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सीसीएसयू कराएगी सीनेट का चुनाव
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sat, 09 Jan 2016 01:42 AM IST
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चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय करीब 14 साल बाद सीनेट का चुनाव कराने जा रहा है। आखिरी बार सत्र 2001-02 में चुनाव हुआ था। उसके बाद से चुनाव की मांग कई बार हुई, लेकिन चुनाव नहीं हुआ। कुलाधिपति की ओर से कई बार विवि को पत्र भेजे गए, लेकिन वह ठंडे बस्ते में पड़े रहे। शनिवार को जौनपुर विश्वविद्यालय में होने जा रहे कुलपति सम्मेलन का यह भी एक अहम बिंदु होगा। विवि चुनाव कराने का मन बना चुका है। कुलपति की ओर से सम्मेलन में इस पर जवाब दिया जाएगा।
सीनेट विवि की वैधानिक बॉडी है। मेरठ और सहारनपुर मंडल से चुनाव के जरिए सीनेट के 15 सदस्य चुने जाते हैं। इनमें फिर चुनाव होता है और चार सदस्य कार्य परिषद के सदस्य बनते हैं। सीनेट की अपनी सभा है। जिसमें चुने गए मेंबर के अलावा चार राजनीतिक मेंबर और विवि के विभागाध्यक्ष होते हैं। कुलाधिपतियों की ओर से अनेकों बार विवि को सीनेट का चुनाव कराने के पत्र भेजे जाते रहे हैं, लेकिन उन पर अमल नहीं हुआ।
कुलपतियों ने चुनाव कराने की जहमत नहीं उठाई। विवि के महत्वपूर्ण काम सीनेट के माध्यम से गुजरेंगे। कई विशेष अधिकार सीनेट के पास हैं। इनका इस्तेमाल होगा तो विवि की परेशानी बढ़ सकती है, यह समझते हुए कुलपतियों ने सीनेट को ठंडे बस्ते में रखा। अब कुलाधिपति ने इस पर प्रदेश के विश्वविद्यालयों से जवाब तलब किया है तो चुनाव होने की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। शनिवार को जौनपुर विवि में कुलपतियों का सम्मेलन हो रहा है, जिसकी अध्यक्षता कुलाधिपति करेंगे। सम्मेलन के एजेंडे में सीनेट का चुनाव भी है। इस पर रिपोर्ट मांगी है। विवि की कुलपति की ओर से इस पर चुनाव कराने की सहमति दी जाएगी। विवि सूत्रों के मुताबिक जल्द ही चुनाव की घोषणा की जाएगी।
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ग्रेजुएट करते हैं वोट
सीनेट का चुनाव लड़ने और वोट डालने के लिए ग्रेजुएट होना जरूरी है। पहले ग्रेजुएट की वोट तैयार कराई जाएंगी। मेरठ और सहारनपुर मंडल के कॉलेजों में वोट तैयार कराई जाएंगी। आखिर बार जब चुनाव हुआ था तो वोट करीब 6500 थी। सत्यापन के बाद सख्ती हुई तो वोट 1000 तक सिमट गईं। पहले बैलेट पेपर घर भेजकर चुनाव होता था, जिसमें भारी फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद यह व्यवस्था बंद कर दी गई। विवि को चुनाव के लिए जिलों में सेंटर बनाने पड़ेंगे।
वैधानिक बॉडी है सीनेट
सीनेट में करीब 75 सदस्य होंगे। चुने गए 15 सदस्यों के अलावा कॉलेजों के सीनियर प्रिंसिपल, विवि कैंपस के विभागाध्यक्ष और प्रोफेसर के अलावा चार जनप्रतिनिधियों को शासन नामित करेगा। सीनेट से चार कार्य परिषद के मेंबर चुने जाएंगे। इस चुनाव में सदस्यों के अलावा विवि विभागाध्यक्ष वोटिंग करेंगे। सीनेट एकेडमिक काउंसिल और कार्य परिषद की तरह ही वैधानिक बॉडी है।
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सीनेट विवि की वैधानिक बॉडी है। मेरठ और सहारनपुर मंडल से चुनाव के जरिए सीनेट के 15 सदस्य चुने जाते हैं। इनमें फिर चुनाव होता है और चार सदस्य कार्य परिषद के सदस्य बनते हैं। सीनेट की अपनी सभा है। जिसमें चुने गए मेंबर के अलावा चार राजनीतिक मेंबर और विवि के विभागाध्यक्ष होते हैं। कुलाधिपतियों की ओर से अनेकों बार विवि को सीनेट का चुनाव कराने के पत्र भेजे जाते रहे हैं, लेकिन उन पर अमल नहीं हुआ।
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कुलपतियों ने चुनाव कराने की जहमत नहीं उठाई। विवि के महत्वपूर्ण काम सीनेट के माध्यम से गुजरेंगे। कई विशेष अधिकार सीनेट के पास हैं। इनका इस्तेमाल होगा तो विवि की परेशानी बढ़ सकती है, यह समझते हुए कुलपतियों ने सीनेट को ठंडे बस्ते में रखा। अब कुलाधिपति ने इस पर प्रदेश के विश्वविद्यालयों से जवाब तलब किया है तो चुनाव होने की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। शनिवार को जौनपुर विवि में कुलपतियों का सम्मेलन हो रहा है, जिसकी अध्यक्षता कुलाधिपति करेंगे। सम्मेलन के एजेंडे में सीनेट का चुनाव भी है। इस पर रिपोर्ट मांगी है। विवि की कुलपति की ओर से इस पर चुनाव कराने की सहमति दी जाएगी। विवि सूत्रों के मुताबिक जल्द ही चुनाव की घोषणा की जाएगी।
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ग्रेजुएट करते हैं वोट
सीनेट का चुनाव लड़ने और वोट डालने के लिए ग्रेजुएट होना जरूरी है। पहले ग्रेजुएट की वोट तैयार कराई जाएंगी। मेरठ और सहारनपुर मंडल के कॉलेजों में वोट तैयार कराई जाएंगी। आखिर बार जब चुनाव हुआ था तो वोट करीब 6500 थी। सत्यापन के बाद सख्ती हुई तो वोट 1000 तक सिमट गईं। पहले बैलेट पेपर घर भेजकर चुनाव होता था, जिसमें भारी फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद यह व्यवस्था बंद कर दी गई। विवि को चुनाव के लिए जिलों में सेंटर बनाने पड़ेंगे।
वैधानिक बॉडी है सीनेट
सीनेट में करीब 75 सदस्य होंगे। चुने गए 15 सदस्यों के अलावा कॉलेजों के सीनियर प्रिंसिपल, विवि कैंपस के विभागाध्यक्ष और प्रोफेसर के अलावा चार जनप्रतिनिधियों को शासन नामित करेगा। सीनेट से चार कार्य परिषद के मेंबर चुने जाएंगे। इस चुनाव में सदस्यों के अलावा विवि विभागाध्यक्ष वोटिंग करेंगे। सीनेट एकेडमिक काउंसिल और कार्य परिषद की तरह ही वैधानिक बॉडी है।