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चार चरणों में पूरा होगा मेरठ-पानीपत रेल लाइन सर्वे
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चार महीने बाद तय होंगे मेरठ-पानीपत रेलवे लाइन के स्टेशन
- अभी 34 किमी के हिस्से में सर्वे कार्य शुरू
- सर्वे कार्य के लिए साढ़े आठ लाख रुपये स्वीकृत
दीपक भारद्वाज
मेरठ। वर्षों से चल रही मेरठ-पानीपत रेलवे लाइन की मांग के लिए रेलवे की ओर से तेजी से कार्य शुरू कर दिया गया है। हाल ही में बजट में सर्वे कार्य के लिए साढ़े आठ लाख रुपये दिए गए हैं। जिससे 104 किमी लंबी इस रेल लाइन के लिए 34 किलोमीटर के हिस्से पर सर्वे कार्य शुरू कर दिया गया है। हाल ही में छह फरवरी को बागपत के टीकरी में रेलवे अधिकारियों की टीम ने पहुंचकर स्थानीय सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह को इस बारे में विस्तार से जानकारी दी।
एलम से मुल्हैड़ा के बीच किए जाने वाले इस सर्वे कार्य में अभी चार महीने का समय लगेगा। इसके बाद ही स्टेशन और रेलवे लाइन एलाइनमेंट की स्थिति का पता चल सकेगा। मेरठ में दौराला के पास से पानीपत तक रेलवे लाइन का निर्माण कार्य होना है लेकिन दौराला से आगे रूट पर रेलवे अधिकारी कुछ भी बोलने से इंकार कर रहे हैं। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि अभी प्राथमिक प्रक्रिया को शुरू कर दिया गया है।
नक्शा बनाया गया, कहेंगे टोही सर्वे
सर्वे करने से पहले आंकलन के आधार पर नक्शा बनाया जाता है। इस सर्वे को टोही सर्वे कहा जाता है। टोही सर्वे में नक्शे को साथ लेकर वेरिफाई किया जाता है। इसके बाद स्टेशन तय किए जाते हैं। हालांकि, इस सर्वे को पूरा होने में छह महीने लगते हैं लेकिन रेलवे की तरफ से चार महीने में पूरा करने के दावे किए जा रहे हैं।
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चार चरणों में होती है समीक्षा
सर्वे के बाद भी इसकी चार चरणों में समीक्षा की जाती है। चार चरणों में जूनियर इंजीनियर, सेक्शन इंजीनियर, डिविजन इंजीनियर और इसके बाद उपकरणों से इसकी समीक्षा की जाती है। उपकरणों के द्वारा ही रेलवे लाइन की लाइनिंग और लेवल देखा जाता है।
अभी कुछ फाइनल नहीं है
अभी 34 किमी के हिस्से में सर्वे शुरू हुआ है। हालांकि पहले दौराला से ऐलम तक सर्वे किया जा चुका है। लेकिन अभी कुछ भी फाइनल नहीं है। चार महीने बाद ही इसका पता चल सकेगा। - देशरत्न गुप्ता, चीफ इंजीनियर, रेलवे
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- अभी 34 किमी के हिस्से में सर्वे कार्य शुरू
- सर्वे कार्य के लिए साढ़े आठ लाख रुपये स्वीकृत
दीपक भारद्वाज
मेरठ। वर्षों से चल रही मेरठ-पानीपत रेलवे लाइन की मांग के लिए रेलवे की ओर से तेजी से कार्य शुरू कर दिया गया है। हाल ही में बजट में सर्वे कार्य के लिए साढ़े आठ लाख रुपये दिए गए हैं। जिससे 104 किमी लंबी इस रेल लाइन के लिए 34 किलोमीटर के हिस्से पर सर्वे कार्य शुरू कर दिया गया है। हाल ही में छह फरवरी को बागपत के टीकरी में रेलवे अधिकारियों की टीम ने पहुंचकर स्थानीय सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह को इस बारे में विस्तार से जानकारी दी।
एलम से मुल्हैड़ा के बीच किए जाने वाले इस सर्वे कार्य में अभी चार महीने का समय लगेगा। इसके बाद ही स्टेशन और रेलवे लाइन एलाइनमेंट की स्थिति का पता चल सकेगा। मेरठ में दौराला के पास से पानीपत तक रेलवे लाइन का निर्माण कार्य होना है लेकिन दौराला से आगे रूट पर रेलवे अधिकारी कुछ भी बोलने से इंकार कर रहे हैं। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि अभी प्राथमिक प्रक्रिया को शुरू कर दिया गया है।
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नक्शा बनाया गया, कहेंगे टोही सर्वे
सर्वे करने से पहले आंकलन के आधार पर नक्शा बनाया जाता है। इस सर्वे को टोही सर्वे कहा जाता है। टोही सर्वे में नक्शे को साथ लेकर वेरिफाई किया जाता है। इसके बाद स्टेशन तय किए जाते हैं। हालांकि, इस सर्वे को पूरा होने में छह महीने लगते हैं लेकिन रेलवे की तरफ से चार महीने में पूरा करने के दावे किए जा रहे हैं।
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चार चरणों में होती है समीक्षा
सर्वे के बाद भी इसकी चार चरणों में समीक्षा की जाती है। चार चरणों में जूनियर इंजीनियर, सेक्शन इंजीनियर, डिविजन इंजीनियर और इसके बाद उपकरणों से इसकी समीक्षा की जाती है। उपकरणों के द्वारा ही रेलवे लाइन की लाइनिंग और लेवल देखा जाता है।
अभी कुछ फाइनल नहीं है
अभी 34 किमी के हिस्से में सर्वे शुरू हुआ है। हालांकि पहले दौराला से ऐलम तक सर्वे किया जा चुका है। लेकिन अभी कुछ भी फाइनल नहीं है। चार महीने बाद ही इसका पता चल सकेगा। - देशरत्न गुप्ता, चीफ इंजीनियर, रेलवे