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वेस्ट यूपी में फिर से मंत्र फूंकने की कवायद
Updated Sat, 02 Sep 2017 01:48 AM IST
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लोकसभा चुनाव से पहले वेस्ट को फिर से बांधने का ‘मंत्र’
- कई नए सिपहसालारों के जरिए नई उर्जा का संचार करने की कवायद
- बागपत सांसद सत्यपाल सिंह को दी जा सकती है जिम्मेदारी
- जातिगत आधार पर संतुलन कायम करने की हो सकती है कोशिश
अमित मुदगल
मेरठ। मंत्रिपरिषद विस्तार के जरिए भाजपा आलाकमान फिर से उस मंत्र को फूंकने की कवायद में जुट गई, जिसके जरिए वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों में वेस्ट यूपी को बांधा जा सके। गिले शिकवे दूर किए जा सके। हालांकि इस फेरबदल में जातिगत संतुलन को कायम रखने की पूरी कोशिश करने की बात कही जा रही है।
भाजपा नए सिपहसालारों के कंधों पर अहम जिम्मेदारी सौंपने जा रही है। खास तौर से इस फेरबदल में पश्चिमी उप्र पर विशेष मंथन चल रहा है। लोकसभा चुनाव में तो वेस्ट यूपी में भाजपा का प्रदर्शन जबरदस्त रहा ही, विधानसभा चुनाव में भी भाजपा को लोगों ने जबरदस्त तरीके से वोट किया। मेरठ तथा बागपत जैसे स्थानों पर एक सीट को छोड़कर बाकी सभी पर भाजपा ने जीत का परचम लहरा दिया। यही हाल आसपास की सीटों पर भी रहा।
अब नए सिरे से विस्तार हो रहा है तो उसे लेकर वेस्ट में उथल पुथल है। बताया जा रहा है कि संजीव बालियान को मंत्रिमंडल से हटाने के बाद संगठन में अहम जिम्मेदारी देने पर विमर्श चल रहा है। उधर, बागपत सांसद सत्यपाल सिंह को मजबूत किया जा सकता है। उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। दरअसल, सत्यपाल सिंह ने चुनाव में जिस बागपत सीट के दुर्ग को भेदा, उसे रालोद का सबसे मजबूत गढ़ कहा जाता था। खुद रालोद सुप्रीमो चौधरी अजित सिंह वहां से लगातार लोकसभा की राह तय कर रहे थे। हालांकि यह बात अलग रही कि चुनाव में वह तीसरे स्थान पर पहुंच गए और भाजपा ने जीत का परचम लहरा दिया। तभी कयास लगाए जा रहे थे कि सत्यपाल सिंह को मंत्रिमंडल में अहम जगह मिलेगी पर ऐसा नहीं हो पाया। लोगाें का यह भी आंकलन था कि सत्यपाल सिंह मुंबई के कमिश्नर थे और नौकरी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। इसका पारितोषिक भी देने की बात चल रही थी।
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यदि संजीव बालियान को हटाकर उनके स्थान पर सत्यपाल सिंह को लाया गया तो भाजपा इससे जातिगत संतुलन बनाने की भी पूरी कोशिश करेगी। जाट केबदले जाट सांसद को ही जिम्मेदारी देकर यह मैसेज देने का प्रयास किया जाएगा कि पार्टी बराबर का मौका दे रही है। इसके अलावा मेरठ सांसद राजेन्द्र अग्रवाल के नाम की चर्चा चली पर इसकी उम्मीद कम ही मानी जा रही है। हालांकि वैश्य कोटे से इस नाम पर चर्चा शुरू हुई है पर पीयूष गोयल, विजय गोयल आदि कई नाम ऐसे हैं जो इस कोटे को पूरा कर रहे हैं। उधर वेस्ट में और कई जिम्मेदारियां देने पर विचार चल रहा है। चूंकि उप्र सरकार के मंत्रिमंडल में वेस्ट यूपी को पहले ही उस हिसाब से तरजीह नहीं मिल पाई। दो उप मुख्यमंत्री बने पर इससे भी वेस्ट को दूर ही रखा गया। ऐसे में माना जा रहा है कि इसकी भरपाई केन्द्र सरकार मंत्रिपरिषद विस्तार में हो सकती है। हालांकि स्पष्ट रूप से कोई भी यह कहने को तैयार नहीं कि ऊंट किस करवट बैठेगा पर यह तय माना जा रहा है कि फेरबदल की पटकथा लिखी जा चुकी है।
