स्टडी रिपोर्ट में खुलासा: 95 प्रतिशत को छू नहीं पाया कोरोना, 80 प्रतिशत से ज्यादा ने हराया, पढ़िए खास खबर
15 माह की स्टडी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार यहां 14 लाख से अधिक लोगों की कोरोना जांच की गई, जिनमें से 95 प्रतिशत को कोरोना छू भी नहीं सका। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कोरोना की दोनों लहर में जांच कराने वाले 95.5 प्रतिशत लोग महामारी की चपेट में आने से बच गए। जांच कराने वाले सिर्फ 4.5 प्रतिशत लोगों को ही कोरोना हुआ, जो पॉजिटिव हुए उनमें से भी 82.4 प्रतिशत ठीक हो चुके हैं। कोरोना से संक्रमित हुए लोगों में मई तक 752 की मौत हुई, जो कोरोना संक्रमित लोगों का 1.16 प्रतिशत है। यह खुलासा स्वास्थ्य विभाग की 15 माह की स्टडी रिपोर्ट में हुआ है।
मेरठ में मार्च 2020 से मई 2021 तक 14 लाख 59 हजार 563 लोगों की जांच हुई है। इनमें से 13 लाख 94 हजार 488 लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई। यानी कोरोना उन्हें छू नहीं सका। ये मामूली संख्या नहीं है। कुल जांच कराने वालों का करीब 95.5 प्रतिशत है। ये वे लोग हैं, जिन्हें या तो कोरोना जैसे लक्षण थे, या इनका कोई परिवार वाला, परिचित या रिश्तेदार कोरोना की चपेट में आ चुका था। इतना ही नहीं, करीब 82.4 प्रतिशत (53638 लोग) ऐसे भी हैं, जिन्हें कोरोना तो हुआ, मगर उन्होंने उसे हरा दिया और अब ठीक हैं।
स्टडी रिपोर्ट में साफ कहती है कि सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क और सफाई का पालन कर कोरोना को भयावह होने से रोका जा सकता है, जो लोग संक्रमित हुए हैं इनमें भी ज्यादातर वे हैं जिन्होंने नियमों का पालन नहीं किया। मेरठ में कोरोना वायरस सबसे ज्यादा युवा और कामकाजी आबादी को चपेट में ले रहा है। 19 साल से लेकर 50 साल उम्र वालों की श्रेणी का प्रतिशत तो 60 फीसदी से भी ज्यादा है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अखिलेश मोहन का कहना है कि इस रोग से कोई भी प्रभावित हो सकता है। यहां यह भी गौरतलब है कि वह इस बीमारी को हराने में भी सक्षम हैं। इस वायरस से जुड़ी बारीकियों में से एक बात यह है कि किसी व्यक्ति में यह संक्रमण बहुत हल्का हो सकता है, जहां संक्रमण के कोई संकेत या लक्षण नहीं दिखते, लेकिन फिर भी वह व्यक्ति इस वायरस का वाहक बन सकता है और उस व्यक्ति से यह दूसरे में पहुंच सकता है। इसलिए हर किसी को सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर रखनी चाहिए।
अव्यवस्था की वजह से दूसरी लहर रही ज्यादा खतरनाक
दूसरी लहर (अप्रैल-मई 2021) में संक्रमण का फैलाव तो तेज था ही, साथ ही अव्यवस्था हावी थी। जिस कारण यह ज्यादा खतरनाक रही। किसी को ऑक्सीजन नहीं मिली तो किसी को बेड। किसी का इलाज करने चिकित्सक नहीं पहुंचा तो किसी मरीज का लाखों का बिल बना दिया गया। अगर व्यवस्था दुरुस्त होती तो इतना हाहाकार नहीं मचता।
कोरोना कम हुआ तो ब्लैक फंगस का हमला
कोरोना कम हुआ तो अब ब्लैक फंगस कहर बरपा रहा है। जिले में 248 मरीज मिल चुके हैं और 21 की मौत हो चुकी है। तादाद ज्यादा होने पर मेडिकल में कोविड ब्लाक में ब्लैक फंगस के मरीजों को रखना पड़ रहा है। हालात ये हैं कि लोगों में ब्लैक फंगस के नाम की दहशत हो गई है। अगर किसी के दांत में जरा भी दर्द हो रहा है तो वह घबराकर चिकित्सक के पास पहुंच रहा है।