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मेरठ विवि: शैक्षिक गुणवता पर जोर-MUZAFFARNAGAR
Updated Sat, 29 Sep 2018 12:26 AM IST
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कॉलेजों में पढ़ाई का माहौल बनाने को बायोमेट्रिक की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के 66 एडेड और राजकीय कॉलेज नाममात्र को चल रहे हैं। इनमें से किसी भी कॉलेज में 75 फीसदी हाजिरी का नियम लागू नहीं हो पा रहा है। अभी तक एक भी कॉलेज की तरफ से यूनिवर्सिटी को छात्रों की हाजिरी का रिकॉर्ड नहीं भेजा गया है। इसेे लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कॉलेजों में बायोमेट्रिक मशीन से हाजिरी की तैयारी कर ली है। सभी कॉलेजों को इस संबंध में निर्देश जारी किए जा रहे हैं। साथ ही अब तक का हाजिरी का रिकॉर्ड तुरंत वेबसाइट पर अपलोड करने को कहा गया है।
चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी से संबद्ध मेरठ और सहारनपुर मंडल के नौ जिलों में 66 एडेड और राजकीय कॉलेज हैं। इन कॉलेजों में साढ़े चार लाख स्टूडेंट्स पढ़ाई करते हैं। शासनादेश है कि हर स्टूडेंट्स की हाजिरी 75 फीसदी होनी चाहिए। लेकिन किसी भी कॉलेज में इसका पालन नहीं हो रहा है। इनके अनुपस्थित होने के बावजूद भी सबको छात्रवृत्ति के लिए फार्म भरवाए जा रहे हैं। जबकि शासन से स्पष्ट है कि जिन स्टूडेंट्स की हाजिरी 75 फीसदी नहीं होगी उनको छात्रवृत्ति नहीं मिलेगी। लेकिन कॉलेजों के शिक्षक खुद का काम करने के लिए इस गड़बड़झाले को भी अंजाम देने से पीछे नहीं हट रहे हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन के संज्ञान में आया है कि कई कॉलेजों में तो शिक्षक भी हाजिरी लगाने के कुछ देर बाद ही निकल जाते हैं। कभी मैनेजमेंट या प्राचार्य चेकिंग करते हैं तो कह दिया जाता है कि स्टूडेंट्स ही नहीं हैं तो हम क्या करें। प्राचार्य भी सिर्फ नोटिस निकालने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहे हैं। मेरठ के कॉलेजों के हालात तो बहुत खराब हैं। हाल ही में मेरठ कॉलेज की प्राचार्या भी इसेे लेकर सभी विभागाध्यक्षों को पत्र लिख चुकी हैं कि हाजिरी का पूरा रिकॉर्ड कार्यालय में दें। रजिस्ट्रार ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि जो कॉलेज रिकॉर्ड नहीं देंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। इसके साथ ही कॉलेजों में बायोमेट्रिक मशीन से हाजिरी को लेकर तैयारी की जा रही है।
शिक्षक करते रहे हैं बायोमेट्रिक का विरोध
कई कॉलेजों में शिक्षकों की हाजिरी भी बायोमेट्रिक मशीन से लगवाने की बात हुई थी, लेकिन शिक्षकों ने राजनीति शुरू करते हुए इसका विरोध कर दिया था। शिक्षकों का तर्क था कि वे पढ़े लिखे होकर अंगूठा क्यों लगाएंगे। ये भी तब है जबकि प्रधानमंत्री डिजीटल इंडिया का सपना लेकर चल रहे हैं। एक शिक्षक बताते हैं कि जब सरकार डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों को 50 हजार से लेकर डेढ़ लाख रुपये महीना तक सैलरी दे रही है तो फिर उनकी कॉलेज में उपस्थिति को लेकर संज्ञान क्यों नहीं लिया जा रहा है। ऐसे ही रहा तो स्टूडेंट्स क्यों आएंगे।
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शिक्षकों को होगा ट्रांसफर
कॉलेजों में हाजिरी पूरी न होने के लिए कॉलेजों को पत्र लिखा जा चुका है। जो कॉलेज छात्रों की उपस्थिति पूरी नहीं करा पा रहे हैं वहां के शिक्षकों को ऐसे कॉलेजों में ट्रांसफर करने की योजना है जहां छात्र आते हैं। इसके अलावा कई राजकीय कॉलेजों में कुछ विषयों में शिक्षक ज्यादा हैं, लेकिन छात्र कम। ऐसे में इन शिक्षकों को दूसरे कॉलेजों में स्थानांतरित किया जाएगा। इसको लेकर शुक्रवार को उच्च शिक्षा निदेशक इलाहाबाद को पत्र लिखा गया है। -राजीव गुप्ता, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी मेरठ।
