{"_id":"5ce30b6cbdec22075a3bdb9d","slug":"155838352113-meerut-news101","type":"story","status":"publish","title_hn":"भगवान ऋषभदेव के मस्तक पर अभिषेक किया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भगवान ऋषभदेव के मस्तक पर अभिषेक किया
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भगवान ऋषभदेव के मस्तक पर अभिषेक किया
मवाना। हस्तिनापुर जम्बूद्वीप स्थल पर तीन मूर्ति मंदिर स्थित भगवान ऋषभदेव-भरत-बाहुबली की प्रतिमा पर विराजमान पूज्य माताजी की संघस्थ ब्रह्मचारिणी बहन बीना द्वारा भगवान ऋषभदेव के मस्तक पर यह अभिषेक संपन्न किया गया।
इसके पश्चात शांतिधारा करने का सौभाग्य संस्थान के मंत्री विजय कुमार जैन को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर सुभाष चंद जैन साहू ने पाठ का वाचन किया। भक्तिभाव पूर्वक सभी ने मिलकर भगवान के मस्तक पर पंचामृत महाभिषेक एवं ज्येष्ठजिनवर अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न की। इस अवसर पर क्षुल्लक प्रशांत सागर एवं क्षुल्लिका पुण्यमती माताजी ने पावन सानिध्य प्रदान किया।
ब्रह्मचारिणी बीना बहन जी ने बताया कि 35 वर्षों से वह माताजी के संघ में रहती हैं। प्रत्येक वर्ष एक माह तक यह अभिषेक भगवान के मस्तक पर किया जाता है। प्राचीन ग्रंथ आदिपुराण में भी इस अभिषेक का उल्लेख प्राप्त होता है। आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज से लेकर के अब तक के सभी आचार्यों की संघ परम्परा में यह अभिषेक होता है। आज भी सारे देश के अंदर यह परंपरा दिगंबर जैन समाज के अंदर मनाई जाती है। इसके साथ तेरहद्वीप जिनालय एवं अष्टापद मंदिर में भी ज्येष्ठ जिनवर अभिषेक संपन्न किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
मवाना। हस्तिनापुर जम्बूद्वीप स्थल पर तीन मूर्ति मंदिर स्थित भगवान ऋषभदेव-भरत-बाहुबली की प्रतिमा पर विराजमान पूज्य माताजी की संघस्थ ब्रह्मचारिणी बहन बीना द्वारा भगवान ऋषभदेव के मस्तक पर यह अभिषेक संपन्न किया गया।
इसके पश्चात शांतिधारा करने का सौभाग्य संस्थान के मंत्री विजय कुमार जैन को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर सुभाष चंद जैन साहू ने पाठ का वाचन किया। भक्तिभाव पूर्वक सभी ने मिलकर भगवान के मस्तक पर पंचामृत महाभिषेक एवं ज्येष्ठजिनवर अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न की। इस अवसर पर क्षुल्लक प्रशांत सागर एवं क्षुल्लिका पुण्यमती माताजी ने पावन सानिध्य प्रदान किया।
विज्ञापन
ब्रह्मचारिणी बीना बहन जी ने बताया कि 35 वर्षों से वह माताजी के संघ में रहती हैं। प्रत्येक वर्ष एक माह तक यह अभिषेक भगवान के मस्तक पर किया जाता है। प्राचीन ग्रंथ आदिपुराण में भी इस अभिषेक का उल्लेख प्राप्त होता है। आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज से लेकर के अब तक के सभी आचार्यों की संघ परम्परा में यह अभिषेक होता है। आज भी सारे देश के अंदर यह परंपरा दिगंबर जैन समाज के अंदर मनाई जाती है। इसके साथ तेरहद्वीप जिनालय एवं अष्टापद मंदिर में भी ज्येष्ठ जिनवर अभिषेक संपन्न किया गया।
विज्ञापन