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20 दिन पहले बनने लगी थी पांच मौतों की प्लानिंग
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Sun, 09 Oct 2016 02:28 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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रघुकुल विहार में विनीत अरोड़ा के परिवार में दो महीने से आर्थिक समस्याएं बढ़ने लगी थीं। बेटे की कोचिंग फीस के अलावा कर्मचारियों का वेतन भी परिवार नहीं दे पा रहा था। 20 दिन से विनीत और उसका बेटा गुमसुम से रहने लगे थे। लोगों से मिलना जुलना कम कर दिया था। घर में मोटा रस्सा लाकर रखा गया। ये तमाम बातें हैं, जिनसे लग रहा है कि मौत की पटकथा 20 दिन पहले ही लिखनी शुरू कर दी थी।
कारोबारी के घर काम करने वाली बबीता ने बताया कि श्रीमोहन लाला जी अधिकतर बीमार रहते थे। उनके बेटे विनीत ही कारोबार संभलते थे। करीब 20 दिन पहले उसने घर में मोटा रस्सा देखा था। दो महीने से उसका वेतन भी नहीं दिया था, उसने मांगा भी नहीं।
सर, फीस के लिए मत टोकना
अभिषेक 12वीं का स्टूडेंट था। पीएल शर्मा रोड स्थित प्रो कोचिंग इंस्टीट्यूट में कोचिंग कर रहा था। कोचिंग सेंटर संचालक सुमित कुमार ने बताया कि अभिषेक पढ़ने में होशियार था। सबका आदर करता था। करीब दो माह पहले कोचिंग की फीस पेंडिंग हो गई, तो उसने खुद कहा कि सर प्लीज घर में फाइनेंशियल प्रॉब्लम हो गई है, मुझे फीस के लिए मत टोकना। स्टाफ ने उसे फिर टोका भी नहीं। इस दुखद हादसे से पूरा स्टाफ दुखी था।
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डॉक्टर बनना चाहता था अभिषेक
सुमित कुमार ने बताया कि अभिषेक की इच्छा डॉक्टर बनने की थी। इंटर में वह बॉयो लेना चाहता था, लेकिन परिजन उसे इंजीनियर बनाना चाहते थे, इसी वजह से उसने बायो नहीं ली। वह पीसीएम से इंटर कर रहा था। लेकिन इसमें भी वह खुश था। कहता था कि पापा का सपना पूरा करूंगा।
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कारोबारी के घर काम करने वाली बबीता ने बताया कि श्रीमोहन लाला जी अधिकतर बीमार रहते थे। उनके बेटे विनीत ही कारोबार संभलते थे। करीब 20 दिन पहले उसने घर में मोटा रस्सा देखा था। दो महीने से उसका वेतन भी नहीं दिया था, उसने मांगा भी नहीं।
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सर, फीस के लिए मत टोकना
अभिषेक 12वीं का स्टूडेंट था। पीएल शर्मा रोड स्थित प्रो कोचिंग इंस्टीट्यूट में कोचिंग कर रहा था। कोचिंग सेंटर संचालक सुमित कुमार ने बताया कि अभिषेक पढ़ने में होशियार था। सबका आदर करता था। करीब दो माह पहले कोचिंग की फीस पेंडिंग हो गई, तो उसने खुद कहा कि सर प्लीज घर में फाइनेंशियल प्रॉब्लम हो गई है, मुझे फीस के लिए मत टोकना। स्टाफ ने उसे फिर टोका भी नहीं। इस दुखद हादसे से पूरा स्टाफ दुखी था।
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डॉक्टर बनना चाहता था अभिषेक
सुमित कुमार ने बताया कि अभिषेक की इच्छा डॉक्टर बनने की थी। इंटर में वह बॉयो लेना चाहता था, लेकिन परिजन उसे इंजीनियर बनाना चाहते थे, इसी वजह से उसने बायो नहीं ली। वह पीसीएम से इंटर कर रहा था। लेकिन इसमें भी वह खुश था। कहता था कि पापा का सपना पूरा करूंगा।