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एमबीबीएस की 50 सीटों पर संकट के बादल
Sun, 19 May 2019 03:47 AM IST
Gaurav sharma
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Gaurav sharma
Updated Sun, 19 May 2019 03:47 AM IST
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मेडिकल कॉलेज
- फोटो : अमर उजाला
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मेरठ। एमसीआई के मानकों पर खरे न उतरने के कारण मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 50 सीटों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन एमसीआई के सामने सुधार के सुबूत पेश कर उसे मनाने में जुटा है। इसके लिए खुद प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता समेत मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की टीम शुक्रवार को एमसीआई गए। एमसीआई ने इन्हें मंगलवार तक प्रमुख सचिव और महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा का हलफनामा देने के लिए कहा है। वहीं मेडिकल कॉलेज में जून से एडमिशन प्रक्रिया शुरू होने वाली है।
मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पहले 100 सीटें थीं। इन्हें बढ़ाकर साल 2013 में 150 कर दिया गया था। एमसीआई की टीमें तभी से मेडिकल कॉलेज को मानकों पर परख रही है, लेकिन हर बार बढ़ाई गई सीटों को लेकर खामियां रह जाती हैं। दरअसल, एमसीआई की टीम बढ़ी हुई सीटों पर एडमिशन की मानकों पर जांच करती है। जो सुझाव देती है, फिर निरीक्षण कर उनकी थाह लेती है। यदि फिर भी सुधार नहीं होता है तो बढ़ाई गई सीटों को कम करने पर निर्णय ले सकती है। हर बार सुधार का हलफनामा देने के कारण यह सीटें कम नहीं की जाती हैं। इसके बाद भी मेरठ कॉलेज प्रशासन सुधार नहीं कर पा रहा है। अब हलफनामे में यह लिखा जाएगा कि जल्द ही मानकों को पूरा कर लिया जाएगा, लिहाजा इन्हें 150 सीटों पर ही एडमिशन करने की इजाजत दे दी जाए।
चार साल से एमसीआई दे रही सुधार की हिदायत
एमसीआई चार साल से सुधार की हिदायत दे रही है। हाल में एमसीआई की टीम ने यहां का निरीक्षण किया था। इसके पहले 2016 और 2018 में भी तीन बार एमसीआई की टीमें निरीक्षण कर सुधार करने को कह चुकी हैं।
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कर चुके हैं 50 सीटें बढ़ाने की डिमांड
एक तरफ, मेडिकल कॉलेज 150 सीटों पर भी मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है। दूसरी तरफ, मेडिकल कॉलेज की तरफ से एमसीआई को 150 से 200 सीटें किए जाने की भी मांग की जा चुकी है। इस पर एमसीआई की तरफ से कहा जा चुका है कि पहले 150 के तो मानकों पर खरे उतर जाओ, फिर 200 की बात करना।
यह हैं खामियां
- मानकों से 30 स्टाफ नर्स कम हैं।
- 50 से ज्यादा फैकल्टी की कमी है।
- बेडों पर मरीजों की संख्या 70 प्रतिशत होनी चाहिए, लेकिन 60 फीसदी है।
- बड़ी लाइब्रेरी नहीं है।
काफी सुधार किया गया
मेडिकल में काफी सुधार किया गया है। एमसीआई के मानकों पर खरा उतरने की कोशिश जारी है। दिल्ली में मैं एमसीआई दफ्तर गया था और सुधार के बारे में बताया और सुबूत भी पेश किए, ताकि एमबीबीएस की 150 सीटें जारी रहें। -डॉ. आरसी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पहले 100 सीटें थीं। इन्हें बढ़ाकर साल 2013 में 150 कर दिया गया था। एमसीआई की टीमें तभी से मेडिकल कॉलेज को मानकों पर परख रही है, लेकिन हर बार बढ़ाई गई सीटों को लेकर खामियां रह जाती हैं। दरअसल, एमसीआई की टीम बढ़ी हुई सीटों पर एडमिशन की मानकों पर जांच करती है। जो सुझाव देती है, फिर निरीक्षण कर उनकी थाह लेती है। यदि फिर भी सुधार नहीं होता है तो बढ़ाई गई सीटों को कम करने पर निर्णय ले सकती है। हर बार सुधार का हलफनामा देने के कारण यह सीटें कम नहीं की जाती हैं। इसके बाद भी मेरठ कॉलेज प्रशासन सुधार नहीं कर पा रहा है। अब हलफनामे में यह लिखा जाएगा कि जल्द ही मानकों को पूरा कर लिया जाएगा, लिहाजा इन्हें 150 सीटों पर ही एडमिशन करने की इजाजत दे दी जाए।
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चार साल से एमसीआई दे रही सुधार की हिदायत
एमसीआई चार साल से सुधार की हिदायत दे रही है। हाल में एमसीआई की टीम ने यहां का निरीक्षण किया था। इसके पहले 2016 और 2018 में भी तीन बार एमसीआई की टीमें निरीक्षण कर सुधार करने को कह चुकी हैं।
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कर चुके हैं 50 सीटें बढ़ाने की डिमांड
एक तरफ, मेडिकल कॉलेज 150 सीटों पर भी मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है। दूसरी तरफ, मेडिकल कॉलेज की तरफ से एमसीआई को 150 से 200 सीटें किए जाने की भी मांग की जा चुकी है। इस पर एमसीआई की तरफ से कहा जा चुका है कि पहले 150 के तो मानकों पर खरे उतर जाओ, फिर 200 की बात करना।
यह हैं खामियां
- मानकों से 30 स्टाफ नर्स कम हैं।
- 50 से ज्यादा फैकल्टी की कमी है।
- बेडों पर मरीजों की संख्या 70 प्रतिशत होनी चाहिए, लेकिन 60 फीसदी है।
- बड़ी लाइब्रेरी नहीं है।
काफी सुधार किया गया
मेडिकल में काफी सुधार किया गया है। एमसीआई के मानकों पर खरा उतरने की कोशिश जारी है। दिल्ली में मैं एमसीआई दफ्तर गया था और सुधार के बारे में बताया और सुबूत भी पेश किए, ताकि एमबीबीएस की 150 सीटें जारी रहें। -डॉ. आरसी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज