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Mathura News: चैमेट एप बंद होने पर एपीके फाइल से करते थे खेल
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मथुरा। चीनी एप चैमेट के जरिये करोड़ों रुपये की अवैध कमाई करने वाले तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ अब पूरे नेटवर्क की कुंडली खंगाल रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि चैमेट एप बंद होने के बाद आरोपी एपीके फाइल के जरिये लोगों को जाल में फंसाते थे। हालांकि बाद में नए नाम से यह एप शुरू हो गया।
अधिकारियों के अनुसार, गूगल ने अगस्त 2023 में यूजर जनरेटेड कंटेंट (यूजीसी) नीति के उल्लंघन के चलते चैमेट को प्ले स्टोर से हटा दिया था। यह गूगल की प्लेटफॉर्म संबंधी कार्रवाई थी, लेकिन भारत सरकार की ओर से एप पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया था। प्ले स्टोर से हटने के बाद आरोपियों ने एप पर पहुंच बनाए रखने के लिए एपीके फाइल भेजने का तरीका अपनाया। इससे लोगों को जोड़कर अवैध कमाई का सिलसिला जारी रखा। इसके बाद इस एप को चिलचैट के नाम से गूगल प्ले-स्टोर पर लॉन्च किया गया। चार साल तक आरोपियों ने इस एप से करोड़ों रुपये की कमाई की है।
एसटीएफ को प्रवीन के बैंक खाते से 10 लाख रुपये मिले हैं। एसटीएफ इस रकम की जांच कर रही है कि यहां कहां से खाते में डाली गई है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क से कितने लोग जुड़े हुए हैं, एप के माध्यम से कितनी कमाई हुई और रकम किन-किन खातों में पहुंचाई गई। इसके साथ ही नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। वहीं एसटीएफ आरोपी सोनिया और आलिया की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
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ऐसे करते खेल
पुलिस ने रविवार सुबह मोतीकुंज के निकट से गांव सिहोरा निवासी मास्टरमाइंड प्रवीन उर्फ प्रकाश, लक्ष्मीनगर के प्रीती बिहारी कॉलोनी निवासी विपिन, धौलीप्याऊ के मालीपाड़ा निवासी अर्जुन दिवाकर को गिरफ्तार किया था। आरोपी युवतियों को नौकरी पर रखकर चीनी एप चैमेट से चैटिंग, वीडियो कॉलिंग कराते थे। युवतियों से बात करते समय यूजर कॉइन गिफ्ट करते थे, जिनमें 50 प्रतिशत कॉइन होस्ट और 50 प्रतिशत एप कंपनी को मिलता था। कंपनी इन आरोपियों को कमीशन के तौर पर रकम इनके खाते में भिजवाती थी।
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अधिकारियों के अनुसार, गूगल ने अगस्त 2023 में यूजर जनरेटेड कंटेंट (यूजीसी) नीति के उल्लंघन के चलते चैमेट को प्ले स्टोर से हटा दिया था। यह गूगल की प्लेटफॉर्म संबंधी कार्रवाई थी, लेकिन भारत सरकार की ओर से एप पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया था। प्ले स्टोर से हटने के बाद आरोपियों ने एप पर पहुंच बनाए रखने के लिए एपीके फाइल भेजने का तरीका अपनाया। इससे लोगों को जोड़कर अवैध कमाई का सिलसिला जारी रखा। इसके बाद इस एप को चिलचैट के नाम से गूगल प्ले-स्टोर पर लॉन्च किया गया। चार साल तक आरोपियों ने इस एप से करोड़ों रुपये की कमाई की है।
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एसटीएफ को प्रवीन के बैंक खाते से 10 लाख रुपये मिले हैं। एसटीएफ इस रकम की जांच कर रही है कि यहां कहां से खाते में डाली गई है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क से कितने लोग जुड़े हुए हैं, एप के माध्यम से कितनी कमाई हुई और रकम किन-किन खातों में पहुंचाई गई। इसके साथ ही नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। वहीं एसटीएफ आरोपी सोनिया और आलिया की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
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ऐसे करते खेल
पुलिस ने रविवार सुबह मोतीकुंज के निकट से गांव सिहोरा निवासी मास्टरमाइंड प्रवीन उर्फ प्रकाश, लक्ष्मीनगर के प्रीती बिहारी कॉलोनी निवासी विपिन, धौलीप्याऊ के मालीपाड़ा निवासी अर्जुन दिवाकर को गिरफ्तार किया था। आरोपी युवतियों को नौकरी पर रखकर चीनी एप चैमेट से चैटिंग, वीडियो कॉलिंग कराते थे। युवतियों से बात करते समय यूजर कॉइन गिफ्ट करते थे, जिनमें 50 प्रतिशत कॉइन होस्ट और 50 प्रतिशत एप कंपनी को मिलता था। कंपनी इन आरोपियों को कमीशन के तौर पर रकम इनके खाते में भिजवाती थी।