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विवि के असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति निरस्त
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Mon, 11 Jan 2016 02:11 AM IST
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कुलाधिपति राम नाईक ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय कैंपस के एक असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति निरस्त कर दी है। नियुक्ति फर्जी ढंग से हुई थी। 17 नंबर ऐसे ही दे दिए गए थे। मामले में आईक्यूएसी और सेलेक्शन कमेटी फंस रही है। कुलाधिपति ने कहा है कि चयन समिति ने नियुक्ति में मनमर्जी चलाई है। शिकायतकर्ता का कहना है आईक्यूएसी और चयन समिति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
पिछले साल विवि में शिक्षकों के खाली पद पर नियुक्ति हुई थी। समाजशास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर अनिल कुमार की नियुक्ति की गई थी। डॉ. प्रदीप कुमार की ओर से इस नियुक्ति पर सवाल खड़ा करते हुए कुलाधिपति से लिखित शिकायत की गई थी। आरोप है कि जिस वक्त अनिल कुमार ने आवेदन किया तब तक उनकी पीएचडी सबमिट नहीं हुई थी।
बावजूद इसके उन्हें आईक्यूएसी (इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल) ने पीएचडी के सात नंबर दे दिए। इसके अलावा टीचिंग एक्सपीरियंस, माइनर अथवा मेजर प्रोजेक्ट हैंडलिंग एवं प्रोफेशनल डेवलेपमेंट रिलेटिड एक्टिविटीज के लिए 10 नंबर और दिए गए। जबकि इस बाबत आवेदन पत्र के साथ कोई अभिलेख जमा नहीं किया गया। नियुक्ति पत्र डॉ. अनिल कुमार के नाम से जारी किया गया।
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कुलाधिपति की ओर से जारी आदेश में कहा गया है बिना संबंधित अभिलेखों को प्राप्त एवं सत्यापित किए हुए चयन समिति द्वारा अपने विशेष अधिकार के नाम पर 10 अतिरिक्त नंबर देना मनमानेपन का द्योतक है। कुलाधिपति ने आदेश जारी किया है कि डॉ. प्रदीप कुमार के प्रत्यावेदन को स्वीकार करते हुए विवि के समाजशास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर अनिल कुमार की नियुक्ति दिनांक 21 फरवरी 2015 को निरस्त किया जाता है।
नियुक्ति प्रक्रिया पर खड़ा हुआ सवाल
डॉ. प्रदीप कुमार की शिकायत को विवि के अधिकारियों ने तवज्जो नहीं दी। नियुक्ति होने के तुरंत बाद तत्कालीन कुलपति विक्रम चंद्र गोयल से डॉ. प्रदीप ने शिकायत की थी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। हालांकि विवि के अधिकारी मान गए थे कि गड़बड़ी हुई है। लेकिन सुनवाई नहीं की। कुलाधिपति से शिकायत होने के बाद कार्रवाई हुई। कई अन्य पदों की नियुक्ति पर भी सवाल खड़े हुए थे। यह नियुक्ति निरस्त होने के बाद प्रक्रिया सवालों के घेरे में है।
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पिछले साल विवि में शिक्षकों के खाली पद पर नियुक्ति हुई थी। समाजशास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर अनिल कुमार की नियुक्ति की गई थी। डॉ. प्रदीप कुमार की ओर से इस नियुक्ति पर सवाल खड़ा करते हुए कुलाधिपति से लिखित शिकायत की गई थी। आरोप है कि जिस वक्त अनिल कुमार ने आवेदन किया तब तक उनकी पीएचडी सबमिट नहीं हुई थी।
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बावजूद इसके उन्हें आईक्यूएसी (इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल) ने पीएचडी के सात नंबर दे दिए। इसके अलावा टीचिंग एक्सपीरियंस, माइनर अथवा मेजर प्रोजेक्ट हैंडलिंग एवं प्रोफेशनल डेवलेपमेंट रिलेटिड एक्टिविटीज के लिए 10 नंबर और दिए गए। जबकि इस बाबत आवेदन पत्र के साथ कोई अभिलेख जमा नहीं किया गया। नियुक्ति पत्र डॉ. अनिल कुमार के नाम से जारी किया गया।
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कुलाधिपति की ओर से जारी आदेश में कहा गया है बिना संबंधित अभिलेखों को प्राप्त एवं सत्यापित किए हुए चयन समिति द्वारा अपने विशेष अधिकार के नाम पर 10 अतिरिक्त नंबर देना मनमानेपन का द्योतक है। कुलाधिपति ने आदेश जारी किया है कि डॉ. प्रदीप कुमार के प्रत्यावेदन को स्वीकार करते हुए विवि के समाजशास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर अनिल कुमार की नियुक्ति दिनांक 21 फरवरी 2015 को निरस्त किया जाता है।
नियुक्ति प्रक्रिया पर खड़ा हुआ सवाल
डॉ. प्रदीप कुमार की शिकायत को विवि के अधिकारियों ने तवज्जो नहीं दी। नियुक्ति होने के तुरंत बाद तत्कालीन कुलपति विक्रम चंद्र गोयल से डॉ. प्रदीप ने शिकायत की थी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। हालांकि विवि के अधिकारी मान गए थे कि गड़बड़ी हुई है। लेकिन सुनवाई नहीं की। कुलाधिपति से शिकायत होने के बाद कार्रवाई हुई। कई अन्य पदों की नियुक्ति पर भी सवाल खड़े हुए थे। यह नियुक्ति निरस्त होने के बाद प्रक्रिया सवालों के घेरे में है।