फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   जिला योजना चुनाव में भाजपा की अग्नि परीक्षा

जिला योजना चुनाव में भाजपा की अग्नि परीक्षा

Sat, 10 Mar 2018 02:24 AM IST
Updated Sat, 10 Mar 2018 02:24 AM IST
विज्ञापन
जिला योजना चुनाव में भाजपा की  अग्नि परीक्षा
मेरठ। जिला योजना समिति का अस्तित्व भले ही कुछ नजर न आता हो। लेकिन इसकी निर्वाचन प्रक्रिया राजनैतिक दबाव जरूर बनाती है। इसलिए यह चुनाव प्रतिष्ठापूर्ण हो जाता है। जिला योजना समिति में इस समय जिला पंचायत के 14 प्रतिनिधियों में से पांच भाजपा के हैं। लेकिन अब नगर निकायों से भी 14 सदस्यों का चुनाव होना है, जिसमें भाजपा के सामने अपना बहुमत सिद्ध करने की चुनौती होगी। क्योंकि विपक्ष की सधी हुई रणनीति के तहत यह चुनाव कहीं न कहीं भाजपा बनाम महागठबंधन हो सकता है।
विज्ञापन

जिला योजना समिति के अध्यक्ष जनपद के प्रभारी मंत्री होते हैं, जबकि इसमें 50 से ज्यादा सदस्य होते हैं। इन सदस्यों में 28 सदस्य जहां जिला पंचायत और नगर निकायों से निर्वाचित होकर आते हैं, तो बाकी सदस्य पदेन होते हैं। पदेन सदस्यों में जनपद के सांसद, एमएलए, राज्यसभा सदस्य और एमएलसी के साथ ही तमाम विभागों के अधिकारी या उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि होते हैं। ऐसे में मेरठ में चार सांसद, सात एमएलए के साथ ही एक राज्यसभा सदस्य और एमएलसी हैं। ऐसे में समिति के पदेन सदस्यों में चार सांसद, छह एमएलए सहित कुल दस सदस्य भाजपा के हैं, जबकि विपक्ष से एक राज्यसभा सदस्य, एक एमएलए और एक एमएलसी मनोनीत सदस्य हैं। इस चुनाव के लिए 20 मार्च को नामांकन और 28 मार्च को मतदान होना है।
विज्ञापन

तब सपा की सरकार थी
जिला पंचायत से जब जिला योजना में सदस्य निर्वाचित होकर गए थे, तब प्रदेश में सपा की सरकार थी। जिसके चलते 14 में से पांच सदस्य ही भाजपा के निर्वाचित होकर आए थे और 9 सदस्य सपा और बसपा के थे। लेकिन अब प्रदेश में भाजपा की सरकार है तो भाजपा नेताओं को एक तरह से अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा। क्योंकि भाजपा की प्रतिष्ठा पूरी तरह दांव पर लगी हैं। वैसे भी नगर निकायाें से भी 14 सदस्यों का निर्वाचन जिला योजना समिति में होना है।
विज्ञापन
विज्ञापन

निकायों में भाजपा की बुरी हालत
जनपद के 16 नगर निकायों में मात्र एक नगर पंचायत परीक्षितगढ़ में ही भाजपा का कब्जा है, जहां पर भाजपा के चेयरमैन हैं। इसके अलावा एक भी नगर पंचायत, नगर पालिका और नगर निगम में भाजपा के चेयरमैन या महापौर नहीं है। बात अगर सभासदों और पार्षदों की करें तो नगर निगम में भाजपा के 36 पार्षद हैं और दो नगर पालिकाओं के करीब 75 सभासदों में भाजपा के मात्र 25 ही सभासद हैं। जबकि नगर पंचायतों में भाजपा ने सिंबल नहीं दिए थे। ऐसे में 316 मतदाताओं के आंकड़े में भाजपा के पास उनके अधिकृत 61 ही मतदाता हैं। ऐसे में 14 सदस्यों में से भाजपा कितने सदस्य अपने निर्वाचित कराने में कामयाब होगी, इस पर सबकी नजर है।

निर्दलीयों और दूसरे दलों पर रहेगी नजर
जिला योजना समिति में अपनी संख्या बढ़ाने के लिए भाजपा की नजर अब निर्दलीय सदस्यों पर रहेगी। जिसमें नगर पंचायतों के सदस्य सबसे ज्यादा अहम होंगे। इसके लिए जिला कमेटी के पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है, ताकि भाजपा अपना वर्चस्व कायम रख सके।
खास बातें:
28 मार्च को होना है जिला योजना समिति का चुनाव
सत्ता में रहने के बावजूद नगर निकायों में कमजोर स्थिति में है भाजपा
भाजपा बनाम महागठबंधन मुकाबले में भाजपा नेतृत्व की रणनीति पर नजर
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed