CCS यूनिवर्सिटी: कविराज ने मुंह खोला तो उड़े अफसरों के होश, इतने लाख में हुई थी प्रथम डील
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कॉपियां बदलवाकर एमबीबीएस की परीक्षा पास कराने वाले कविराज ने अपना मुहं खोला तो अधिकारियों के होश उड़ गए। जानिए कितने लाख में हुई थी प्रथम डील...
मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले का है। यहां पूछताछ में कविराज ने बताया कि वर्ष 2014 में पहली डील दो लाख में हुई थी। जिसमें सभी के हिस्से में 50-50 हजार रुपये आए थे। पोल न खुलने और काम आसानी से होने के बाद एमबीबीएस के साथ एलएलबी, स्नातक व परास्नातक की उत्तर पुस्तिकाएं बदली जाने लगीं। जैसा सब्जेक्ट, वैसा ही पैसा मिलता था।
कोड वर्ड में बातें
पुलिस के मुताबिक उत्तर पुस्तिकाएं बदलने की जानकारी यूनिवर्सिटी के कई कर्मचारियों को लग चुकी थी। लेकिन कर्मचारी पवन ने सबको मैनेज किया हुआ था। जो बोलता था, उसे पैसा दे दिया जाता था। कर्मचारी और कविराज कोड वर्ड में बातें करते थे।
कर्मचारी पर गाज, अधिकारियों पर खामोशी
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने भंडाफोड़ होने पर तीनों कर्मचारियों पर कार्रवाई की। लेकिन अफसरों को लेकर मौन साध लिया है। चर्चा है कि यूनिवर्सिटी के एक अधिकारी की साठगांठ से यह धंधा चल रहा था। अधिकारी के पास भी हर उत्तर पुस्तिका बदलने में पैसा जाता था। मामले की जांच गंभीरता से होगी तो इससे भी बड़ा राजफाश होगा।
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...और कर्मचारी जुड़ते गए
एसटीएफ की जांच में यूनिवर्सिटी के दो कर्मचारी चंद्रप्रकाश और श्लेखचंद का नाम मुकदमे में देर रात शामिल कर लिया गया। पुलिस का कहना है कि यूनिवर्सिटी की जांच में कर्मचारी के नाम आते थे तो उनको हटाया जाता था। दूसरे कर्मचारी को उत्तर पुस्तिका अनुभाग का इंचार्ज बनाया जाता था। लेकिन गिरोह नए इंचार्ज से भी सेटिंग कर उत्तर पुस्तिकाएं बदलवाने का सिलसिला जारी रखता था। आरोपी कर्मचारी पवन को कुछ दिन पहले उत्तर पुस्तिका अनुभाग से हटाया था। जिसकी जगह श्लेखचंद को प्रभारी बनाया था। पवन ने श्लेखचंद से इस गिरोह की बातचीत कराई थी।
गंभीरता से होगी जांच
एसपी एसटीएफ का कहना कि जिन लोगों ने उत्तर पुस्तिकाएं बदलवाकर एमबीबीएस की डिग्री हासिल की है, उसकी भी गंभीरता से जांच होगी। फर्जी डॉक्टर लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकते है। पुलिस इसकी रिपोर्ट शासन को भी भेजेगी, ताकि फर्जी डॉक्टरों की पोल खोली जाए। इसके अलावा एलएलबी समेत अन्य उत्तर पुस्तिकाओं की जांच होगी।
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