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सीबीआई ने हाजी इकबाल के मकान पर मारा था छापा, जल्द हो सकती है गिरफ्तारी, ऐसे हुआ मालामाल

Thu, 11 Jul 2019 01:25 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: कपिल kapil Updated Thu, 11 Jul 2019 01:25 AM IST
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Former MLC Haji Mohammed Iqbal was got rich from illegal mining in Saharanpur
कार्रवाई के दौरान सीबीआई की टीम - फोटो : अमर उजाला

सहारनपुर में चीनी मिलें खरीदने के मामले में सीबीआई के छापे के बाद पूर्व एमएलसी हाजी मोहम्मद इकबाल के दोनों बेटों और अन्य आरोपियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। जिस तेजी से सीबीआई की जांच चल रही है, उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि जल्दी ही आरोपियों की गिरफ्तारी भी की जा सकती है। 

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दरअसल, मोहम्मद इकबाल के पास अकूत संपत्ति को लेकर पूर्व में दिवंगत सांसद हुकुम सिंह ने भी संसद में सवाल उठाया था। उन्होंने मोहम्मद इकबाल के पास 10 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति को लेकर जांच कराने की मांग की थी। उस दौरान यही आरोप लगाए गए थे कि खनन के खेल में मोहम्मद इकबाल मालामाल होता गया। खनन का नेटवर्क सिर्फ सहारनपुर जनपद में नहीं, बल्कि पड़ोसी जनपद शामली तक फैला हुआ था। शामली के बिडौली में भी मोहम्मद इकबाल के लोगों ने खनन किया था, जहां काफी समय तक इनके रेत का स्टाक भी रहा। इसके अलावा सहारनपुर जनपद में बड़ी संख्या में स्टोन क्रशर हैं, तो मिर्जापुर, बेहट, सरसावा, गंगोह सहित विभिन्न इलाकों में खनन चलता रहा था। खनन के इस खेल में मोटी कमाई होती रही। 
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उधर, सहारनपुर के एक गांव के रहने वाले विश्वास कुमार ने भी अदालत में याचिका डाली थी, जिसके बाद एसएफआईओ ने जांच की थी और फिर 2017 में लखनऊ के गोमतीनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई थी।

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इसके बाद अप्रैल 2019 में मामला सीबीआई ने अपने थाने में दर्ज किया था। चीनी मिलें खरीदने में इस्तेमाल की गई मुखौटा कंपनियों के निदेशक सौरभ मुकुंद के मकान और मिर्जापुर में मोहम्मद इकबाल तथा नसीम के मकान पर सीबीआई ने मंगलवार को छापा मारा था। अब अनुमान लगाया जा रहा है कि चीनी मिलें खरीदने के मामले में नामजद सातों आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास तेज होंगे। इनमें मोहम्मद इकबाल के दोनों बेटे जावेद और वाजिद भी आरोपी हैं। 

सियासी रसूख भी बढ़ाता रहा 
मोहम्मद इकबाल ने पैसा कमाने के साथ ही राजनीतिक पावर बढ़ाने का भी खूब प्रयास किया। खुद बसपा के टिकट पर एमएलसी का चुनाव जीता और फिर अपने भाई महमूद अली को भी बसपा के टिकट पर ही एमएलसी का चुनाव लड़ाया। वर्तमान में महमूद अली बसपा एमएलसी हैं। एक दौर यह था कि प्रदेश सरकार में मोहम्मद इकबाल की मजबूत पकड़ बताई जाती थी, जिसके चलते बसपा के आला नेताओं का करीबी बन गया। उधर, 2017 में जब प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ, तो मोहम्मद इकबाल के खिलाफ शिकायतों के बाद जांच का सिलसिला शुरू हुआ। 

संपत्तियों को लेकर भी रहा विवाद  
जुलाई 2018 में सहारनपुर अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) न्यायालय ने बसपा एमएलसी महमूद अली एवं पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल समेत चार लोगों द्वारा एक महिला से खरीदी गई 2564.71 वर्ग गज भूमि पर बनाए गए मकान को सरकारी संपत्ति घोषित किया था, लेकिन इस मामले में हाईकोर्ट से स्टे ऑर्डर प्राप्त कर लिया गया था। यह मामला काफी समय तक एडीएम (एफ) कोर्ट में विचाराधीन रहा था।

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