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डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की राह में रोड़ा बन सकता है मुआवजा, किसानों में इसलिए है रोष
Fri, 18 Oct 2019 01:45 AM IST
मेरठ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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Published by: मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 18 Oct 2019 01:45 AM IST
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दौराला-सरधना मार्ग पर डेडिकेटेड फ्रेंट कॉरिडोर परियोजना के तहत चलता ओवर ब्रिज का निर्माण कार्य।
- फोटो : LAWARD
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के तहत दौराला-सरधना मार्ग पर बनाए जा रहे ओवरब्रिज का कार्य तेजी से चल रहा है। इस कॉरिडोर परियोजना को 2021 तक पूर्ण किया जाना है। इसके पूर्ण होने से दिल्ली, लुधियाना एवं कोलकाता का सफर सुविधाजनक होगा।
बताते चलें कि गाजियाबाद से गुजरने वाली लगभग 35 मालगाड़ी हैं। इनके चलते कोलकाता से दिल्ली एवं दिल्ली से लुधियाना आदि स्थानों के लिए जाने वाली ट्रेनों को आउटडोर पर खड़े होकर इंतजार करना पड़ता था। जिससे एक्सप्रेस से लेकर लोकल ट्रेनों का समय प्रभावित हो रहा है।
इस समस्या से निपटने के लिए रेलवे मंत्रालय ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के तहत मालगाड़ियों के लिए नया ट्रैक बनाने की योजना लागू की थी। इसको लेकर कई जिलों में मुआवजे की प्रक्रिया के लिए किसानों ने धरना-प्रदर्शन किया था। इस परियोजना को परवान चढ़ाने के लिए रेलवे तेजी से काम कर रहा है। सरधना-दौराला मार्ग पर ओवरब्रिज निर्माण जारी है।
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बताते चलें कि गाजियाबाद से गुजरने वाली लगभग 35 मालगाड़ी हैं। इनके चलते कोलकाता से दिल्ली एवं दिल्ली से लुधियाना आदि स्थानों के लिए जाने वाली ट्रेनों को आउटडोर पर खड़े होकर इंतजार करना पड़ता था। जिससे एक्सप्रेस से लेकर लोकल ट्रेनों का समय प्रभावित हो रहा है।
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इस समस्या से निपटने के लिए रेलवे मंत्रालय ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के तहत मालगाड़ियों के लिए नया ट्रैक बनाने की योजना लागू की थी। इसको लेकर कई जिलों में मुआवजे की प्रक्रिया के लिए किसानों ने धरना-प्रदर्शन किया था। इस परियोजना को परवान चढ़ाने के लिए रेलवे तेजी से काम कर रहा है। सरधना-दौराला मार्ग पर ओवरब्रिज निर्माण जारी है।
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मुआवजा प्रक्रिया बन सकती है रोड़ा
दौराला में बन रहे ओवरब्रिज एवं रेल लाइन को लेकर दौराला के किसानों की भूमि अधिग्रहण की जाएगी। इसके लिए किसानों को मिलने वाला मुआवजा तेजी से हो रहे कार्य में बाधा डाल सकता है। दरअसल पूर्व में किसानों ने धरना देकर एक जिला एक मुआवजा रखने की मांग की थी। एक जिले में ही मुआवजे की दो अलग-अलग प्रक्रिया से किसानों में रोष है।
मेरठ जिले के घाट पांचली में विभाग एक बीघा जमीन के चार गुणा मुआवजा 60 लाख दे रहा है, जबकि मटौर में 40 लाख दे रहा है। दौराला के किसानों को मुआवजा कम दिया जा रहा है। इन गांवों के साथ दौराला भी गन्ना उत्पादकता वाला क्षेत्र है, लेकिन यहां के किसानों को 11 लाख रुपये मुआवजा दिया जा रहा है। पूर्व में वर्ल्ड बैंक के सर्वे के दौरान उन परिवारों के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की बात कही थी, जिनकी भूमि अधिग्रहण की जा रही है।
किसानों का कहना है कि नौकरी की जगह साढ़े पांच लाख रुपये देकर पल्ला झाड़ा जा रहा है। 2021 तक कंपनी को लाइन का कार्य पूर्ण करके देना है। भूमि अधिग्रहण के साथ-साथ मुआवजा प्रक्रिया सही ढंग से चल रही है। किसानों को कोई समस्या नहीं आने दी जाएगी।-जेपी गोयल, प्रोजेक्ट मैनेजर डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना
एक ही जिले में गन्ना किसानों की जमीन का अलग अलग मुआवजा दिया जा रहा है। पूर्व में भी वह एक जिला एक मुआवजा दिए जाने की मांग को लेकर धरना दे चुके हैं। यदि उनकी मांग को अनदेखा किया गया तो दोबारा आंदोलन किया जाएगा।-नवाब सिंह अहलावत, भाकियू युवा जिलाध्यक्ष
दौराला में बन रहे ओवरब्रिज एवं रेल लाइन को लेकर दौराला के किसानों की भूमि अधिग्रहण की जाएगी। इसके लिए किसानों को मिलने वाला मुआवजा तेजी से हो रहे कार्य में बाधा डाल सकता है। दरअसल पूर्व में किसानों ने धरना देकर एक जिला एक मुआवजा रखने की मांग की थी। एक जिले में ही मुआवजे की दो अलग-अलग प्रक्रिया से किसानों में रोष है।
मेरठ जिले के घाट पांचली में विभाग एक बीघा जमीन के चार गुणा मुआवजा 60 लाख दे रहा है, जबकि मटौर में 40 लाख दे रहा है। दौराला के किसानों को मुआवजा कम दिया जा रहा है। इन गांवों के साथ दौराला भी गन्ना उत्पादकता वाला क्षेत्र है, लेकिन यहां के किसानों को 11 लाख रुपये मुआवजा दिया जा रहा है। पूर्व में वर्ल्ड बैंक के सर्वे के दौरान उन परिवारों के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की बात कही थी, जिनकी भूमि अधिग्रहण की जा रही है।
किसानों का कहना है कि नौकरी की जगह साढ़े पांच लाख रुपये देकर पल्ला झाड़ा जा रहा है। 2021 तक कंपनी को लाइन का कार्य पूर्ण करके देना है। भूमि अधिग्रहण के साथ-साथ मुआवजा प्रक्रिया सही ढंग से चल रही है। किसानों को कोई समस्या नहीं आने दी जाएगी।-जेपी गोयल, प्रोजेक्ट मैनेजर डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना
एक ही जिले में गन्ना किसानों की जमीन का अलग अलग मुआवजा दिया जा रहा है। पूर्व में भी वह एक जिला एक मुआवजा दिए जाने की मांग को लेकर धरना दे चुके हैं। यदि उनकी मांग को अनदेखा किया गया तो दोबारा आंदोलन किया जाएगा।-नवाब सिंह अहलावत, भाकियू युवा जिलाध्यक्ष