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#tripletalaq : अपनी जगह और अपनी पहचान खुद बनाएं महिलाएं : आतिया साबरी 

Thu, 24 Aug 2017 02:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, सहारनपुर, शशांक मिश्र
अमर उजाला ब्यूरो, सहारनपुर, शशांक मिश्र Updated Thu, 24 Aug 2017 02:25 PM IST
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Atiya Sabri episode: Three divorce on paper was ruined by life
आतिया साबरी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

आतिया साबरी ने कहा है कि महिलाएं अपने घर में और समाज में अपनी पहचान तथा अपनी जगह खुद बनाएं। किसी से डर कर न रहें, किसी के सामने कमजोर न बनें। अपनी जिंदगी को खुद जीने का हौसला रखें। 

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मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद घर लौटने के बाद अमर उजाला से की बातचीत में आतिया साबरी ने कहा कि मुस्लिम समाज की महिलाओं को जीत की खुशी है। इस फैसले से सभी सहमत है। सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है वह महिलाओं के हक में दिया है। महिलाओं को जीने का अधिकार दिया है। समाज में उन्हें सम्मान का हकदार बनाया है। समाज में बराबरी मिली है। जो भी फैसला आया है महिलाओं के आने वाले कल को सुधारने वाला आया है। जो लड़ाई हम लड़ रहे थे उसमें हमें न्याय मिला है। आने वाले समय में कोई भी लड़की बेघर नहीं होगी। कोई भी उन्हें फोन पर, व्हाट्सएप पर, इंटरनेट पर तलाक  दे सके या कोई या कोई यूं ही छोड़ देगा, ऐसा अब कभी नहीं होगा।  उन्होंने कहा कि वह मुस्लिम बहनों से यह अनुरोध करतीं हैं कि वे अपनी जिंदगी को खुद जीने का हौसला करें, किसी से न डरें और किसी के सामने अपने को कमजोर महसूस न होने दें। अपने घर में भी अपनी पहचान और जगह बनाएं।  

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तीन शब्द ने बदल दी थी जिंदगी

Atiya Sabri episode: Three divorce on paper was ruined by life
आतिया के घर तैनात पुलिस - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

आतिया साबरी ने परिवार और समाज से टकराते हुए तीन तलाक की परंपरा को बदल कर कानून तक पहुंचाने का जो बीड़ा उठाया था उस पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगा दी। तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद मुस्लिम महिलाओं के लिए आजादी के दरवाजे खुल गए। इस पर आतिया ने खुशी जाहिर की। सहारनपुर के मंडी कोतवाली थाना क्षेत्र के मोहल्ला आली, तेलीवाला चौक निवासी आतिया साबरी का निकाह 25 मार्च 2012 को हरिद्वार जिले के खानपुर थाना क्षेत्र के गांव जसोदर निवासी वाजिद अली के साथ हुई थी।

 

आतिया का कहना है कि कुछ समय तो सब कुछ ठीक चलता रहा, लेकिन एक साल बाद ससुरालियों ने उत्पीड़न शुरू कर दिया। उसकी पहली बेटी हुई तभी से ताने देने शुरू हो गए। उसके साथ मारपीट की जाने लगी। उससे दहेज की मांग की जाने लगी। उसकी दूसरी बेटी हुई तो ससुराली पूरी तरह से खिलाफ हो गए। आरोप है कि ससुरालियों ने उसे जहर देकर मारने का प्रयास किया। चिकित्सकों ने इस बात की रिपोर्ट भी दी। जब वह बच गई तो 13 नवंबर 2015 की रात में घर से बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद वह अपने मायके आ गई तो कुछ दिन बाद उसे एक कागज पर तलाक-तलाक-तलाक लिखकर डाक से भेज दिया गया। आतिया ने आरोप लगाया कि डाक से भेजने के साथ ही उसके पति वाजिद ने उस पर दारुल उलूम से फतवा ले लिया कि इस प्रकार से तलाक मान्य है अथवा नहीं। जबकि इस बारे में आतिया को खबर तक नहीं लगी। यहां से ही आतिया के संघर्ष की कहानी शुरू हो गई। दो मासूम बच्चियों को लेकर अपने भाइयों के घर रहने लगी। पहले तो वह पूरी तरह से टूट चुकी थी, लेकिन भाइयों ने उसे सहारा दिया

