सहमति बनी। इस पर दोनों पक्षों ने महाराज का समाधि स्थल भद्रकाली मंदिर की उत्तर दिशा में बनाने का निर्णय किया। इसके बाद गिरी और पुरी पक्ष के संतों ने महाराज नंदू गिरी के पार्थिव शरीर को विधिविधान से समाधि दी।
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दोनों पक्षों में कराया समझौता
पुलिस के एसएसआई करतार सिंह, एसआई देवेंद्र, आशीष कुमार एवं रविंद्र कुमार ने दोनों पक्षों को समझाया। पार्थिव शरीर के साथ आए गिरी पंथ के लोग समाधि स्थल पर रोक लगाए जाने के कारण आक्रोशित हो गए थे और पार्थिव शरीर को यथास्थिति में छोड़कर जाने की धमकी देने लगे थे।
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