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फाइलों में फेरे लगा रही फेरी नीति
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Sun, 09 Oct 2016 02:28 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय फेरी नीति के तहत शहर की सड़कों से ठेलों को हटाने और शहर को जाम मुक्त करने की योजना को पलीता लगता दिख रहा है। करीब आठ माह में योजना की डीपीआर पर भी लाखों रुपये खर्च हो चुकें हैं, लेकिन अभी तक योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया गया। अभी तक कुछ ही वेंडर्स की गणना की गई है, लेकिन उन्हें स्थायी जगह देने के लिए गठित होने वाली कमेटी पर भी विचार तक नहीं किया गया। इस कारण शहर को जाम से मुक्ति नहीं मिल रही। सरकारी मशीनरी सरकार की योजनाओं को पलीता लगाने का काम कर रही है।
यह है राष्ट्रीय फेरी नीति
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय फेरी नीति 2014 बनाई थी। इसमें एक घटक के रूप में शहरी पथ विक्रेताओं को सम्मान जनक जीवनयापन एवं आजीविका की सुरक्षा मिलेगी। वहीं जगह-जगह फुटपाथ पर या खड़े होकर दुकान लगाने वालों लोगों से भी निजात मिलेगी। फेरी नीति के तहत इन्हें खाली जगह पर स्थानांतरित करने की योजना थी, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ।
पैंठ भी है जाम का मुख्य कारण
पैंठ बाजारों से जाम का मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया। जिसमें नगर निगम और जिला प्रशासन को न्यायालय तलब भी कर चुका है। उसके बाद भी पैंठ बाजारों को स्थानांतरित नहीं किया गया है। फेरी नीति में शहर की सड़कों से पैंठ बाजारों को हटाकर आसपास खाली स्थान पर स्थानांतरित करने की योजना थी। शहर में इंदिरा चौक से बुढ़ाना गेट तक सोमवार को लगने वाले पैंठ बाजार और शुक्रवार को ओडियन नाला पटरी- शारदा रोड पर लगने वाले पैंठ बाजार के लोग जाम से जूझते हैं। राष्ट्रीय फेरी नीति पर प्रशासन काम करता तो जाम से मुक्ति मिल जाती। फेरी नीति में पथ विक्रेता को सड़क से आठ फिट दूर खाली जगह पर ही दुकान लगाने का अधिकार दिया जाएगा।
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चौराहों से 50 मी. दूर खड़े होने थे ठेले
चौराहों पर थ्री व्हीलर और ठेले वालों का कब्जा है। फेरी नीति में शहर के सभी चौराहे 50- 50 मीटर तक और फुटपाथ पूरी तरह खाली होने हैं। नीति लागू होने के बाद जहां चौराहे सुंदर होंगे वहीं यातायात भी प्रभावित नहीं होगा। वहीं प्राकृतिक बाजार में सभी मूलभूत सुविधा जैसे शौचालय, पीने का पानी, स्ट्रीट लाइट होंगी, वहीं वेंडर्स को पूरी सुरक्षा के साथ सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा।
फायदे की योजना भी लागू नहीं
राष्ट्रीय फेरी नीति के अंतर्गत पथ विक्रेताओं को पांच साल के लिए पंजीकरण कराना था। जिससे पंजीकरण के नाम पर निगम का खजाना भरेगा। आय का साधन होने के बाद भी नगर निगम प्रशासन फाइलों दबाकर बैठ गया।
इस तरह होगी निगम को आय
- सामान्य श्रेणी के दुकानदारों को 200 रुपये, एससी-एसटी को 100 रुपये, पिछड़ा वर्ग को 100 रुपये, महिला वर्ग को 50 रुपये, विकलांग को 20 रुपये और 60 वर्ष से अधिक आयु के पथ विक्रेता को 20 रुपये पंजीकरण शुल्क के रूप में निगम में जमा कराने होंगे।
हो चुकी है वेंडर्स की गणना
शहर में 18,250 वेंडर्स की गणना की गई है। वेंडर्स के रजिस्ट्रेशन भी खोले गए थे। निगम के सभी जोनल कार्यालयों पर कैंप लगाने की भी योजना थी। जो केवल फाइलों में ही दबकर रह गई।
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यह है राष्ट्रीय फेरी नीति
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय फेरी नीति 2014 बनाई थी। इसमें एक घटक के रूप में शहरी पथ विक्रेताओं को सम्मान जनक जीवनयापन एवं आजीविका की सुरक्षा मिलेगी। वहीं जगह-जगह फुटपाथ पर या खड़े होकर दुकान लगाने वालों लोगों से भी निजात मिलेगी। फेरी नीति के तहत इन्हें खाली जगह पर स्थानांतरित करने की योजना थी, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ।
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पैंठ भी है जाम का मुख्य कारण
पैंठ बाजारों से जाम का मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया। जिसमें नगर निगम और जिला प्रशासन को न्यायालय तलब भी कर चुका है। उसके बाद भी पैंठ बाजारों को स्थानांतरित नहीं किया गया है। फेरी नीति में शहर की सड़कों से पैंठ बाजारों को हटाकर आसपास खाली स्थान पर स्थानांतरित करने की योजना थी। शहर में इंदिरा चौक से बुढ़ाना गेट तक सोमवार को लगने वाले पैंठ बाजार और शुक्रवार को ओडियन नाला पटरी- शारदा रोड पर लगने वाले पैंठ बाजार के लोग जाम से जूझते हैं। राष्ट्रीय फेरी नीति पर प्रशासन काम करता तो जाम से मुक्ति मिल जाती। फेरी नीति में पथ विक्रेता को सड़क से आठ फिट दूर खाली जगह पर ही दुकान लगाने का अधिकार दिया जाएगा।
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चौराहों से 50 मी. दूर खड़े होने थे ठेले
चौराहों पर थ्री व्हीलर और ठेले वालों का कब्जा है। फेरी नीति में शहर के सभी चौराहे 50- 50 मीटर तक और फुटपाथ पूरी तरह खाली होने हैं। नीति लागू होने के बाद जहां चौराहे सुंदर होंगे वहीं यातायात भी प्रभावित नहीं होगा। वहीं प्राकृतिक बाजार में सभी मूलभूत सुविधा जैसे शौचालय, पीने का पानी, स्ट्रीट लाइट होंगी, वहीं वेंडर्स को पूरी सुरक्षा के साथ सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा।
फायदे की योजना भी लागू नहीं
राष्ट्रीय फेरी नीति के अंतर्गत पथ विक्रेताओं को पांच साल के लिए पंजीकरण कराना था। जिससे पंजीकरण के नाम पर निगम का खजाना भरेगा। आय का साधन होने के बाद भी नगर निगम प्रशासन फाइलों दबाकर बैठ गया।
इस तरह होगी निगम को आय
- सामान्य श्रेणी के दुकानदारों को 200 रुपये, एससी-एसटी को 100 रुपये, पिछड़ा वर्ग को 100 रुपये, महिला वर्ग को 50 रुपये, विकलांग को 20 रुपये और 60 वर्ष से अधिक आयु के पथ विक्रेता को 20 रुपये पंजीकरण शुल्क के रूप में निगम में जमा कराने होंगे।
हो चुकी है वेंडर्स की गणना
शहर में 18,250 वेंडर्स की गणना की गई है। वेंडर्स के रजिस्ट्रेशन भी खोले गए थे। निगम के सभी जोनल कार्यालयों पर कैंप लगाने की भी योजना थी। जो केवल फाइलों में ही दबकर रह गई।