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किताबों के समंदर में उतरी सीसीएसयू की लाइब्रेरी
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Tue, 23 Aug 2016 02:52 AM IST
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ccsu book
- फोटो : फाइल फोटो
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किताबों के समुद्र में सीसीएसयू की किश्ती उतर गई है। विश्वविद्यालय के छात्र अब ज्ञान की गंगा में गहरी डुबकी लगा सकेंगे। दुनिया में एक हजार साल में 300 भाषाओं में विभिन्न विषयों पर प्रकाशित किताबों को डिजिटल रूप में पढ़ने और प्रिंट आउट लेने की सुविधा विवि ने अपने छात्रों को मुहैया करा दी है। सोमवार को कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने वर्ल्ड ई बुक लाइब्रेरी का उद्घाटन किया। रिसर्च के क्षेत्र में यह एक बड़ा योगदान है। कैंपस और कॉलेज के छात्र इसका फायदा उठा सकेंगे।
वर्ल्ड ई बुक लाइब्रेरी के तहत छात्र-छात्राएं 30 लाख किताबें, एक हजार ई जर्नल्स और तीन करोड़ शोधपत्र ऑनलाइन पढ़ सकेंगे। यह पीडीएफ फार्म में होंगे। कंटेंट का प्रिंटआउट भी लिया जा सकेगा। राजा महेंद्र प्रताप लाइब्रेरी के डिप्टी लाइब्रेरियन डॉ. जमाल अहमद सिद्दीकी के मुताबिक प्रदेश की पहली लाइब्रेरी है जो वर्ल्ड ई बुक से जुड़ी है। वर्ल्ड पब्लिक लाइब्रेरी एसोसिएशन यह सुविधा उपलब्ध करा रही है। रिसर्च में छात्र इसका फायदा उठा सकेंगे।
डिजिटल फार्म में कंटेंट देख सकेंगे। इस मौके पर नेशनल प्रोग्राम ऑन टेक्नोलॉजी एनहेंस लर्निंग का भी उद्घाटन किया गया। इसमें ऑनलाइन कोर्स कराए जाएंगे। ऑनलाइन कोर्स का स्टडी मैटीरियल लाइब्रेरी डिजिटल फार्म में उपलब्ध कराएगा। इस दौरान वित्त अधिकारी अनिल अग्रवाल, डिप्टी रजिस्ट्रार नारायण प्रसाद, प्रो. हरे कृष्णा, प्रो. अर्चना शर्मा, डॉ. भूपेंद्र सिंह, डॉ. असलम जमशेदपुरी, डॉ. प्रदीप चौधरी, डॉ. एसएस गौरव मौजूद रहे।
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ऐसे होगा इस्तेमाल
वर्ल्ड ई बुक लाइब्रेरी से कनेक्ट होने के लिए विवि की वेबसाइट के होम पेज पर जाना होगा। वहां लाइब्रेरी के लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद डिजिटल लाइब्रेरी लिंक पर क्लिक करें। राइट साइड में सबसे ऊपर वर्ल्ड ई बुक का लिंक है। उसे क्लिक करें। किताबों को विषयवार देख सकते हैं। यहां भी कई ऑप्शन दिए हैं। अहम बात यह है कि यह सुविधा केवल विवि की लाइब्रेरी और विभागों के कंप्यूटर पर उपलब्ध है। मोबाइल या विवि के बाहर नहीं है। यह लिंक पेड है। विवि इसके लिए एक साल में साढ़े तीन लाख रुपये खर्च करेगा।
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वर्ल्ड ई बुक लाइब्रेरी के तहत छात्र-छात्राएं 30 लाख किताबें, एक हजार ई जर्नल्स और तीन करोड़ शोधपत्र ऑनलाइन पढ़ सकेंगे। यह पीडीएफ फार्म में होंगे। कंटेंट का प्रिंटआउट भी लिया जा सकेगा। राजा महेंद्र प्रताप लाइब्रेरी के डिप्टी लाइब्रेरियन डॉ. जमाल अहमद सिद्दीकी के मुताबिक प्रदेश की पहली लाइब्रेरी है जो वर्ल्ड ई बुक से जुड़ी है। वर्ल्ड पब्लिक लाइब्रेरी एसोसिएशन यह सुविधा उपलब्ध करा रही है। रिसर्च में छात्र इसका फायदा उठा सकेंगे।
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डिजिटल फार्म में कंटेंट देख सकेंगे। इस मौके पर नेशनल प्रोग्राम ऑन टेक्नोलॉजी एनहेंस लर्निंग का भी उद्घाटन किया गया। इसमें ऑनलाइन कोर्स कराए जाएंगे। ऑनलाइन कोर्स का स्टडी मैटीरियल लाइब्रेरी डिजिटल फार्म में उपलब्ध कराएगा। इस दौरान वित्त अधिकारी अनिल अग्रवाल, डिप्टी रजिस्ट्रार नारायण प्रसाद, प्रो. हरे कृष्णा, प्रो. अर्चना शर्मा, डॉ. भूपेंद्र सिंह, डॉ. असलम जमशेदपुरी, डॉ. प्रदीप चौधरी, डॉ. एसएस गौरव मौजूद रहे।
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ऐसे होगा इस्तेमाल
वर्ल्ड ई बुक लाइब्रेरी से कनेक्ट होने के लिए विवि की वेबसाइट के होम पेज पर जाना होगा। वहां लाइब्रेरी के लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद डिजिटल लाइब्रेरी लिंक पर क्लिक करें। राइट साइड में सबसे ऊपर वर्ल्ड ई बुक का लिंक है। उसे क्लिक करें। किताबों को विषयवार देख सकते हैं। यहां भी कई ऑप्शन दिए हैं। अहम बात यह है कि यह सुविधा केवल विवि की लाइब्रेरी और विभागों के कंप्यूटर पर उपलब्ध है। मोबाइल या विवि के बाहर नहीं है। यह लिंक पेड है। विवि इसके लिए एक साल में साढ़े तीन लाख रुपये खर्च करेगा।