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मॉक ड्रिल: आर्मी स्कूल के बच्चों से सीखें बचाव करना
Updated Fri, 26 Jan 2018 02:37 AM IST
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मेरठ। बृहस्पतिवार सुबह 11 बजे का समय। आर्मी पब्लिक स्कूल कैंट की प्रिंसिपल डॉ. रीटा गुप्ता अपने ऑफिस में बैठी थीं। उनके ऑफिस में बने कंट्रोल पैनल पर अचानक खतरे की घंटी बजी। आतंकी हमले का यह संकेत कक्षा-छह के एफ सेक्शन से आया था। प्रिंसिपल ने बिना देरी किए सेना और कंट्रोल रूम को सूचना दे दी। पूरे स्कूल में खतरे का अलार्म बजते ही तीन मिनट के भीतर सभी बच्चों ने खुद को सेफ कर लिया। कुछ ही देर में सेना के जवानों ने स्कूल पहुंचकर मोर्चा संभालकर स्कूल में घुसे तीनों आतंकी दबोच लिए। बच्चों को पता चला कि ये सेना का मॉकड्रिल था, तो तालियां बजने लगीं। सेना के जवानों ने अलार्म बजते ही बच्चों द्वारा दिखाई गई स्मार्टनेस पर उनकी तारीफ की।
गणतंत्र दिवस को लेकर देश के सभी छावनी इलाकों में खास सतर्कता बरती जा रही है। सेना की तरफ से जगह-जगह मॉकड्रिल किया जा रहा है। बृहस्पतिवार को सेना ने मॉकड्रिल के लिए आर्मी पब्लिक स्कूल को चुना। मॉकड्रिल में तीन जवानों को स्कूल में पहुंचकर ऐसा दर्शाना था कि वे संदिग्ध हैं और स्कूल को कब्जे में ले रहे हैं। संदिग्ध के रूप में जवान कक्षा छह के एफ सेक्शन में घुस गए। अचानक संदिग्ध लोगों के कक्षा में पहुंचते ही क्लास टीचर ने बिना कोई देरी किए खतरे का अलार्म बटन दबा दिया। बटन दबते ही प्रिंसिपल के ऑफिस में लगे कंट्रोल पैनल पर आतंकी हमले वाला अलार्म बजने लगा। उनकी सूचना पर कुछ ही देर में सेना के अफसर और जवानों ने स्कूल की घेराबंदी कर ली। सेना के डॉग्स पहुंच गए। ड्रोन को उड़ाकर स्कूल के चप्पे-चप्पे को खंगाला जाने लगा। सेना के जवानों ने बेहतर प्लानिंग के चलते तीनों संदिग्ध युवकों को दबोच लिया। मॉकड्रिल में जीओसी मेजर जनरल के. मनमीत सिंह, डिप्टी जीओसी सुशील मान समेत कई अफसर पहुंचे।
ट्रेनिंग से बच्चे बने ऐसे बने आत्मविश्वासी
आर्मी स्कूल साल में तीन बार मॉकड्रिल करता है। मॉकड्रिल की तीन श्रेणियां हैं। अगर आग लग जाती है तो उसके लिए क्या करें। भूकंप आ जाए तो कैसे खुद को बचाना है और अगर आतंकी स्कूल में घुस आएं तो कैसे सुरक्षित रहें। तीनों ही श्रेणियों का अलग अलार्म है। आतंकी हमले के दौरान बच्चों को बताया जाता है कि अगर वो बाहर हैं तो करीब की किसी भी सुरक्षित जगह पर छिप जाएं। जो कमरे में हैं, वे तुरंत खिड़की और दरवाजे बंद करके जमीन पर लेट जाएं। स्कूल की प्राइमरी विंग के बच्चों को बताया जाता है कि अगर ऐसा हो तो दूसरी तरफ भागकर ब्लॉक्स में छिप जाएं। आर्मी स्कूल की इस ट्रेनिंग के चलते अलार्म बजने के तीन मिनट के भीतर ही बच्चों ने खुद को कमरों में बंद कर लिया। जो बच्चे 26 जनवरी के कार्यक्रम की तैयारी कर रहे थे, वे भी तुरंत कमरों में छिप गए। प्राइमरी विंग के बच्चों ने ब्लॉक्स में शरण ले ली। बच्चों में गजब का आत्मविश्वास दिखा।
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हमें पता था क्या करना है
जिस कक्षा में संदिग्ध घुसे थे, वहां के बच्चों ने बताया कि ऐसी स्थिति आने पर उन्हें क्या करना है, इसकी जानकारी थी। ऐसे में कोई हड़बड़ाहट नहीं हुई। कुछ पल के लिए थोड़ा डर लगा। लेकिन जब उन्हें पता चला कि सेना आ गई है तो वे बेफिक्र हो गए।
दूसरे स्कूल भी लें सीख
अमूमन आग लगने या भूकंप आने पर सबसे ज्यादा नुकसान हड़बड़ाहट में होता है। कुछ लोग भूकंप आते ही बिल्डिंग से कूद जाते हैं। आग लगने पर भी ऐसा ही हो जाता है। लेकिन जहां पर इस सबको लेकर मॉकड्रिल के जरिए ट्रेनिंग दी जाती है, वहां पर नुकसान कम होता है। हिम्मत और दिमाग से सोचें तो काफी हद तक जानें बचाई जा सकती हैं। आर्मी स्कूल अपने बच्चों को इस सबके लिए ट्रेंड करता है। जिससे बच्चों को पता होता है कि इमरजेंसी में क्या करें। ऐसे में आर्मी स्कूल की ये पहल बेहद सराहनीय है। दूसरे स्कूलों में भी अगर बच्चों को समय-समय पर इस तरह से मॉकड्रिल कराकर ट्रेंड किया जाए तो वे भविष्य में समाज को बहुत योगदान देंगे। सेना के अफसर भी चाहते हैं कि स्कूलों में ऐसी गतिविधियां बढ़ें।
बीआई लाइंस और आरवीसी में भी हुई मॉकड्रिल
बृहस्पतिवार को ही सेना ने बीआई लाइंस के आवासीय इलाके और आरवीसी में भी मॉकड्रिल किया। यहां पर भी सेना के जवानों ने संदिग्धों को प्रतीकात्मक रूप से ढेर कर दिया।
मॉक ड्रिल की खास बातें:
- आर्मी स्कूल में इमरजेंसी अलार्म बजते ही बच्चों ने तीन मिनट में खुद को किया सेफ
- सेना के जवानों ने घेराबंदी कर तीनों संदिग्ध आतंकी किए काबू
- सेना के जवानों का कहना, आर्मी स्कूल के बच्चों से सीखें आतंकियों से बचाव करना
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गणतंत्र दिवस को लेकर देश के सभी छावनी इलाकों में खास सतर्कता बरती जा रही है। सेना की तरफ से जगह-जगह मॉकड्रिल किया जा रहा है। बृहस्पतिवार को सेना ने मॉकड्रिल के लिए आर्मी पब्लिक स्कूल को चुना। मॉकड्रिल में तीन जवानों को स्कूल में पहुंचकर ऐसा दर्शाना था कि वे संदिग्ध हैं और स्कूल को कब्जे में ले रहे हैं। संदिग्ध के रूप में जवान कक्षा छह के एफ सेक्शन में घुस गए। अचानक संदिग्ध लोगों के कक्षा में पहुंचते ही क्लास टीचर ने बिना कोई देरी किए खतरे का अलार्म बटन दबा दिया। बटन दबते ही प्रिंसिपल के ऑफिस में लगे कंट्रोल पैनल पर आतंकी हमले वाला अलार्म बजने लगा। उनकी सूचना पर कुछ ही देर में सेना के अफसर और जवानों ने स्कूल की घेराबंदी कर ली। सेना के डॉग्स पहुंच गए। ड्रोन को उड़ाकर स्कूल के चप्पे-चप्पे को खंगाला जाने लगा। सेना के जवानों ने बेहतर प्लानिंग के चलते तीनों संदिग्ध युवकों को दबोच लिया। मॉकड्रिल में जीओसी मेजर जनरल के. मनमीत सिंह, डिप्टी जीओसी सुशील मान समेत कई अफसर पहुंचे।
