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ब्लॉक प्रमुखों ने फूंका अधिकारों के लिए बिगुल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jun 2016 02:02 AM IST
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ब्लॉक प्रमुख
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश ब्लॉक प्रमुख संघ के बैनर तले बृहस्पतिवार को प्रदेश के तीस जिलों के 100 से अधिक प्रमुखों का सम्मेलन हुआ। जिसमें प्रमुखों के अधिकारों, वित्तीय सहायता धनराशि और मानदेय बढ़ाने समेत कई बिंदुओं पर चर्चा की गई। दौराला के ब्लॉक प्रमुख सचिन देव अहलावत को सर्वसम्मति से संघ का संयोजक बनाया गया। अधिकारों को पाने का बिगुल फूंकते हुए दिल्ली और लखनऊ में अपनी आवाज उठाने का निर्णय लिया गया।
मोदीपुरम के नारायण फार्म हाउस में आयोजित सम्मेलन की अध्यक्षता बरेली ब्लॉक प्रमुख जगमोहन सिंह यादव ने की। कहा कि चतुर्थ राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के आधार पर ग्राम पंचायत क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत के मध्य तृतीय धनराशि का अनुपात 50:10:20 कर दिया गया। जो कि पहले 60:20:20 था। प्रमुखों के अधिकार बढ़ाने में केंद्र और प्रदेश सरकार आगे आए।
बैठक का संचालन करते हुए पूर्व प्रमुख राहुल देव ने कहा कि समस्याओं का निराकरण ब्लॉक प्रमुखों एकजुट होकर हकों की लड़ाई लड़ने पर ही होगा। इसके लिए दिल्ली और लखनऊ तक आवाज बुलंद करनी होगी। तय हुआ कि संघ के संयोजक सचिन अहलावत के नेतृत्व में यह लड़ाई लड़ी जाएगी। सचिन अहलावत ने कहा कि प्रमुखों की सभी समस्याओं का निराकरण कराने के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री एवं यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलेंगे।
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सम्मेलन में मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, बागपत, रामपुर, मुरादाबाद, संभल, बदायूं, बरेली, नोएडा, गाजियाबाद, पीलीभीत सहित प्रदेश के तीस जिलों के ब्लॉक प्रमुखों ने शिरकत की। इस दौरान प्रमुखों में सुभाष गुर्जर, नितिन कसाना, अनिल, हरेंद्र, योगेंद्र, अमित प्रमुख, अनीस, इमरान मलिक, गौरव यादव के अलावा गौरव ठाकुर, सतीश यादव, प्रवीन यादव, पदमेंद्र सिंह, सुबोध त्यागी, रविंद्र अहलावत, राहुल खरे, गौरव प्रधान आदि मौजूद रहे।
पूर्व प्रमुख बने संरक्षक
संघ को मजबूती देने के लिए पूर्व प्रमुख विमल शर्मा, पूर्व प्रमुख सरजीत सिंह, पूर्व प्रमुख राहुल देव को संघ संरक्षक बनाया गया। सभी प्रमुखों से एकजुट होकर इस लड़ाई को लड़ने का आह्वान किया गया।
पांच प्रमुख मांग
- 2006 में प्रमुखों को क्षेत्र के लिए शासन से सौ हैंडपंप मिलते थे, जो बंद हो गए, इसे चालू कराएं
- पंचायती राज व्यवस्था विभिन्न विभागों के मध्य स्तर पर कार्यरत कर्मी व कार्यों का विवरण व नियंत्रण अनुसरण कर दिया गया। व्यावहारिक तौर पर उसका पालन नहीं हो रहा
- पूर्व में क्षेत्र पंचायत स्तर पर कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मियों को क्षेत्र पंचायत के नियंत्रण में रखने के निर्देश दिए गए थे। जिसमें खंड विकास अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी, पशु चिकित्सा अधिकारी आदि के वार्षिक कार्यों का मूल्यांकन कर वार्षिक चरित्र प्रविष्टि का अधिकार क्षेत्र पंचायत प्रमुखों को दिया गया था। जिसका वर्तमान में धरातल पर कोई क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। इसे करना चाहिए
