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यूपी: दीपावली के बाद और जहरीली हुई हवा, 395 पहुंचा वायु प्रदुषण स्तर, सांस लेना हुआ दूभर

Sat, 10 Nov 2018 11:46 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Sat, 10 Nov 2018 11:46 AM IST
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air pollution increased after Deepawali in Delhi ncr region meerut
दिवाली के बाद प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला

दीपावली के बाद मेरठ की हवा का बुरा हाल है। बढ़ती धूल की वजह से हवा जहरीली होती जा रही है। फिलहाल धूल से राहत के आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं। मेरठ में वायु प्रदूषण का स्तर 395 तक पहुंच गया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यही हाल रहा तो लोगों की दिक्कतें बढ़ेंगी। फिलहाल मौसम में अभी उतार चढ़ाव बना रहेगा। जब तक हवाओं की गति धीमी रहेगी, तब तक प्रदूषण का स्तर भी बढ़ा रहेगा।

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धूल का खतरा दिन और रात में लगातार बढ़ता जा रहा है। सुबह के समय इसका असर ज्यादा दिख रहा है। शुक्रवार को बिजली बंबा चौराहे पर एयर क्वालिटी इंडेक्स पीएम 10 का लेवल 395 पर पहुंच गया। मौसम कार्यालय पर अधिकतम तापमान 27.4 डिग्री व न्यूनतम तापमान 11.7 डिग्री रिकार्ड किया गया। अधिकतम आर्द्रता 89 व न्यूनतम 46 प्रतिशत दर्ज की गई।  
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शहर में प्रदुषण स्तर 

 बिजली बंबा चौराहा    395  
 सर्किट हाउस     374  
 ईव्ज चौराहा     351 
 भगत सिंह चौराहा    347 
 खैरनगर चौराहा     378  
 मेडिकल चौराहा     365   
 जीरो माइल चौराहा    290
 लाल कुर्ती चौराहा    365 


अभी सुबह के समय धूल रहेगी। हवा भी खराब रहेगी। हवा की गति बढ़ने पर मौसम में सुधार आएगा। पहाड़ों पर भी ठंड बढ़ती जा रही है, जिस कारण मैदानी क्षेत्रों में तापमान गिरेगा। रात का तापमान सामान्य से नीचे चल रहा है।  -डॉ. एन सुभाष, मौसम वैज्ञानिक, आईआईएफएसआर
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दस साल से कैंट में ध्वनि प्रदूषण स्थिर

शहर में हर साल पटाखों के शोर से हवा जहरीली होती जा रही है। लेकिन करीब 20 लाख की आबादी के बीच शहर का एक हिस्सा ऐसा भी है, जहां पटाखों का शोर कम होता है। प्रदूषण विभाग के आंकड़ों की माने तो कैंट क्षेत्र में बीते दस सालों से ध्वनि प्रदूषण स्थिर है।

शहर में वायु और ध्वनि प्रदूषण से शहरवासियों का जीना मुहाल हो रहा है। हर साल अक्तूबर माह में ये हालात होते हैं कि बच्चों को स्कूल तक मास्क लगाकर आना पड़ता है। एनसीआर क्षेत्र में पांच दिन पहले मेरठ की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रिकार्ड की गई। 

 वर्ष    कैंट हॉस्पिटल    कैंटोनमेंट बोर्ड    
 2018    63.5    59.2  
 2017    52.8    58.7  
 2016    55.9    60.4  
 2015    52.5    61.2  
 2014    51.8    66.6  
 2013    52.2    67.3  
 2012    63.4    65.6  
 2011    60.1    58.0  
 2010    57.6    62.1  
 2009    56.1    59.9

वायु और ध्वनि प्रदूषण का बढ़ना सही नहीं  

विशेषज्ञों की माने तो वायु और ध्वनि प्रदूषण का बढ़ना सही नहीं है। यह स्वास्थ्य के लिए भी ठीक नहीं है। इसका पर्यावरण पर दुष्प्रभाव दिखने लगा है। प्रदूषण का असर अक्तूबर से जनवरी तक सबसे अधिक दिखाई देता है। इन दिनों मौसम में काफी नमी आ जाती है, जो पार्टीकल हवा में ही घुलते रहते हैं। 

कैंट क्षेत्र में पटाखों का शोर कम रहता है। हर साल यही स्थिति रहती है। अगर इस क्षेत्र की तरह अन्य शहर के हिस्सों में भी लोग जागरुक हो जाए तो शहर में प्रदूषण को काफी कम किया जा सकता है। अगर पिछले वर्षों की तुलना करें तो वाहनों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है, जो सहीं नहीं है।  -आरके त्यागी, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी

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