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डेंगू के डंक से करें सेल्फ डिफेंस

Sat, 19 Sep 2015 01:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला मेरठ
ब्यूरो/अमर उजाला मेरठ Updated Sat, 19 Sep 2015 01:51 AM IST
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Dengu
डेंगू के डंक ने लोगों को सशंकित कर रखा है। हर दिन नए मामले सामने आ रहे हैं। मरीजों की जान जा रही है। लेकिन, जिला स्वास्थ्य विभाग पुष्टि करने को भी तैयार नहीं है।
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विभागीय अधिकारी डेंगू से हो रही मौतों को दूसरी बीमारियों से जोड़कर बता रहे हैं। विभाग का तर्क है कि रिपोर्ट के बिना डेंगू की पुष्टि नहीं की जा सकती।

यही नहीं, जिला स्वास्थ्य विभाग ने इससे निपटने की कोई प्लानिंग भी नहीं की है। उसके पास न फॉगिंग का इंतजाम है और न ही लोगों को जागरूक करने की कोई व्यवस्था। ऐसे में जरूरी है कि खुद के स्वास्थ्य के लिए आप खुद सावधान रहें। दिन और रात के तापमान में भारी उतार-चढ़ाव का यह मौसम डेंगू मच्छर के लिए बेहद अनुकूल है।
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अस्पतालों में डेंगू मरीजों की संख्या हर रोज बढ़ रही है। वायरल की चपेट में आने वाले व्यक्ति के भी मन में यही शंका है कि कहीं डेंगू तो नहीं हो गया। ऐसे में आप कुछ बातों का ख्याल रखें तो डेंगू से बच सकते हैं।
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ऐसे करें पहचान
- गले में खराश के साथ सिर दर्द की शिकायत
- अचानक शरीर में दर्द और तेज बुखार आना
- जोड़ों में दर्द के साथ मांसपेशियों में तेज दर्द
- चक्कर और पेट दर्द के साथ ही दस्त आना
- आंखों के पिछले हिस्से में दर्द के साथ जलन
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बचाव के तरीके
- कपड़े धोने की जगह न पानी जमा होने दें और न ही गीले कपड़े रखें
- डस्टबिन घर के बाहरी हिस्से में रखें
- रोजाना कूड़ा फेंकें और डस्टबिन को ढंककर रखें
- घर में पानी की टंकियों को अच्छी तरह से ढंक दें
- घर के आसपास के गड्ढों में लार्वा भक्षी मछलियां या केरोसिन डालें
- घर में रखे टायर या कूलर में पानी न इकट्ठा होने दें
- रुकी हुई नालियों को साफ रखें और गड्ढों को भर दें
- बर्तनों को रोज खाली करके उन्हें सुखाकर पानी भरें
- डेंगू का मच्छर साफ पानी में पनपता है, इसलिए टंकी साफ रखें
- डेंगू का मच्छर सामान्य मच्छर से थोड़ा बड़ा होता है
- यह सुबह और शाम के वक्त ही काटता है
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इन बातों का रखें ख्याल
- अगर साधारण डेंगू का बुखार है तो मरीज की देखभाल घर पर ही की जा सकती है
- डॉक्टर की सलाह लेकर साधारण पैरासिटामॉल ली जा सकती है
- बुखार होने पर किसी भी सूरत में एस्पिरिन या डिस्प्रिन न लें। इससे शरीर में प्लेटलेट्स कम होती हैं, जिससे हालत बिगड़ सकती है
- बुखार 102 डिग्री से ज्यादा हो तो मरीज के सिर पर ठंडे पानी की पट्टी रखें
- पानी उबालकर ठंडा करके ही पीयें
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डेंगू है तो घबराइये मत
जांच रिपोर्ट में डेंगू की पुष्टि होती है तो घबराने की जरूरत नहीं है। इसकी तीन स्टेज होती है। पहली दो स्टेज में आसानी से इलाज किया जा सकता है। जबकि, तीसरी स्टेज में मरीज को भर्ती करने की जरूरत होती है। लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ. तुंगवीर सिंह आर्य का कहना है कि तीसरी स्टेज शॉक सिंड्रोम होती है, क्योंकि उसमें प्लेटलेट्स अचानक घट जाती हैं। हालांकि, इस स्थिति में भी मरीज को भर्ती कराकर आसानी से ठीक किया जा सकता है। ऐसे में जाहिर है कि डेंगू की पहचान के साथ सही समय पर इलाज शुरू होना कहीं ज्यादा जरूरी है।
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ये हैं डेंगू की तीन स्टेज
साधारण डेंगू :
इस स्टेज में मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है। मरीज के शरीर में जकड़न महसूस होती है और बीपी लो होने लगता है। ऐसे में डेंगू की पुष्टि होने या लक्षण दिखने पर एस्पिरिन का सेवन नहीं करना चाहिए। वजह यह कि इससे खून पतला होता है, जिससे ब्लीडिंग की संभावना बढ़ती है। इस दौरान तरल पदार्थों का सेवन करना शुरू कर देना चाहिए। साथ ही चिकित्सक के संपर्क में आ जाएं।

हैमरेजिक:
इस स्टेज को डीएचएफ भी कहते हैं। इसमें मरीजों को तेजी से बुखार आता है। कंपकंपी छूटती है। साथ ही शरीर में जगह-जगह चकत्ते पड़ने लगते हैं और ब्लड जाने लगता है। इस स्टेज में भी चिकित्सकों के संपर्क में रहकर घर पर आसानी से इलाज किया जा सकता है।

शॉक सिंड्रोम
इसे डेंगू की सबसे ज्यादा खतरनाक स्टेज मानते हैं। इसमें प्लेटलेट्स की संख्या में तेजी से गिरावट आती है। तेज बुखार के साथ बीपी भी तेजी से घटता है। इस हालत में मरीज को तत्काल भर्ती कर चिकित्सक की निगरानी में रखना पड़ता है।

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रिपोर्ट के साथ शर्त भारी
स्वास्थ्य विभाग डेंगू की पैथोलॉजी जांच मेडिकल कॉलेज में कराने की बात कह रहा है। लेकिन, वहां जांच की प्रक्रिया लंबी होने के कारण अब कई पैथोलॉजी मेडिकल कॉलेज में जांच नहीं करा रही है। वह सीधे रिपोर्ट दे रही है और नीचे मेडिकल कॉलेज में एलाइजा टेस्ट कराकर पुष्टि करने की भी शर्त को जोड़ रही है।
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