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Exclusive: कैसे पता चले दवा असरदार, ड्रग इंस्पेक्टर दो, स्टोर 4 हजार, तीन माह से नहीं आई दवाओं की सैंपल रिपोर्ट

Wed, 13 Jul 2022 11:26 AM IST
Dimple Sirohi अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ
अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 13 Jul 2022 11:26 AM IST
सार

ड्रग इंस्पेक्टरों की कमी की वजह से दवा विक्रेता लाइसेंस नवीनीकरण, सत्यापन आदि को लेकर भी परेशान रहते हैं। इन पदों को भरने के लिए कई बार पत्र लिखा गया, लेकिन अभी तक पोस्ट को भरने के लिए कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। 

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Exclusive: How to know drug is effective, drug inspector two, store 4 thousand in Meerut
- फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

आप मानक के अनुरूप तैयार दवाइयां खा रहे हैं या नहीं, यह समय से पता नहीं चल पा रहा है। शहर में करीब चार हजार मेडिकल स्टोर हैं और इनकी निगरानी का जिम्मा महज दो ड्रग इंस्पेक्टरों पर है।

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मानक के अनुसार 200 मेडिकल स्टोरों पर एक ड्रग इंस्पेक्टर होना चाहिए। जिले में 18 ड्रग इंस्पेक्टरों की कमी है। वहीं दवा के सैंपल की रिपोर्ट भी समय पर नहीं आ रही है। तीन माह पहले 100 दवाओं के सैंपल लिए गए थे पर इनकी रिपोर्ट अब तक नहीं आई है।
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ड्रग इंस्पेक्टरों की कमी की वजह से सभी दुकानों की जांच नियमित रूप से नहीं हो पाती है। जब कभी गलत या खराब दवा की सूचना मिलती है, तभी जांच की जाती है। दवा की दुकानों से सैंपल लेने के बाद आने वाली रिपोर्ट की जानकारी भी किसी को नहीं दी जाती है। इसका फायदा दवा विक्रेता उठा रहे हैं और खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। ड्रग लाइसेंस बनाने, पुराने लाइसेंस के नवीनीकरण, सत्यापन आदि का काम ड्रग इंस्पेक्टर के कंधों पर रहता है।
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ड्रग इंस्पेक्टरों की कमी की वजह से दवा विक्रेता लाइसेंस नवीनीकरण, सत्यापन आदि को लेकर भी परेशान रहते हैं। इन पदों को भरने के लिए कई बार पत्र लिखा गया, लेकिन अभी तक पोस्ट को भरने के लिए कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। 

शुरू नहीं हुई लैब
दवाओं की जांच के लिए मेरठ की लैब अभी शुरू नहीं हो पाई है। दवाओं के सैंपल जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला में भेजे जाते हैं। वहां सैंपलों की संख्या ज्यादा होने के कारण रिपोर्ट आने में देरी होती है। ड्रग इंस्पेक्टर पवन कुमार शाक्य का स्थानांतरण मुजफ्फरनगर जिले में कर दिया गया है, इनकी जगह पीयूष कुमार नए ड्रग इंस्पेक्टर आए हैं। एक इंस्पेक्टर प्रियंका चौधरी हैं।

रिपोर्ट आने में समय लग जाता है
रिपोर्ट आने में समय लगता है। तीन माह से करीब 100 दवा सैंपलों की रिपोर्ट नहीं आई है। वैसे दो माह का समय तो  कम से कम लगता ही है। - प्रियंका चौधरी, ड्रग इंस्पेक्टर

इन दवाओं के लिए थे सैंपल
बुखार, खांसी, जुकाम, स्किन, कफ सीरप, पेट दर्द और एंटीबायोटिक आदि दवाओं में यह जांच की जाती है कि जो रेपर पर लिखा है, वह मानक के अनुरूप है या नहीं। दवा में संबंधित साल्ट की मात्रा ज्यादा या कम तो नहीं है। यह भी जांचा जाता है कि जिस कंपनी की दवा है उसके पास इस दवा को बनाने का लाइसेंस है या नहीं।

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