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- कई नए सिपहसालारों के जरिए नई उर्जा का संचार करने की कवायद
- बागपत सांसद सत्यपाल सिंह को दी जा सकती है जिम्मेदारी
- जातिगत आधार पर संतुलन कायम करने की हो सकती है कोशिश
अमित मुदगल
मेरठ। मंत्रिपरिषद विस्तार के जरिए भाजपा आलाकमान फिर से उस मंत्र को फूंकने की कवायद में जुट गई, जिसके जरिए वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों में वेस्ट यूपी को बांधा जा सके। गिले शिकवे दूर किए जा सके। हालांकि इस फेरबदल में जातिगत संतुलन को कायम रखने की पूरी कोशिश करने की बात कही जा रही है।
भाजपा नए सिपहसालारों के कंधों पर अहम जिम्मेदारी सौंपने जा रही है। खास तौर से इस फेरबदल में पश्चिमी उप्र पर विशेष मंथन चल रहा है। लोकसभा चुनाव में तो वेस्ट यूपी में भाजपा का प्रदर्शन जबरदस्त रहा ही, विधानसभा चुनाव में भी भाजपा को लोगों ने जबरदस्त तरीके से वोट किया। मेरठ तथा बागपत जैसे स्थानों पर एक सीट को छोड़कर बाकी सभी पर भाजपा ने जीत का परचम लहरा दिया। यही हाल आसपास की सीटों पर भी रहा।
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अब नए सिरे से विस्तार हो रहा है तो उसे लेकर वेस्ट में उथल पुथल है। बताया जा रहा है कि संजीव बालियान को मंत्रिमंडल से हटाने के बाद संगठन में अहम जिम्मेदारी देने पर विमर्श चल रहा है। उधर, बागपत सांसद सत्यपाल सिंह को मजबूत किया जा सकता है। उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। दरअसल, सत्यपाल सिंह ने चुनाव में जिस बागपत सीट के दुर्ग को भेदा, उसे रालोद का सबसे मजबूत गढ़ कहा जाता था। खुद रालोद सुप्रीमो चौधरी अजित सिंह वहां से लगातार लोकसभा की राह तय कर रहे थे। हालांकि यह बात अलग रही कि चुनाव में वह तीसरे स्थान पर पहुंच गए और भाजपा ने जीत का परचम लहरा दिया। तभी कयास लगाए जा रहे थे कि सत्यपाल सिंह को मंत्रिमंडल में अहम जगह मिलेगी पर ऐसा नहीं हो पाया। लोगाें का यह भी आंकलन था कि सत्यपाल सिंह मुंबई के कमिश्नर थे और नौकरी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। इसका पारितोषिक भी देने की बात चल रही थी।
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यदि संजीव बालियान को हटाकर उनके स्थान पर सत्यपाल सिंह को लाया गया तो भाजपा इससे जातिगत संतुलन बनाने की भी पूरी कोशिश करेगी। जाट केबदले जाट सांसद को ही जिम्मेदारी देकर यह मैसेज देने का प्रयास किया जाएगा कि पार्टी बराबर का मौका दे रही है। इसके अलावा मेरठ सांसद राजेन्द्र अग्रवाल के नाम की चर्चा चली पर इसकी उम्मीद कम ही मानी जा रही है। हालांकि वैश्य कोटे से इस नाम पर चर्चा शुरू हुई है पर पीयूष गोयल, विजय गोयल आदि कई नाम ऐसे हैं जो इस कोटे को पूरा कर रहे हैं। उधर वेस्ट में और कई जिम्मेदारियां देने पर विचार चल रहा है। चूंकि उप्र सरकार के मंत्रिमंडल में वेस्ट यूपी को पहले ही उस हिसाब से तरजीह नहीं मिल पाई। दो उप मुख्यमंत्री बने पर इससे भी वेस्ट को दूर ही रखा गया। ऐसे में माना जा रहा है कि इसकी भरपाई केन्द्र सरकार मंत्रिपरिषद विस्तार में हो सकती है। हालांकि स्पष्ट रूप से कोई भी यह कहने को तैयार नहीं कि ऊंट किस करवट बैठेगा पर यह तय माना जा रहा है कि फेरबदल की पटकथा लिखी जा चुकी है।