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ट्रेनिंग से बच्चे बने ऐसे बने आत्मविश्वासी
आर्मी स्कूल साल में तीन बार मॉकड्रिल करता है। मॉकड्रिल की तीन श्रेणियां हैं। अगर आग लग जाती है तो उसके लिए क्या करें। भूकंप आ जाए तो कैसे खुद को बचाना है और अगर आतंकी स्कूल में घुस आएं तो कैसे सुरक्षित रहें। तीनों ही श्रेणियों का अलग अलार्म है। आतंकी हमले के दौरान बच्चों को बताया जाता है कि अगर वो बाहर हैं तो करीब की किसी भी सुरक्षित जगह पर छिप जाएं। जो कमरे में हैं, वे तुरंत खिड़की और दरवाजे बंद करके जमीन पर लेट जाएं। स्कूल की प्राइमरी विंग के बच्चों को बताया जाता है कि अगर ऐसा हो तो दूसरी तरफ भागकर ब्लॉक्स में छिप जाएं। आर्मी स्कूल की इस ट्रेनिंग के चलते अलार्म बजने के तीन मिनट के भीतर ही बच्चों ने खुद को कमरों में बंद कर लिया। जो बच्चे 26 जनवरी के कार्यक्रम की तैयारी कर रहे थे, वे भी तुरंत कमरों में छिप गए। प्राइमरी विंग के बच्चों ने ब्लॉक्स में शरण ले ली। बच्चों में गजब का आत्मविश्वास दिखा।
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हमें पता था क्या करना है
जिस कक्षा में संदिग्ध घुसे थे, वहां के बच्चों ने बताया कि ऐसी स्थिति आने पर उन्हें क्या करना है, इसकी जानकारी थी। ऐसे में कोई हड़बड़ाहट नहीं हुई। कुछ पल के लिए थोड़ा डर लगा। लेकिन जब उन्हें पता चला कि सेना आ गई है तो वे बेफिक्र हो गए।
दूसरे स्कूल भी लें सीख
अमूमन आग लगने या भूकंप आने पर सबसे ज्यादा नुकसान हड़बड़ाहट में होता है। कुछ लोग भूकंप आते ही बिल्डिंग से कूद जाते हैं। आग लगने पर भी ऐसा ही हो जाता है। लेकिन जहां पर इस सबको लेकर मॉकड्रिल के जरिए ट्रेनिंग दी जाती है, वहां पर नुकसान कम होता है। हिम्मत और दिमाग से सोचें तो काफी हद तक जानें बचाई जा सकती हैं। आर्मी स्कूल अपने बच्चों को इस सबके लिए ट्रेंड करता है। जिससे बच्चों को पता होता है कि इमरजेंसी में क्या करें। ऐसे में आर्मी स्कूल की ये पहल बेहद सराहनीय है। दूसरे स्कूलों में भी अगर बच्चों को समय-समय पर इस तरह से मॉकड्रिल कराकर ट्रेंड किया जाए तो वे भविष्य में समाज को बहुत योगदान देंगे। सेना के अफसर भी चाहते हैं कि स्कूलों में ऐसी गतिविधियां बढ़ें।
बीआई लाइंस और आरवीसी में भी हुई मॉकड्रिल
बृहस्पतिवार को ही सेना ने बीआई लाइंस के आवासीय इलाके और आरवीसी में भी मॉकड्रिल किया। यहां पर भी सेना के जवानों ने संदिग्धों को प्रतीकात्मक रूप से ढेर कर दिया।
मॉक ड्रिल की खास बातें:
- आर्मी स्कूल में इमरजेंसी अलार्म बजते ही बच्चों ने तीन मिनट में खुद को किया सेफ
- सेना के जवानों ने घेराबंदी कर तीनों संदिग्ध आतंकी किए काबू
- सेना के जवानों का कहना, आर्मी स्कूल के बच्चों से सीखें आतंकियों से बचाव करना