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साड़ी के कारखाने बंद, चांदी का कारोबार थमा

Thu, 24 Nov 2016 11:57 PM IST
अजय खंडेलवाल
अजय खंडेलवाल Updated Thu, 24 Nov 2016 11:57 PM IST
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sari bussiness stopped in mathura
साड़ी के कारखाने बंद - फोटो : अमर उजाला
चांदी की बड़ी मंडियों में शुमार मथुरा में बनने वाली पायल विदेशों तक में अपनी पहचान रखती है। लेकिन नोटबंदी ने इस कारोबार की कमर तोड़ दी है। ऑर्डर बंद हो गए हैं। बाजार में मांग न होने के कारण पायल के कारखाने भी खामोश हो गए। करीब 50 करोड़ का नुकसान माना जा रहा है। साड़ियों की 50 फैक्ट्रियों पर ताले लग चुके हैं। कारीगर तो गुजर बसर भी नहीं कर पा रहे हैं। साड़ी कारोबार को 45 करोड़ का नुकसान है।
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कारखानों में ठप है साड़ी छपाई, 5000 बेरोजगार
मथुरा में करीब 50 साड़ी के कारखाने हैं। इनमें करीब दो लाख साड़ियों पर प्रतिदिन छपाई होती थी। जो उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के जिलों में सप्लाई की जाती हैं। नोटबंदी के बाद इन सभी कारखानों में ताला लटका है। यहां साड़ी की छपाई बंद है। इन फैक्ट्रियाें में काम करने वाले 5000 से अधिक मजदूर खाली बैठे हैं। इस इंडस्ट्रीज को अब तक करीब 45 करोड़ की चपत लग चुकी है।
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मजदूरों को प्रतिदिन मजदूरी देने के लिए धनराशि चाहिए। इसके अलावा जहां साड़ी बिकती है, वहां से पुराना भुगतान ही नहीं आ रहा है। सब जगह नोटबंदी का संकट है। ऐसे में फैक्ट्रियां बंद पड़ी हैं।
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राजेश बजाज, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नेशनल चैंबर्स, साड़ी उद्यमी मथुरा

बंद हुई पायलों की खनक, 10000 लोगों से छिनी रोजी-रोटी
चांदी की पायल और आभूषणों में देश की चुनिंदा मंडियों में शुमार मथुरा में अब पायलों की खनक बंद हो गई है। नोटबंदी के बाद यहां की छोटी और बड़ी करीब 500 यूनिटों पर ताला लटका है। इसके चलते 10000 मजदूरों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इस इंडस्ट्री को करीब 50 करोड़ की चोट पहुंची है।

छोटे उद्योगों पर लटका ताला, 100 करोड़ का झटका
मथुरा में प्रिंटिंग प्रेस, निवाड़, वाइब्रेटर, ढोल, गिलट की स्माल इंडस्ट्रीज की करीब 400 यूनिटों पर ताला लटका हुआ है। इनमें करीब चार से पांच हजार मजदूरों को रोटी के लाले पड़ गए हैं। यहां करीब 90 से 100 करोड़ के नुकसान का आकलन किया जा रहा है।


नोटबंदी के बाद छोटे उद्योगों की कमर ही टूट गई है। बैंकों में लंबी लाइन, भुगतान संकट के चलते इन इकाइयों पर ताला लटका हुआ है। ये उद्यमी नुकसान का आकलन भी नहीं कर पा रहे हैं। मजदूर अपने घरों को जा रहे हैं।

- महावीर मित्तल, महामंत्री, स्माल स्केल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन मथुरा


नोटबंदी के बाद से किसी भी रूप में व्यापार नहीं चल रहा है। हमारी सबसे बड़ी समस्या अपने यहां काम करने वाले मजदूरों की रोजी रोटी को लेकर है, इन्हें काम नहीं मिल रहा है। इसके चलते मजदूर यहां से पलायन कर रहे हैं।
- राजेंद्र अग्रवाल, सराफा कारोबारी, कमेटी के कार्यकारिणी सदस्य
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