- केंद्रीय सरकार द्वारा 14वें वित्त की धनराशि समाप्त कर दी गई। जिससे क्षेत्र पंचायत के पास विकास कार्यों के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं है।
- 1962 में प्रमुखों का मानदेय 200 रुपये तथा विधायकों का 400 रुपये था। विधायकों का मानदेय बढ़कर 1.25 लाख हो गया। प्रमुखों का मानदेय सात हजार ही है। इसमें बढ़ोतरी होनी चाहिए।
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मोदीपुरम के नारायण फार्म हाउस में आयोजित सम्मेलन की अध्यक्षता बरेली ब्लॉक प्रमुख जगमोहन सिंह यादव ने की। कहा कि चतुर्थ राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के आधार पर ग्राम पंचायत क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत के मध्य तृतीय धनराशि का अनुपात 50:10:20 कर दिया गया। जो कि पहले 60:20:20 था। प्रमुखों के अधिकार बढ़ाने में केंद्र और प्रदेश सरकार आगे आए।
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बैठक का संचालन करते हुए पूर्व प्रमुख राहुल देव ने कहा कि समस्याओं का निराकरण ब्लॉक प्रमुखों एकजुट होकर हकों की लड़ाई लड़ने पर ही होगा। इसके लिए दिल्ली और लखनऊ तक आवाज बुलंद करनी होगी। तय हुआ कि संघ के संयोजक सचिन अहलावत के नेतृत्व में यह लड़ाई लड़ी जाएगी। सचिन अहलावत ने कहा कि प्रमुखों की सभी समस्याओं का निराकरण कराने के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री एवं यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलेंगे।
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सम्मेलन में मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, बागपत, रामपुर, मुरादाबाद, संभल, बदायूं, बरेली, नोएडा, गाजियाबाद, पीलीभीत सहित प्रदेश के तीस जिलों के ब्लॉक प्रमुखों ने शिरकत की। इस दौरान प्रमुखों में सुभाष गुर्जर, नितिन कसाना, अनिल, हरेंद्र, योगेंद्र, अमित प्रमुख, अनीस, इमरान मलिक, गौरव यादव के अलावा गौरव ठाकुर, सतीश यादव, प्रवीन यादव, पदमेंद्र सिंह, सुबोध त्यागी, रविंद्र अहलावत, राहुल खरे, गौरव प्रधान आदि मौजूद रहे।
पूर्व प्रमुख बने संरक्षक
संघ को मजबूती देने के लिए पूर्व प्रमुख विमल शर्मा, पूर्व प्रमुख सरजीत सिंह, पूर्व प्रमुख राहुल देव को संघ संरक्षक बनाया गया। सभी प्रमुखों से एकजुट होकर इस लड़ाई को लड़ने का आह्वान किया गया।
पांच प्रमुख मांग
- 2006 में प्रमुखों को क्षेत्र के लिए शासन से सौ हैंडपंप मिलते थे, जो बंद हो गए, इसे चालू कराएं
- पंचायती राज व्यवस्था विभिन्न विभागों के मध्य स्तर पर कार्यरत कर्मी व कार्यों का विवरण व नियंत्रण अनुसरण कर दिया गया। व्यावहारिक तौर पर उसका पालन नहीं हो रहा
- पूर्व में क्षेत्र पंचायत स्तर पर कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मियों को क्षेत्र पंचायत के नियंत्रण में रखने के निर्देश दिए गए थे। जिसमें खंड विकास अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी, पशु चिकित्सा अधिकारी आदि के वार्षिक कार्यों का मूल्यांकन कर वार्षिक चरित्र प्रविष्टि का अधिकार क्षेत्र पंचायत प्रमुखों को दिया गया था। जिसका वर्तमान में धरातल पर कोई क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। इसे करना चाहिए
- केंद्रीय सरकार द्वारा 14वें वित्त की धनराशि समाप्त कर दी गई। जिससे क्षेत्र पंचायत के पास विकास कार्यों के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं है।
- 1962 में प्रमुखों का मानदेय 200 रुपये तथा विधायकों का 400 रुपये था। विधायकों का मानदेय बढ़कर 1.25 लाख हो गया। प्रमुखों का मानदेय सात हजार ही है। इसमें बढ़ोतरी होनी चाहिए।