फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mathura News ›   relief fund not distributed among farmers

करोड़ों दबाए रहे अफसर, किसान भटकता रहा दर-दर

Mon, 27 Mar 2017 10:53 PM IST
पुनीत शर्मा/रामकुमार रौतेला
पुनीत शर्मा/रामकुमार रौतेला Updated Mon, 27 Mar 2017 10:53 PM IST
विज्ञापन
relief fund not distributed among farmers
क‌िसान - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2015 के फरवरी और मार्च महीने में आसमान में बादल छाते तो किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरा जातीं। सुबह किसान खेत पर जाता तो ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से हुई फसल की बर्बादी देख सहन नहीं कर पाता, इस तरह सदमे से जिले के 23 किसानों की जान चली गई। कई की तो खेत पर ही दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी।
विज्ञापन


हालांकि प्रशासन ने दो किसानों की मौत ही सदमे से मानी है। प्रशासन की रिपोर्ट पर शासन की ओर से 248 करोड़ रुपये राहत के रूप में भेजे गए, लेकिन अधिकारी इसमें भी करोड़ों रुपये दबाए बैठे रहे। किसान मुआवजा मांगता कभी कलक्ट्रेट तो कभी तहसील पर गुहार लगाता रहा। अब अधिकारियों द्वारा मुआवजे की रकम लौटाया जाना तमाम सवाल खड़े कर रहा है।
विज्ञापन


वर्ष 2015 में हुई ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से जिले में करीब ढाई लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में खड़ी गेहूं और सरसों की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई थी। जिन किसानों का आलू खेतों में पड़ा था वह भी बेकार हो गया था। मांट, बलदेव, नौहझील, राया, नंदगांव, फरह, गोवर्धन, मथुरा, चौमुंहा और छाता में कराए गए सर्वे के बाद प्रशासन ने माना था कि गेहूं और सरसों की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


शासन को रिपोर्ट भेजी गई उसमें 390 करोड़ रुपये किसानों को मुआवजे के रूप में बांटने के लिए मांगा गया था। मुआवजे के लिए शासन से जिले के लिए 248 करोड़ रुपये किश्तों में मिले। शुरुआत में तो इसका वितरण तेजी के साथ होता रहा, लेकिन बाद में अफसर दबाकर बैठ गए। एक लाख किसान आज भी मुआवजे से वंचित हैं। अफसरों ने किसानों में बांटने की बजाए 10 करोड़ से भी ज्यादा रकम शासन को वापस कर दी है। यह आंकड़ा तो मौजूदा वित्तीय वर्ष का है, इससे पहले भी पैसा वापस किया गया है।


किसी को 1000 तो किसी को 18000 दिए
मुआवजे के नाम पर भी खूब मजाक किया गया। पहले तो प्रशासन ने 18000 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवजा वितरण किया लेकिन बाद में 9000 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर कर दिया गया था। तमाम किसानों को तो 1000 हजार रुपये का चेक ही दिया गया।


जबकि कुछ को इससे भी कम रकम बांटी गई थी। किसान नेता रामबाबू सिंह कटेलिया का कहना है कि किसानों के साथ बड़ा मजाक किया गया। लाखों की फसल गई और 1000 रुपये का चेक पकड़ा दिया गया। अभी भी मथुरा में 50 फीसदी से ज्यादा लोग मुआवजे से वंचित रह गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed