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Bhai Dooj 2025: अकाल मृत्यु नहीं होगी...भाई दूज पर यमुना स्नान का महत्व, यमराज ने अपनी बहन को दिया था वरदान

Wed, 22 Oct 2025 08:40 AM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Wed, 22 Oct 2025 08:40 AM IST
सार

 यमुना में भाई दूज पर यम द्वितीया का स्नान होगा। बहनें यम की फांस से मुक्ति दिलाने के लिए भाई के साथ स्नान करके दीर्घायु की कामना करती हैंं। इसके लिए यमुना के घाटों की सफाई समुचित ढंग से नहीं हो सकी है।

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Special Belief On Bhai Dooj Gives Salvation From Untimely Death
यम द्वितीया पर यमुना स्नान - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

मथुरा के विश्राम घाट पर यम द्वितीया के स्नान का खासा महत्व है। इस घाट पर भाई दूज वाले दिन बहनें अपने भाई के साथ स्नान करके उनकी दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं। भारतवर्ष में भाई-बहन का एकमात्र मंदिर स्थित है। स्नान करने के बाद भाई-बहन इस मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं। यम द्वितीया के स्नान के लिए विश्राम घाट पर अभी तैयारी पूरी नहीं हुई हैं। बाढ़ के पानी के बाद दलदल को अभी तक नहीं साफ किया जा सका है। इससे पुजारियों में नाराजगी है।
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माथुर चतुर्वेदी परिषद के महामंत्री राकेश तिवारी एडवोकेट का कहना है कि प्रशासन को अवगत कराने के बाद भी अभी तक विश्राम घाट पर यम द्वितीया स्नान के लिए बेहतर साफ सफाई नहीं कराई गई है। यहां हजारों की संख्या में भाई बहन स्नान करने के लिए पहुंचेंगे। बेरीकेडिंग आदि भी नहीं हो सकी है। उनका कहना है कि यम द्वितीया के स्नान के लिए प्रशासन पूर्व में काफी समय पहले ही तैयारी करता था। इस बार नगर निगम ने कोई तैयारी नहीं की है।
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भाई-बहन हाथ पकड़कर लगाते हैं यमुना में डुबकी
भाई-बहन के अटूट प्रेम का त्योहार भैयादूज देश भर में मनाया जाएगा, मथुरा में इसकी अलग ही मान्यता है। यहां इस दिन यम की फांस से मुक्ति की कामना लेकर भाई-बहन यमुना में डुबकी लगाते हैं। इसके बाद यमुना पूजन कर भाई-बहन विश्रामघाट पर धर्मराज और उनकी बहन यमुना का पूजन करते हैं।

 
 
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मथुरा में है भाई धर्मराज के साथ बहन यमुनाजी का मंदिर
 यमुना तट पुण्य विश्राम घाट पर भगवान श्रीकृष्ण की पटरानी यमुना महारानी एवं उनके भाई धर्मराज का प्राचीन मंदिर है। मंदिर के सेवायत के अनुसार यह विश्व का एकमात्र मंदिर है, जहां यमराज (धर्मराज) और उनकी बहन यमुनाजी एकसाथ विराजमान हैं। उन्होंने बताया कि यमुना महारानी का यह प्रथम घर है। यमुनाजी के घर जब उनके भाई यमराज आए तो उनका बहन ने सत्कार किया। जब यमराज जाने लगे तो बहन यमुनाजी ने उनका टीका किया। यमराज ने प्रसन्न होकर बहन से वरदान मांगने को कहा। इस पर यमुनाजी ने भाई से भक्तों के कल्याण के लिए वरदान मांगा कि भाईदूज के दिन मथुरा के विश्राम घाट पर यमुना में स्नान कर पूजन करेगा और उनके मंदिर में आकर पूजन कर आशीर्वाद लेकर वह यमलोक न जाकर बैकुंठ लोक जाए।
 
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इस पर यमराज ने बहन को यह वरदान दिया। तभी से बहन यमुना के यहां आए यमराज को धर्मराज कहा जाता है। मंदिर के सेवायत रामकुमार ने बताया कि मंदिर में यमुना महारानी के चार भुजा हैं। इनमें एक हस्त में कमल, दूसरे भाई के लिए टीका, तीसरे हाथ में भोजन की थाली और चौथे हाथ में वह संकल्प ले रही हैं। यमुना के बराबर में विराजित धर्मराज के एक हाथ में दंड और दूसरे हाथ में यमुना महारानी को संकल्प दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि यमुना स्नान के बाद भाई बहन इनका दर्शन करते हैं। यमुना जी को वस्त्र, शृंगार सामग्री और धर्मराज को काला वस्त्र अर्पित करते हैं। 
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