दारुल उलूम को भी किया आरोपियों में शामिल 

Atiya Sabri episode: Three divorce on paper was ruined by life
सुप्रीम कोर्ट के बाहर आतिया साबरी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
आतिया साबरी ने भी चुप बैठने की बजाय अपने हक के लिए लड़ाई लड़ने की ठान ली। सबसे पहले 12 दिसंबर 2015 को सहारनपुर महिला कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई। उसने आरोप लगाया कि वाजिद ने दारुल उलूम को भी पूरी जानकारी नहीं दी, अधूरी जानकारी पर ही फतवा जारी किए जाने के मामले में आतिया ने दारुल उलूम को भी आड़े हाथों लिया। उसे न सिर्फ धमकियां दी गईं, बल्कि उसका रास्ता रोकने का भी प्रयास किया गया। उसके भाई रिजवान को उत्तराखंड के एक बड़े मामले में फंसाने का भी प्रयास किया गया। गिरफ्तारी भी हुई। फिर भी आतिया के कदम नहीं डगमगाए। उसने तीन तलाक को समाज की महिलाओं के लिए कलंक मानकर इसके खिलाफ आवाज उठाने की ठान ली। उसका तलाक तो हो ही गया था, उसके ससुरालियों को भी कोर्ट के आदेश के बाद गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन उसने कहा कि बेशक उसके ससुरालियों को सजा मिल गई, लेकिन उसकी और उसकी बेटियों की जिंदगी तो बर्बाद हो गई। वह इस मामले में चुप नहीं बैठने वाली और इस गलत परिपाटी के खिलाफ लड़ेंगी। जनवरी में आतिया ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी और हर तारीख पर पूरी तैयारी के साथ पहुंची। वकीलों के यहां चक्कर लगाए और अपने दावों को मजबूती से रखा। 23 जनवरी को आतिया की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दे दी और उस पर सुनवाई के लिए प्रतिवादियों को तलब कर लिया।  

 

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समाज ने किया विरोध, रिश्तेदारों ने भी समझाया 

Atiya Sabri episode: Three divorce on paper was ruined by life
फाइल फोटो
आतिया साबरी ने सुप्रीम कोर्ट में जनवरी 2017 में सुनवाई के लिए याचिका दायर की। 23 जनवरी को याचिका मंजूर कर ली गई। आतिया ने इस मामले में  अधूरी जानकारी पर फतवा देने पर देवबंद दारुल उलूम, ससुरालियों, कानून एवं न्याय मंत्रालय, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय तथा बाल कल्याण एवं महिला विकास मंत्रालय को प्रतिवादी बनाया। आतिया साबरी के तीन तलाक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पांच जजों की पीठ का गठन किया और तब तक आई सभी याचिका को एक साथ एकत्रित कर उनकी सुनवाई शुरू कराई।  

आतिया साबरी ने बताया जब उन्होंने तीन तलाक के खिलाफ कदम उठाया तो पूरा समाज उसके खिलाफ हो गया। पहले तो उसके परिवार वालों ने ही कहा कि एक बार सोच ले, कहीं ऐसा न हो कि बाद में पछताना पड़े। जब उसने ठान ली तो परिवार वाले साथ हो गए। फिर रिश्तेदारों ने विरोध किया। उन्होंने न सिर्फ चेतावनी दी बल्कि कुछ भी परिणाम होने की धमकी तक दी। कुछ लोगों ने उनका रास्ता भी रोकने का प्रयास भी किया। 

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