{"_id":"5776d1194f1c1ba95c79b998","slug":"bhatiye-baasmati","type":"story","status":"publish","title_hn":"विदेश में बढ़ी भारतीय बासमती की डिमांड ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विदेश में बढ़ी भारतीय बासमती की डिमांड
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 02 Jul 2016 02:05 AM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विदेशी बाजारों में भारतीय बासमती की गुणवत्ता बढ़ी तो वह वैश्विक कीमतों के भंवर में फंसकर रह गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में रेट बढ़ने से बासमती की खेती का रकबा और कीमत दोनों में उछाल आया। लेकिन, दो साल से कम रेट मिलने के कारण किसान निराश हुए हैं। हालांकि, बदले हालात में भी किसानों का रुझान बासमती धान की खेती से कम नहीं हुआ है। किसान इस उम्मीद से बासमती की खेती को बढ़ावा देने में जुटे हैं कि आने वाले दिनों में कीमतें सुधरेंगी, तो उन्हें अच्छा मुनाफा होगा।
उन्नत बीज मिले, मिल हुईं अपग्रेड
कुछ समय पहले तक विदेश भेजा गया बासमती चावल इसलिए वापस कर दिया जाता था, क्योंकि उसकी गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरती थी। पिछले दो से तीन साल में इस दिशा में बेहतर काम किया गया। केंद्र सरकार ने राइस मिलों का उच्चीकरण कर चावल की गुणवत्ता में सुधार किया। वहीं, वैज्ञानिकों ने ऐसे बीज किसानों को उपलब्ध कराए, जिनकी उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता दोनों ही अधिक थी।
कीमतों में फंसी गुणवत्ता
किसान बासमती धान की खेती से संतुष्ट नजर आए। किसानों का कहना था कि उन्हें बासमती की खेती से अतिरिक्त आय होने लगी है। लेकिन, विदेशी बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव ने उन्हें निराश किया। पिछले साल 39 लाख मीट्रिक टन चावल का निर्यात किया गया था। इससे 22800 करोड़ रुपये की आय हुई थी। जबकि, वर्ष 2013-14 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल की कीमत अधिक होने के कारण 37 लाख 60 हजार मीट्रिक टन चावल के निर्यात पर 29300 करोड़ की आय हुई थी।
विज्ञापन
मोदीपुरम से जाता है देशभर में बीज
देश का एकमात्र बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान (बीईडीएफ) मोदीपुरम में है। यहां से देशभर में उच्च क्वालिटी का बीज जाता है। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रितेश कुमार का कहना है कि गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ने पर बासमती को केंद्र सरकार ने पेटेंट कर दिया है। इसके बाद बासमती के उत्पादन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और जम्मू कश्मीर के किसान भी आगे आए हैं। हालांकि, बासमती के पिछले दो वर्ष से दाम कम होने के कारण हमें एक्सपोर्ट से दाम कम मिला है। लेकिन, किसानों का रुझान कम नहीं हुआ है। अब उम्मीद है कि इसके रेट बढ़ेंगे।
चावल निर्यात :
कुल एक्सपोर्ट - 37.5 प्रतिशत
- बासमती - 22 प्रतिशत
- गैर बासमती - 15.5 प्रतिशत
खेती का रकबा :
वर्ष 2013 - 1677.45 हजार हेक्टेयर
वर्ष 2014 - 2134.55 हजार हेक्टेयर
वर्ष 2015 - 2118.5 हजार हेक्टेयर
उत्पादन :
वर्ष 2013 - 6616 हजार मीट्रिक टन
2014 - 8773.78 हजार मीट्रिक टन
2015 - 8058.05 हजार मीट्रिक टन
विज्ञापन
उन्नत बीज मिले, मिल हुईं अपग्रेड
कुछ समय पहले तक विदेश भेजा गया बासमती चावल इसलिए वापस कर दिया जाता था, क्योंकि उसकी गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरती थी। पिछले दो से तीन साल में इस दिशा में बेहतर काम किया गया। केंद्र सरकार ने राइस मिलों का उच्चीकरण कर चावल की गुणवत्ता में सुधार किया। वहीं, वैज्ञानिकों ने ऐसे बीज किसानों को उपलब्ध कराए, जिनकी उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता दोनों ही अधिक थी।
विज्ञापन
कीमतों में फंसी गुणवत्ता
किसान बासमती धान की खेती से संतुष्ट नजर आए। किसानों का कहना था कि उन्हें बासमती की खेती से अतिरिक्त आय होने लगी है। लेकिन, विदेशी बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव ने उन्हें निराश किया। पिछले साल 39 लाख मीट्रिक टन चावल का निर्यात किया गया था। इससे 22800 करोड़ रुपये की आय हुई थी। जबकि, वर्ष 2013-14 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल की कीमत अधिक होने के कारण 37 लाख 60 हजार मीट्रिक टन चावल के निर्यात पर 29300 करोड़ की आय हुई थी।
विज्ञापन
मोदीपुरम से जाता है देशभर में बीज
देश का एकमात्र बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान (बीईडीएफ) मोदीपुरम में है। यहां से देशभर में उच्च क्वालिटी का बीज जाता है। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रितेश कुमार का कहना है कि गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ने पर बासमती को केंद्र सरकार ने पेटेंट कर दिया है। इसके बाद बासमती के उत्पादन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और जम्मू कश्मीर के किसान भी आगे आए हैं। हालांकि, बासमती के पिछले दो वर्ष से दाम कम होने के कारण हमें एक्सपोर्ट से दाम कम मिला है। लेकिन, किसानों का रुझान कम नहीं हुआ है। अब उम्मीद है कि इसके रेट बढ़ेंगे।
चावल निर्यात :
कुल एक्सपोर्ट - 37.5 प्रतिशत
- बासमती - 22 प्रतिशत
- गैर बासमती - 15.5 प्रतिशत
खेती का रकबा :
वर्ष 2013 - 1677.45 हजार हेक्टेयर
वर्ष 2014 - 2134.55 हजार हेक्टेयर
वर्ष 2015 - 2118.5 हजार हेक्टेयर
उत्पादन :
वर्ष 2013 - 6616 हजार मीट्रिक टन
2014 - 8773.78 हजार मीट्रिक टन
2015 - 8058.05 हजार मीट्रिक टन