बासमती एक्सपोर्ट: यूरोप में बढ़ी भारतीय चावल की मांग,पेरिस व्यापार मेले में यूरोपीय खरीदारों ने दिखाई दिलचस्पी
पेरिस के सियाल व्यापार मेले में यूरोपीय आयातकों ने भारतीय बासमती चावल में रुचि दिखाई। निर्यात 60 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है, जिससे पश्चिमी यूपी के किसानों को नए बाजारों का लाभ मिल सकता है।
विस्तार
पेरिस में आयोजित व्यापार मेले में बासमती प्रमोशनल एवं नेटवर्किंग कार्यक्रम के तहत यूरोपीय देशों के आयातकों ने बड़ी मात्रा में बासमती चावल के आयात के ऑर्डर दिए हैं। इसमें 17 आयातकों समेत करीब 70 प्रतिनिधियों ने रुचि दिखाई।
मेले में रखे गए प्रस्तावों के बाद इस बार वित्तीय वर्ष के निर्यात सत्र में बासमती चावल का निर्यात 50,138 करोड़ रुपये से बढ़कर 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश से 65.21 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल का निर्यात कियागया था। मेले के दौरान भारतीय बासमती की गुणवत्ता, यूरोपीय मानकों के अनुरूप उत्पादन, व्यापारिक संपर्क मजबूत करने और नए बाजार तलाशने पर जोर दिया गया।
बासमती निर्यात विकास फाउंडेशन (बीईडीएफ) ने पेरिस स्थित भारतीय दूतावास और अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ के सहयोग से सियाल पेरिस मेले में यह आयोजन किया। इसमें बीईडीएफ के निदेशक डॉ. रितेश शर्मा ने विदेशी खरीदारों को भारतीय बासमती की विशेषता, गुणवत्ता और निर्यात की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने यूरोपीय मानकों पर खरा उतरने वाले उच्च गुणवत्ता के भारतीय बासमती चावल के आयात के लिए खरीदारों को प्रोत्साहित किया। डॉ. रितेश ने बताया कि पिछले पांच साल में भारत से यूरोप को बासमती चावल का निर्यात 93.4 मिलियन डॉलर से बढ़कर 402 मिलियन डॉलर तक हो गया है।
पेरिस के मेले में बीईडीएफ के स्टॉल का उद्घाटन
पेरिस में 17 से 21 अक्तूबर तक पार्क डेस एक्सपोजिशन्स विलेपिंट में आयोजित सियाल पेरिस मेले में देश के करीब 100 निर्यातकों ने भाग लिया। यह खाद्य उत्पादों से जुड़ा प्रमुख अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला है। मेले के दौरान भारतीय पवेलियन एवं बीईडीएफ के स्टॉल का उद्घाटन भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सचिव अविनाश जोशी, इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गेनाइजेशन के अध्यक्ष जावेद अशरफ, एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव और बीईडीएफ के निदेशक डॉ रितेश शर्मा ने संयुक्त रूप से किया। स्टॉल के माध्यम से भारतीय बासमती की विशेषताओं और निर्यात की संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने प्रस्तुत किया गया।
पश्चिमी यूपी के किसानों के लिए महत्वपूर्ण
मोदीपुरम। बासमती उत्पादन और निर्यात पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। एपीडा के अनुसार भारत के बासमती के भौगोलिक संकेतक जीआई क्षेत्र में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 30 जिले शामिल हैं। क्षेत्र में बासमती की खेती करने वाले किसानों के साथ चावल प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यात कारोबार से जुड़े लोगों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग महत्वपूर्ण है।
विदेशी भी मुरीद
सऊदी अरब, ईरान, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और यमन भारतीय बासमती के प्रमुख निर्यातक देश हैं। यूरोप बासमती के लिए प्रीमियम बाजार है। पिछले पांच वर्षों में यूरोप को होने वाला बासमती निर्यात चार गुना से अधिक बढ़ा है जो इसकी पसंद और मांग को दर्शाता है।