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बेसिक कोटा रहते रसूखदार किसानों के हो रहे एग्रीमेंट
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 25 Feb 2017 02:03 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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सहकारी गन्ना विकास समितियों ने किसानों को आम व खास गन्ना किसानों में बांटकर रख दिया है। आम किसानों की पर्चियां जहां ओवरलोड में काटी जा रही है वहीं रसूखदार और सिफारिशी किसानों को बेसिक कोटा रहते भी गन्ना एग्रीमेंट किया जा रहा है। शुगर मिलों और गन्ना समितियों की इस धांधली से आम गन्ना किसान प्रभावित हो रहे हैं।
उत्तर प्रदेश गन्ना विभाग की सहकारी गन्ना समितियां शुगर मिल और गन्ना किसानों के बीच सेतु का काम करती है। शुगर मिल और किसानों के बीच गन्ना खरीद और आपूर्ति समितियों के माध्यम से होती है। इसके लिए समितियोें के जरिये न केवल क्षेत्र में गन्ना रकबे का सर्वे कराया जाता है, बल्कि किसानों को समिति का सदस्य बनाकर गन्ना आपूर्ति का एग्रीमेंट भी किया जाता है। इसके तहत प्रति हेक्टेयर औसत गन्ना उत्पादन का 85 फीसदी बेसिक कोटा तय कर दिया जाता है। बेसिक कोटा यानी किसान के पास अनुमानित गन्ना खत्म हुए बगैर शेष बचे हुए गन्ने का अनुबंध नहीं किया जाता है। बेसिक कोटा खत्म होेने के बाद किसान की डिमांड पर बचे हुए गन्ने की तय फीस लेकर खरीद अनुबंध कर लिया जाता है। लेकिन मंडल कई गन्ना विकास समितियों में बेसिक कोटा खत्म हुए बगैर ही रसूखदार और सिफारिशी किसानों का एग्रीमेंट करके उन्हें लाभ पहुंचाने का काम कर रहा है। वहीं आम किसान के बेसिक कोटे की पर्चियों को भी ओवरलोड में काटकर परेशान किया जा रहा है। गन्ना समितियों में ओवरलोड में पर्चियों के कटने की शिकायतों का अंबार लगा हुआ है। किसानों का कहना है कि ओवरलोड में पर्ची कटने पर उनको आवंटित पर्चियां खत्म हो गई हैं। इसके चलते वे अपना गन्ना नहीं डाल पा रहे हैं।
गन्ना आयुक्त की जाएगी शिकायत
गन्ना ओवरलोड में पर्चियों का काटा जाना सही नहीं है। साथ ही बेसिक कोटा रहते कुछ खास किसानों को एग्रीमेंट के जरिये फायदा पहुंचाना गलत है। मामले की शिकायत गन्ना आयुक्त से की जाएगी। -डॉ. राजकुमार सांगवान, संगठन प्रभारी वेस्ट यूपी रालोद
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एक समान हो व्यवस्था
किसानों को आम व खास में नहीं बांटा जाना चाहिए। सभी के लिए एक समान व्यवस्था होनी चाहिए। बेसिक कोटा खत्म हुए बगैर अतिरिक्त एग्रीमेंट का नियम नहीं है। ओवरलोड में पर्चियां भी नहीं कटनी चाहिए। -विनोद कलंजरी, प्रदेश उपाध्यक्ष भाकियू
जांच कराकर होगी कार्रवाई
इस तरह का मामला उनके संज्ञान में नहीं है। अगर समितियों के माध्यम से ऐसा किया जा रहा है तो यह गलत है। इसकी जांच कराई जाएगी। -हरपाल सिंह, उप गन्ना आयुक्त मेरठ परिक्षेत्र
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उत्तर प्रदेश गन्ना विभाग की सहकारी गन्ना समितियां शुगर मिल और गन्ना किसानों के बीच सेतु का काम करती है। शुगर मिल और किसानों के बीच गन्ना खरीद और आपूर्ति समितियों के माध्यम से होती है। इसके लिए समितियोें के जरिये न केवल क्षेत्र में गन्ना रकबे का सर्वे कराया जाता है, बल्कि किसानों को समिति का सदस्य बनाकर गन्ना आपूर्ति का एग्रीमेंट भी किया जाता है। इसके तहत प्रति हेक्टेयर औसत गन्ना उत्पादन का 85 फीसदी बेसिक कोटा तय कर दिया जाता है। बेसिक कोटा यानी किसान के पास अनुमानित गन्ना खत्म हुए बगैर शेष बचे हुए गन्ने का अनुबंध नहीं किया जाता है। बेसिक कोटा खत्म होेने के बाद किसान की डिमांड पर बचे हुए गन्ने की तय फीस लेकर खरीद अनुबंध कर लिया जाता है। लेकिन मंडल कई गन्ना विकास समितियों में बेसिक कोटा खत्म हुए बगैर ही रसूखदार और सिफारिशी किसानों का एग्रीमेंट करके उन्हें लाभ पहुंचाने का काम कर रहा है। वहीं आम किसान के बेसिक कोटे की पर्चियों को भी ओवरलोड में काटकर परेशान किया जा रहा है। गन्ना समितियों में ओवरलोड में पर्चियों के कटने की शिकायतों का अंबार लगा हुआ है। किसानों का कहना है कि ओवरलोड में पर्ची कटने पर उनको आवंटित पर्चियां खत्म हो गई हैं। इसके चलते वे अपना गन्ना नहीं डाल पा रहे हैं।
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गन्ना आयुक्त की जाएगी शिकायत
गन्ना ओवरलोड में पर्चियों का काटा जाना सही नहीं है। साथ ही बेसिक कोटा रहते कुछ खास किसानों को एग्रीमेंट के जरिये फायदा पहुंचाना गलत है। मामले की शिकायत गन्ना आयुक्त से की जाएगी। -डॉ. राजकुमार सांगवान, संगठन प्रभारी वेस्ट यूपी रालोद
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एक समान हो व्यवस्था
किसानों को आम व खास में नहीं बांटा जाना चाहिए। सभी के लिए एक समान व्यवस्था होनी चाहिए। बेसिक कोटा खत्म हुए बगैर अतिरिक्त एग्रीमेंट का नियम नहीं है। ओवरलोड में पर्चियां भी नहीं कटनी चाहिए। -विनोद कलंजरी, प्रदेश उपाध्यक्ष भाकियू
जांच कराकर होगी कार्रवाई
इस तरह का मामला उनके संज्ञान में नहीं है। अगर समितियों के माध्यम से ऐसा किया जा रहा है तो यह गलत है। इसकी जांच कराई जाएगी। -हरपाल सिंह, उप गन्ना आयुक्त मेरठ परिक्षेत्र