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Meerut News: शौर्य सिंधु का विराट ज्वार थे भगत सिंह...
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मेरठ..कंवलजीत..शहीद ऐ आजम भगत सिंह क जन्मदिवस के अवसर पर चेंबर ऑफ़ कॉमर्स दिल्ली रोड पर पंवार वा
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- रोडवेज चैंबर ऑफ कॉमर्स में काव्य पाठ कर बलिदानी को याद किया
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। रोडवेज चैंबर ऑफ कॉमर्स में पंवार वाणी फाउंडनेशन की ओर से शहीद-ए-आजम भगत सिंह के जन्मदिन पर कवियों ने काव्य पाठ के माध्यम से बलिदानी क्रांतिकारी भगत सिंह के बलिदान को याद किया।
कार्यक्रम में मुख्य संयोजक अजय प्रेमी और सुमनेश सुमन रहे। सरस्वती वंदना के बाद कवि डॉ. अर्जुन सिसोदिया ने कहा-शौर्य सिंधु का विराट ज्वार थे भगत सिंह, जिसमें फिरंगियों की नांव डूब जानी थी, जिसपे स्वतंत्रता का पावन प्रसून खिला, पंचनद की वो वंश बेल बलिदानी थी....। दीप प्रज्ज्वलन कवि डॉ. हरिओम पंवार ने किया।
कवयित्री कोमल रस्तौगी ने कहा कि रंग दे बसंती चोला गाया, फंदा चूम लिया..., वीर बलिदानियों का भाल हैं भगत सिंह, राजगुरु सुखदेव संग चढ़ गए फांसी, विद्यावती माई के वो लाल हैं भगत सिंह, मातृभूमि के लिए जो स्वप्न होम करती हैं, ऐसी तरुणाई की मिसाल हैं भगत सिंह। फखरी मेरठी ने कहा कि फांसी के फंदे तक भी जो इंकलाब दोहराता है, भारत मां का वोही लाडला, भगत सिंह कहलाता है...।
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विकास विजय ने सुनाया- ओस की बूंदें लिखेंगे, बाढ़ का पानी लिखेंगे, पक रही है खेत में जो वो फसल धानी लिखेंगे...। कार्यक्रम के अंत में सुमनेश सुमन ने कहा- भगत अशफाक शेखर की कहानी काम आएगी, अंधेरो, बीहड़ाें में रात रानी काम आएगी, भले इल्जाम कितने भी लगेें इस नौजवानी पर, जरूरत में वतन के ये जवानी काम आएगी...पर ताालियां गूंजीं। इस दौरान श्याम मोहन गुप्त, मंजीत सिंह कोछड़, अजय गुप्ता, विमल शर्मा ने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर श्याम मोहन गुप्ता, दिनेश चंद्र जैन, प्रभात राय, विनोद भारती, अरुण जिंदल, पंडित ईश्वर चंद्र गंभीर, डॉ. रामगोपाल भारतीय आदि रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। रोडवेज चैंबर ऑफ कॉमर्स में पंवार वाणी फाउंडनेशन की ओर से शहीद-ए-आजम भगत सिंह के जन्मदिन पर कवियों ने काव्य पाठ के माध्यम से बलिदानी क्रांतिकारी भगत सिंह के बलिदान को याद किया।
कार्यक्रम में मुख्य संयोजक अजय प्रेमी और सुमनेश सुमन रहे। सरस्वती वंदना के बाद कवि डॉ. अर्जुन सिसोदिया ने कहा-शौर्य सिंधु का विराट ज्वार थे भगत सिंह, जिसमें फिरंगियों की नांव डूब जानी थी, जिसपे स्वतंत्रता का पावन प्रसून खिला, पंचनद की वो वंश बेल बलिदानी थी....। दीप प्रज्ज्वलन कवि डॉ. हरिओम पंवार ने किया।
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कवयित्री कोमल रस्तौगी ने कहा कि रंग दे बसंती चोला गाया, फंदा चूम लिया..., वीर बलिदानियों का भाल हैं भगत सिंह, राजगुरु सुखदेव संग चढ़ गए फांसी, विद्यावती माई के वो लाल हैं भगत सिंह, मातृभूमि के लिए जो स्वप्न होम करती हैं, ऐसी तरुणाई की मिसाल हैं भगत सिंह। फखरी मेरठी ने कहा कि फांसी के फंदे तक भी जो इंकलाब दोहराता है, भारत मां का वोही लाडला, भगत सिंह कहलाता है...।
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विकास विजय ने सुनाया- ओस की बूंदें लिखेंगे, बाढ़ का पानी लिखेंगे, पक रही है खेत में जो वो फसल धानी लिखेंगे...। कार्यक्रम के अंत में सुमनेश सुमन ने कहा- भगत अशफाक शेखर की कहानी काम आएगी, अंधेरो, बीहड़ाें में रात रानी काम आएगी, भले इल्जाम कितने भी लगेें इस नौजवानी पर, जरूरत में वतन के ये जवानी काम आएगी...पर ताालियां गूंजीं। इस दौरान श्याम मोहन गुप्त, मंजीत सिंह कोछड़, अजय गुप्ता, विमल शर्मा ने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर श्याम मोहन गुप्ता, दिनेश चंद्र जैन, प्रभात राय, विनोद भारती, अरुण जिंदल, पंडित ईश्वर चंद्र गंभीर, डॉ. रामगोपाल भारतीय आदि रहे।