महत्वपूर्ण
- एक भी कॉलेज ने नहीं भेजा आज तक हाजिरी का रिकॉर्ड
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अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के 66 एडेड और राजकीय कॉलेज नाममात्र को चल रहे हैं। इनमें से किसी भी कॉलेज में 75 फीसदी हाजिरी का नियम लागू नहीं हो पा रहा है। अभी तक एक भी कॉलेज की तरफ से यूनिवर्सिटी को छात्रों की हाजिरी का रिकॉर्ड नहीं भेजा गया है। इसेे लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कॉलेजों में बायोमेट्रिक मशीन से हाजिरी की तैयारी कर ली है। सभी कॉलेजों को इस संबंध में निर्देश जारी किए जा रहे हैं। साथ ही अब तक का हाजिरी का रिकॉर्ड तुरंत वेबसाइट पर अपलोड करने को कहा गया है।
चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी से संबद्ध मेरठ और सहारनपुर मंडल के नौ जिलों में 66 एडेड और राजकीय कॉलेज हैं। इन कॉलेजों में साढ़े चार लाख स्टूडेंट्स पढ़ाई करते हैं। शासनादेश है कि हर स्टूडेंट्स की हाजिरी 75 फीसदी होनी चाहिए। लेकिन किसी भी कॉलेज में इसका पालन नहीं हो रहा है। इनके अनुपस्थित होने के बावजूद भी सबको छात्रवृत्ति के लिए फार्म भरवाए जा रहे हैं। जबकि शासन से स्पष्ट है कि जिन स्टूडेंट्स की हाजिरी 75 फीसदी नहीं होगी उनको छात्रवृत्ति नहीं मिलेगी। लेकिन कॉलेजों के शिक्षक खुद का काम करने के लिए इस गड़बड़झाले को भी अंजाम देने से पीछे नहीं हट रहे हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन के संज्ञान में आया है कि कई कॉलेजों में तो शिक्षक भी हाजिरी लगाने के कुछ देर बाद ही निकल जाते हैं। कभी मैनेजमेंट या प्राचार्य चेकिंग करते हैं तो कह दिया जाता है कि स्टूडेंट्स ही नहीं हैं तो हम क्या करें। प्राचार्य भी सिर्फ नोटिस निकालने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहे हैं। मेरठ के कॉलेजों के हालात तो बहुत खराब हैं। हाल ही में मेरठ कॉलेज की प्राचार्या भी इसेे लेकर सभी विभागाध्यक्षों को पत्र लिख चुकी हैं कि हाजिरी का पूरा रिकॉर्ड कार्यालय में दें। रजिस्ट्रार ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि जो कॉलेज रिकॉर्ड नहीं देंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। इसके साथ ही कॉलेजों में बायोमेट्रिक मशीन से हाजिरी को लेकर तैयारी की जा रही है।
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शिक्षक करते रहे हैं बायोमेट्रिक का विरोध
कई कॉलेजों में शिक्षकों की हाजिरी भी बायोमेट्रिक मशीन से लगवाने की बात हुई थी, लेकिन शिक्षकों ने राजनीति शुरू करते हुए इसका विरोध कर दिया था। शिक्षकों का तर्क था कि वे पढ़े लिखे होकर अंगूठा क्यों लगाएंगे। ये भी तब है जबकि प्रधानमंत्री डिजीटल इंडिया का सपना लेकर चल रहे हैं। एक शिक्षक बताते हैं कि जब सरकार डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों को 50 हजार से लेकर डेढ़ लाख रुपये महीना तक सैलरी दे रही है तो फिर उनकी कॉलेज में उपस्थिति को लेकर संज्ञान क्यों नहीं लिया जा रहा है। ऐसे ही रहा तो स्टूडेंट्स क्यों आएंगे।
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शिक्षकों को होगा ट्रांसफर
कॉलेजों में हाजिरी पूरी न होने के लिए कॉलेजों को पत्र लिखा जा चुका है। जो कॉलेज छात्रों की उपस्थिति पूरी नहीं करा पा रहे हैं वहां के शिक्षकों को ऐसे कॉलेजों में ट्रांसफर करने की योजना है जहां छात्र आते हैं। इसके अलावा कई राजकीय कॉलेजों में कुछ विषयों में शिक्षक ज्यादा हैं, लेकिन छात्र कम। ऐसे में इन शिक्षकों को दूसरे कॉलेजों में स्थानांतरित किया जाएगा। इसको लेकर शुक्रवार को उच्च शिक्षा निदेशक इलाहाबाद को पत्र लिखा गया है। -राजीव गुप्ता, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी मेरठ।
महत्वपूर्ण
- एक भी कॉलेज ने नहीं भेजा आज तक हाजिरी का रिकॉर्ड