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आरटीआई में लापरवाही के खिलाफ जाएंगे हाईकोर्ट

Mon, 21 Mar 2016 11:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो मथ्ाुरा
अमर उजाला ब्यूरो मथ्ाुरा Updated Mon, 21 Mar 2016 11:58 PM IST
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rti activist in mathura
आरटीआई
आरटीआई के तहत जानकारी देने में लापरवाही करने वाले अफसरों से जुर्माना वसूलने में भी लापरवाही की गई। अब यह मामला उच्च न्यायालय के संज्ञान में लाया जाएगा। आरटीआई कार्यकर्ता की अपील पर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने यह फैसला लिया है। प्राधिकरण ने वाद दायर करने के लिए अधिवक्ता भी नामित कर दिया है।
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बता दें कि जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत सूचना उपलब्ध न कराने वाले अफसरों पर राज्य सूचना आयुक्त जुर्माना लगाने की कार्रवाई कर रहे हैं लेकिन जिला प्रशासन की ओर से जुर्माने को वसूलने के लिए कार्रवाई नहीं की जा रही है। पीड़ित को हर्जाना भी नहीं उपलब्ध कराया जा रहा है।
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आरटीआई कार्यकर्ताओं की संस्था परिवर्तन के एक्टिविस्ट रामगोपाल भी इसी पीड़ा से व्यथित हैं। जिला स्तर पर सुनवाई न होने पर उन्होंने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से गुहार लगाई। इस पर उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के सचिव मयंक कुमार जैन ने पीड़ित को अवगत कराया कि उच्च न्यायालय में वाद दायर करने के लिए प्राधिकरण ने संतोष कुमार को बतौर अधिवक्ता नामित किया है।
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जो उच्च न्यायालय में वाद दाखिल कर मामले की पैरवी करेंगे। पीड़ित रामगोपाल ने बताया कि उनके पास ऐसे तीन आदेश और हैं जिनमें जुर्माना लगाया गया लेकिन अफसरों ने कोई वसूली नहीं की गई।

सूचना भी नहीं उपलब्ध कराई
पीड़ित ने जिलाधिकारी कार्यालय से कुछ बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी थीं, इस पर जिलाधिकारी कार्यालय ने कोई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। राज्य सूचना आयुक्त ने 11 जुलाई 2011 को आदेश दिया कि संबंधित जनसूचना अधिकारी से तीन समान किश्तों में 25000 का जुर्माना वसूला जाए और पीड़ित को क्षतिपूर्ति के दो हजार रुपये दिए जाएं। इस मामले में जुर्माना वसूलने संबंधी कोई सूचना नहीं दी गई और न ही क्षतिपूर्ति दिलाई गई।


अन्य भी हैं मामले
मथुरा में लापरवाह अफसरों से जुर्माना वसूल न करने का ये अकेला मामला नहीं है। संस्था परिवर्तन के अध्यक्ष हरिओम सिंह बताते हैं कि अकेले मथुरा में ही ऐसे एक दर्जन से अधिक मामले हैं। इसके लिए सभी कार्यकर्ताओं को एकजुट किया जा रहा है, जिससे उच्च न्यायालय में दाखिल होने वाले वाद में उन्हें भी शामिल किया जा सके।
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