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10 करोड़ डुबाने की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Fri, 08 Jul 2016 02:02 AM IST
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एमडीए
- फोटो : अमर उजाला
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एमडीए में सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है। जो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) दस करोड़ रुपये खर्च कर बीस साल के लिए लगाया गया था उसे अब ‘निरर्थक’ साबित करने की तैयारी हो रही है। मात्र साढ़े छह साल बाद अब नया एसटीपी लगाने का प्लान है।
शहर के सीवर सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए वर्ष 2008 से लेकर वर्ष 2010 तक एमडीए की विभिन्न आवासीय योजनाओं में एसटीपी लगाए गए थे। खास तौर पर पल्लवपुरम, रक्षापुरम, शताब्दीनगर, सैनिक विहार, रक्षापुरम लोहियानगर तथा श्रद्घापुरी योजना में इन पर पर काम हुआ। दरअसल, कॉलोनियों का गंदा पानी सीवर लाइनों के माध्यम से इन एसटीपी में जाना था। वहां ट्रीटमेंट के बाद इस पानी का डिस्पोजल होना था, लेकिन यह सफल नहीं हो पाए।
बीस साल के लिए लगाए गए थे एसटीपी
जब एसटीपी लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया तो प्रस्ताव में रखा गया कि एसटीपी लगने के बाद बीस साल तक योजनाओं में कोई परेशानी नहीं होगी। यानी एसटीपी की आयु बीस साल रखी गई थी। इनमें से कई एसटीपी लगातार विवाद में फंसे हैं।
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छह साल पहले ही लगा था
श्रद्घापुरी योजना में छह एमएलडी का एसटीपी लगा है, जो लगभग दस करोड़ रुपये खर्च कर लगाया गया था। जनवरी 2010 में यह शुरू हो गया था। बीस साल तक इसे काम करना था, लेकिन अब एक एसटीपी लगाने की तैयारी की जा रही है। कारण, एसटीपी तक सीवर का पानी जा नहीं पा रहा है। पिछले दिनों इस बाबत हुई बैठक में एमडीए अधिकारियों ने कहा कि नया एसटीपी बीच सीवर ट्रैक पर लगाना होगा।
सीवर लाइन में हुआ था घोटाला
वर्ष 2010 में यहां नई सीवर लाइन डाली गई थी, जिसमें गड़बड़झाला हुआ। पुरानी लाइन तीस फीट गहराई पर डाली गई लेकिन नई लाइन मात्र 15 फीट की गहराई पर ही डाल दी गई। अब तीस फीट गहराई पर बह रहा पानी 15 फीट ऊपर नई सीवर लाइन में कैसे चढ़ता। ऐसे में एसटीपी तक पानी जा ही नहीं रहा है और सीवर ओवर फ्लो हैं। कभी कभी पंपजेट लगाकर पानी को आगे फेंकने का काम करने की कवायद होती है। अब एमडीए अधिकारी कह रहे हैं कि यहां नया एसटीपी ही लगाना होगा। लेकिन दस करोड़ रुपये के इस एसटीपी को निरर्थक बनाने की जवाबदेही किसकी होगी, इसके लिए अभी कोई गंभीरता दिखाई नहीं दी है।
खाद का पता नहीं
इन एसटीपी से खाद भी बनाना था पर यह बना या नहीं, इसका कोई रिकॉर्ड एमडीए के पास नहीं है। इस बाबत कहा जा रहा है कि एमडीए ने अपनी योजनाओं में पार्कों में खाद लगा दिया पर कितना खाद लगाया इसक ा कोई हिसाब नहीं। है।
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शहर के सीवर सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए वर्ष 2008 से लेकर वर्ष 2010 तक एमडीए की विभिन्न आवासीय योजनाओं में एसटीपी लगाए गए थे। खास तौर पर पल्लवपुरम, रक्षापुरम, शताब्दीनगर, सैनिक विहार, रक्षापुरम लोहियानगर तथा श्रद्घापुरी योजना में इन पर पर काम हुआ। दरअसल, कॉलोनियों का गंदा पानी सीवर लाइनों के माध्यम से इन एसटीपी में जाना था। वहां ट्रीटमेंट के बाद इस पानी का डिस्पोजल होना था, लेकिन यह सफल नहीं हो पाए।
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बीस साल के लिए लगाए गए थे एसटीपी
जब एसटीपी लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया तो प्रस्ताव में रखा गया कि एसटीपी लगने के बाद बीस साल तक योजनाओं में कोई परेशानी नहीं होगी। यानी एसटीपी की आयु बीस साल रखी गई थी। इनमें से कई एसटीपी लगातार विवाद में फंसे हैं।
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छह साल पहले ही लगा था
श्रद्घापुरी योजना में छह एमएलडी का एसटीपी लगा है, जो लगभग दस करोड़ रुपये खर्च कर लगाया गया था। जनवरी 2010 में यह शुरू हो गया था। बीस साल तक इसे काम करना था, लेकिन अब एक एसटीपी लगाने की तैयारी की जा रही है। कारण, एसटीपी तक सीवर का पानी जा नहीं पा रहा है। पिछले दिनों इस बाबत हुई बैठक में एमडीए अधिकारियों ने कहा कि नया एसटीपी बीच सीवर ट्रैक पर लगाना होगा।
सीवर लाइन में हुआ था घोटाला
वर्ष 2010 में यहां नई सीवर लाइन डाली गई थी, जिसमें गड़बड़झाला हुआ। पुरानी लाइन तीस फीट गहराई पर डाली गई लेकिन नई लाइन मात्र 15 फीट की गहराई पर ही डाल दी गई। अब तीस फीट गहराई पर बह रहा पानी 15 फीट ऊपर नई सीवर लाइन में कैसे चढ़ता। ऐसे में एसटीपी तक पानी जा ही नहीं रहा है और सीवर ओवर फ्लो हैं। कभी कभी पंपजेट लगाकर पानी को आगे फेंकने का काम करने की कवायद होती है। अब एमडीए अधिकारी कह रहे हैं कि यहां नया एसटीपी ही लगाना होगा। लेकिन दस करोड़ रुपये के इस एसटीपी को निरर्थक बनाने की जवाबदेही किसकी होगी, इसके लिए अभी कोई गंभीरता दिखाई नहीं दी है।
खाद का पता नहीं
इन एसटीपी से खाद भी बनाना था पर यह बना या नहीं, इसका कोई रिकॉर्ड एमडीए के पास नहीं है। इस बाबत कहा जा रहा है कि एमडीए ने अपनी योजनाओं में पार्कों में खाद लगा दिया पर कितना खाद लगाया इसक ा कोई हिसाब नहीं। है।