{"_id":"573a33e94f1c1bf815ac8003","slug":"chini-mehengi","type":"story","status":"publish","title_hn":"चीनी महंगी, फिर भी पेमेंट नहीं कर रहीं मिलें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चीनी महंगी, फिर भी पेमेंट नहीं कर रहीं मिलें
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 17 May 2016 02:44 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चीनी के दाम बढ़ने के बाद भी शुगर इंडस्ट्री किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं कर रही है। मेरठ मंडल की शुगर मिलों पर पेराई सत्र खत्म होने के बाद भी एसएपी की दर से 1580 करोड़ रुपये बकाया है। पेमेंट नहीं मिलने से किसान बेहाल हैं। इससे उनके जरूरी काम भी अटक गए हैं।
चीनी के दाम कम होने पर घाटे का रोना रोते हुए शुगर इंडस्ट्री ने लगातार तीसरे पेराई सत्र में भी गन्ना एसएपी नहीं बढ़ने दिया था। 285 रुपये कुंतल गन्ना लागत आने के बाद प्रदेश सरकार ने गन्ना एसएपी 280 रुपये प्रति कुंतल ही रखी थी।
साथ ही किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान के नाम पर शुगर इंडस्ट्री को चीनी प्रवेश कर, गन्ना क्रय कर, शीरा और समिति कमीशन आदि मदों में भारी छूट देते हुए करीब 2 हजार करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाया था। इसके अलावा एसएपी की भी दो किस्तों में भुगतान करने की रियायत दी थी। शर्त के अनुसार शुगर मिलों को गन्ना आपूर्ति के 14 दिन के अंदर 230 रुपये प्रति कुंतल की दर से भुगतान करना था।
विज्ञापन
इसके बाद पेराई सत्र समाप्ति के तीन महीने बाद बाकी बचे 50 रुपये प्रति कुंतल की दर से दूसरी किस्त का संपूर्ण भुगतान करना था। पेराई सत्र खत्म हुए करीब दो महीने हो चुके हैं, लेकिन शुगर इंडस्ट्री ने पहली किस्त की शर्त का भी पालन नहीं किया है।
मंडल की शुगर मिलों पर एसएपी की दर से 1580 करोड़ रुपये बकाया है। 230 रुपये की पहली किस्त के हिसाब से देय गन्ना मूल्य के सापेक्ष 50 फीसदी ही भुगतान किया है।
40 रुपये प्रति किलो है चीनी पेराई सत्र शुरू होने पर चीनी के दाम 25 रुपये प्रति किलो चल रहे थे। वर्तमान में चीनी के दाम 40 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। चीनी मिलों की थोक में भी 3600 रुपये प्रति कुंतल तक चीनी बिक रही है।
भुगतान में फिसड्डी मिलें (एसएपी की दर से)
मिल भुगतान प्रतिशत में
मवाना 13
मलकपुर 03
मोदीनगर 0.36
नंगलामल 25
किनौनी 36
सिंभावली 26
बृजनाथपुर 16
भुगतान में अव्वल मिलें (एसएपी की दर से)
सकौती 75
दौराला 75
अनामिका 81
साबितगढ़ 82
बागपत 63
रमाला 62
अनूपशहर 68
मोहिउद्दीनपुर 82
विज्ञापन
चीनी के दाम कम होने पर घाटे का रोना रोते हुए शुगर इंडस्ट्री ने लगातार तीसरे पेराई सत्र में भी गन्ना एसएपी नहीं बढ़ने दिया था। 285 रुपये कुंतल गन्ना लागत आने के बाद प्रदेश सरकार ने गन्ना एसएपी 280 रुपये प्रति कुंतल ही रखी थी।
विज्ञापन
साथ ही किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान के नाम पर शुगर इंडस्ट्री को चीनी प्रवेश कर, गन्ना क्रय कर, शीरा और समिति कमीशन आदि मदों में भारी छूट देते हुए करीब 2 हजार करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाया था। इसके अलावा एसएपी की भी दो किस्तों में भुगतान करने की रियायत दी थी। शर्त के अनुसार शुगर मिलों को गन्ना आपूर्ति के 14 दिन के अंदर 230 रुपये प्रति कुंतल की दर से भुगतान करना था।
विज्ञापन
इसके बाद पेराई सत्र समाप्ति के तीन महीने बाद बाकी बचे 50 रुपये प्रति कुंतल की दर से दूसरी किस्त का संपूर्ण भुगतान करना था। पेराई सत्र खत्म हुए करीब दो महीने हो चुके हैं, लेकिन शुगर इंडस्ट्री ने पहली किस्त की शर्त का भी पालन नहीं किया है।
मंडल की शुगर मिलों पर एसएपी की दर से 1580 करोड़ रुपये बकाया है। 230 रुपये की पहली किस्त के हिसाब से देय गन्ना मूल्य के सापेक्ष 50 फीसदी ही भुगतान किया है।
40 रुपये प्रति किलो है चीनी पेराई सत्र शुरू होने पर चीनी के दाम 25 रुपये प्रति किलो चल रहे थे। वर्तमान में चीनी के दाम 40 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। चीनी मिलों की थोक में भी 3600 रुपये प्रति कुंतल तक चीनी बिक रही है।
भुगतान में फिसड्डी मिलें (एसएपी की दर से)
मिल भुगतान प्रतिशत में
मवाना 13
मलकपुर 03
मोदीनगर 0.36
नंगलामल 25
किनौनी 36
सिंभावली 26
बृजनाथपुर 16
भुगतान में अव्वल मिलें (एसएपी की दर से)
सकौती 75
दौराला 75
अनामिका 81
साबितगढ़ 82
बागपत 63
रमाला 62
अनूपशहर 68
मोहिउद्दीनपुर 82