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‘डॉक्टर’ निकला गैंग का मास्टरमाइंड
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sat, 16 Jan 2016 02:26 AM IST
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खरखौदा में पशु व्यापारियों से 25.50 लाख की लूट और किठौर के अंशुल हत्याकांड को एक ही गैंग ने अंजाम दिया। पुलिस को इस गैंग के मास्टरमाइंड मेरठ निवासी पुलकित उर्फ गप्पी उर्फ ‘डॉक्टर’ की तलाश है।
शुक्रवार को एसएसपी धर्मेंद्र सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस में मोदीनगर मुठभेड़ में पकड़े बदमाश विकास को सामने किया। विकास के मुताबिक ‘डॉक्टर’ ही गैंग को टारगेट देता था। उसके कहने पर ही टटीरी निवासी प्रदीप ने पशु व्यापारियों से लूट की प्लानिंग की थी। प्रदीप से विकास की मुलाकात मेरठ जेल में चार साल पहले हुई थी। प्रदीप भी 10 दिन पहले ही तिहाड़ से छूटा है। जहां उसकी मुलाकात बदमाश अमित से हुई थी।
बृहस्पतिवार को जब पशु व्यापारियों को लूटकर तीनों गाजियाबाद आ रहे थे तो रास्ते में उन्हें नीली बत्ती लगी एंबेसडर मिली। जिस पर वह गन्ने के खेत में छिप गए। बकौल विकास, शूटआउट के उसे लग रहा था कि भागने की कोशिश की तो पुलिस मार डालेगी। ‘मैं मरना नहीं चाहता था, लिहाजा सरेंडर कर दिया’। उसने बताया कि सन 2006 में उसके भाई अमित की हत्यारे को मारकर वह जरायम में उतरा था। उधर, मौके से फरार चौथा बदमाश मुरादनगर निवासी अक्षय लूट में जेल जा चुका है।
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‘डॉक्टर’ को थी पल-पल की खबर
शूटआउट के दौरान भी बदमाश ‘डॉक्टर’ को पल-पल की जानकारी दे रहा था। कॉल डिटेल में इसका खुलासा हुआ है। ‘डॉक्टर’ पहले वाहन चोरी करता था। मेरठ पुलिस ने उसे जेल भेजा था। अब वह अपने गुर्गों से वारदात कराता है। ‘डॉक्टर’ ने देहात क्षेत्रों में रहने वाले कई कारोबारियों को टारगेट किया था। उसका एक करीबी जेल में बंद था। जिसकी पैरवी में वह जेल जाता था। जेल में ही उसकी प्रदीप से मुलाकात हुई थी। प्रदीप को जेल से बाहर निकलवाने में डॉक्टर ने आर्थिक मदद की थी।
गोली मारकर फैलाते आतंक
ये बदमाश लूट के दौरान कार के दो दरवाजों के बीच लगी एल्युमीनियम पर गोली चलाते थे। इससे कार सवार डरकर कैश से भरा बैग दे देता था। पशु व्यापारियों से लूट के अलावा अंशुल हत्याकांड में भी बदमाशों ने इसी तरह कार पर गोली मारी थी। पुलिस का दावा है कि ‘डॉक्टर’ ने मेरठ के देहात क्षेत्रों में रहने वाले कई कारोबारियों की रेकी करवाई है। जो जल्द निशाना बनते। वहीं, बदमाशों से बरामद कार भी चोरी या लूट की हो सकती है।
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शुक्रवार को एसएसपी धर्मेंद्र सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस में मोदीनगर मुठभेड़ में पकड़े बदमाश विकास को सामने किया। विकास के मुताबिक ‘डॉक्टर’ ही गैंग को टारगेट देता था। उसके कहने पर ही टटीरी निवासी प्रदीप ने पशु व्यापारियों से लूट की प्लानिंग की थी। प्रदीप से विकास की मुलाकात मेरठ जेल में चार साल पहले हुई थी। प्रदीप भी 10 दिन पहले ही तिहाड़ से छूटा है। जहां उसकी मुलाकात बदमाश अमित से हुई थी।
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बृहस्पतिवार को जब पशु व्यापारियों को लूटकर तीनों गाजियाबाद आ रहे थे तो रास्ते में उन्हें नीली बत्ती लगी एंबेसडर मिली। जिस पर वह गन्ने के खेत में छिप गए। बकौल विकास, शूटआउट के उसे लग रहा था कि भागने की कोशिश की तो पुलिस मार डालेगी। ‘मैं मरना नहीं चाहता था, लिहाजा सरेंडर कर दिया’। उसने बताया कि सन 2006 में उसके भाई अमित की हत्यारे को मारकर वह जरायम में उतरा था। उधर, मौके से फरार चौथा बदमाश मुरादनगर निवासी अक्षय लूट में जेल जा चुका है।
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‘डॉक्टर’ को थी पल-पल की खबर
शूटआउट के दौरान भी बदमाश ‘डॉक्टर’ को पल-पल की जानकारी दे रहा था। कॉल डिटेल में इसका खुलासा हुआ है। ‘डॉक्टर’ पहले वाहन चोरी करता था। मेरठ पुलिस ने उसे जेल भेजा था। अब वह अपने गुर्गों से वारदात कराता है। ‘डॉक्टर’ ने देहात क्षेत्रों में रहने वाले कई कारोबारियों को टारगेट किया था। उसका एक करीबी जेल में बंद था। जिसकी पैरवी में वह जेल जाता था। जेल में ही उसकी प्रदीप से मुलाकात हुई थी। प्रदीप को जेल से बाहर निकलवाने में डॉक्टर ने आर्थिक मदद की थी।
गोली मारकर फैलाते आतंक
ये बदमाश लूट के दौरान कार के दो दरवाजों के बीच लगी एल्युमीनियम पर गोली चलाते थे। इससे कार सवार डरकर कैश से भरा बैग दे देता था। पशु व्यापारियों से लूट के अलावा अंशुल हत्याकांड में भी बदमाशों ने इसी तरह कार पर गोली मारी थी। पुलिस का दावा है कि ‘डॉक्टर’ ने मेरठ के देहात क्षेत्रों में रहने वाले कई कारोबारियों की रेकी करवाई है। जो जल्द निशाना बनते। वहीं, बदमाशों से बरामद कार भी चोरी या लूट की हो सकती है।