#tripletalaq : अपनी जगह और अपनी पहचान खुद बनाएं महिलाएं : आतिया साबरी
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आतिया साबरी ने कहा है कि महिलाएं अपने घर में और समाज में अपनी पहचान तथा अपनी जगह खुद बनाएं। किसी से डर कर न रहें, किसी के सामने कमजोर न बनें। अपनी जिंदगी को खुद जीने का हौसला रखें।
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद घर लौटने के बाद अमर उजाला से की बातचीत में आतिया साबरी ने कहा कि मुस्लिम समाज की महिलाओं को जीत की खुशी है। इस फैसले से सभी सहमत है। सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है वह महिलाओं के हक में दिया है। महिलाओं को जीने का अधिकार दिया है। समाज में उन्हें सम्मान का हकदार बनाया है। समाज में बराबरी मिली है। जो भी फैसला आया है महिलाओं के आने वाले कल को सुधारने वाला आया है। जो लड़ाई हम लड़ रहे थे उसमें हमें न्याय मिला है। आने वाले समय में कोई भी लड़की बेघर नहीं होगी। कोई भी उन्हें फोन पर, व्हाट्सएप पर, इंटरनेट पर तलाक दे सके या कोई या कोई यूं ही छोड़ देगा, ऐसा अब कभी नहीं होगा। उन्होंने कहा कि वह मुस्लिम बहनों से यह अनुरोध करतीं हैं कि वे अपनी जिंदगी को खुद जीने का हौसला करें, किसी से न डरें और किसी के सामने अपने को कमजोर महसूस न होने दें। अपने घर में भी अपनी पहचान और जगह बनाएं।
तीन शब्द ने बदल दी थी जिंदगी
आतिया साबरी ने परिवार और समाज से टकराते हुए तीन तलाक की परंपरा को बदल कर कानून तक पहुंचाने का जो बीड़ा उठाया था उस पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगा दी। तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद मुस्लिम महिलाओं के लिए आजादी के दरवाजे खुल गए। इस पर आतिया ने खुशी जाहिर की। सहारनपुर के मंडी कोतवाली थाना क्षेत्र के मोहल्ला आली, तेलीवाला चौक निवासी आतिया साबरी का निकाह 25 मार्च 2012 को हरिद्वार जिले के खानपुर थाना क्षेत्र के गांव जसोदर निवासी वाजिद अली के साथ हुई थी।
आतिया का कहना है कि कुछ समय तो सब कुछ ठीक चलता रहा, लेकिन एक साल बाद ससुरालियों ने उत्पीड़न शुरू कर दिया। उसकी पहली बेटी हुई तभी से ताने देने शुरू हो गए। उसके साथ मारपीट की जाने लगी। उससे दहेज की मांग की जाने लगी। उसकी दूसरी बेटी हुई तो ससुराली पूरी तरह से खिलाफ हो गए। आरोप है कि ससुरालियों ने उसे जहर देकर मारने का प्रयास किया। चिकित्सकों ने इस बात की रिपोर्ट भी दी। जब वह बच गई तो 13 नवंबर 2015 की रात में घर से बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद वह अपने मायके आ गई तो कुछ दिन बाद उसे एक कागज पर तलाक-तलाक-तलाक लिखकर डाक से भेज दिया गया। आतिया ने आरोप लगाया कि डाक से भेजने के साथ ही उसके पति वाजिद ने उस पर दारुल उलूम से फतवा ले लिया कि इस प्रकार से तलाक मान्य है अथवा नहीं। जबकि इस बारे में आतिया को खबर तक नहीं लगी। यहां से ही आतिया के संघर्ष की कहानी शुरू हो गई। दो मासूम बच्चियों को लेकर अपने भाइयों के घर रहने लगी। पहले तो वह पूरी तरह से टूट चुकी थी, लेकिन भाइयों ने उसे सहारा दिया
दारुल उलूम को भी किया आरोपियों में शामिल
समाज ने किया विरोध, रिश्तेदारों ने भी समझाया
आतिया साबरी ने बताया जब उन्होंने तीन तलाक के खिलाफ कदम उठाया तो पूरा समाज उसके खिलाफ हो गया। पहले तो उसके परिवार वालों ने ही कहा कि एक बार सोच ले, कहीं ऐसा न हो कि बाद में पछताना पड़े। जब उसने ठान ली तो परिवार वाले साथ हो गए। फिर रिश्तेदारों ने विरोध किया। उन्होंने न सिर्फ चेतावनी दी बल्कि कुछ भी परिणाम होने की धमकी तक दी। कुछ लोगों ने उनका रास्ता भी रोकने का प्रयास भी किया।
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