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रामवृक्ष की ‘पागल सेना’ ने किया था पुलिस पर अटैक
अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 30 Jun 2016 12:02 AM IST
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jawahar bagh
- फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, मथुरा
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जवाहर बाग में पुलिस पर पहला अटैक रामवृक्ष की ‘पागल सेना’ ने किया था। इन्हीं लोगों ने एसपी सिटी को बाग में खींच लिया और सिर पर वार कर दिया था। वीरेश के अनुसार इस टीम में वह बीस लोग शामिल थे जो अपराधी प्रवृति के थे और आए दिन मारपीट करते थे।
इसे ‘पागल सेना’ का नाम दिया गया था। इसमें कई अपराधी भी शामिल थे। यह लोग आए दिन मारपीट करते रहते थे। जब भी पुलिस या प्रशासनिक अधिकारियों ने जवाहर बाग में घुसने की कोशिश की, सबसे पहले इन लोगों ने ही उनको रोका था। वीरेश यादव ने बताया जब पुलिस जवाहर बाग में घुसी थी तब पुलिस पर सबसे पहला हमला भी इन्हीं लोगों ने किया था।
वीरेश की जुबानी जवाहर बाग की कहानी
12 चौकियां...
जवाहर बाग में 12 सुरक्षा चौकियां थीं। 200 लोग तैनात थे। 6-6 घंटे की ड्यूटी लगती थी। महिलाओं की चौकियां अलग बनाई गई थीं। निर्देश थे कि जब पुलिस आए तो महिलाएं आगे आ जाएंगी। साठ महिलाओं को भी लगाया गया था।
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19 बड़ी टोलियां...
उन्नीस बड़ी टोलियां बनाई गई थीं। इन टोलियों की तीन-तीन घंटे की ड्यूटी लगती थी। टोली के लोग पूरे जवाहर बाग की सुरक्षा को देखते थे। इनमें कुछ लोगों को पुलिस-प्रशासन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए लगाया गया था। बक्सर का सुनील रामवृक्ष का सबसे बड़ा ‘जासूस’ था। वह बाग से बाहर जाकर पुलिस और प्रशासनिक गतिविधियों को चेक करता था।
हरदोई के उपेंद्र करते थे इलाज
जवाहर बाग में खोले गए अस्पताल में हरदोई के एक डाक्टर उपेंद्र को लगाया गया था। उपेंद्र ही मुख्य रूप से मरीजों का इलाज करते थे। हालांकि रामवृक्ष पहले क्लीनिक खोलकर लोगों का इलाज करता था लिहाजा वह भी दवाई देता था।
चार मास्टर ट्रेनर थे
डंडा चलाने, फायरिंग करने, निशाना साधने की ट्रेनिंग के लिए चार मास्टर ट्रेनर तैनात किए गए थे। इनमें एक गुरुजी नाम से जाना जाने वाला व्यक्ति, कानपुर देहात का महेश, अनूप और एक अन्य व्यक्ति शामिल था।
रामवृक्ष का बेटा राजनारायण देता था सजा
रामवृक्ष के दोनों बेटे जवाहर बाग में रहते थे। एक बेटा विवेक (लख्खो) कंप्यूटर का काम देखता था। दूसरा बेटा राजनारायण जवाहर बाग से भागने की कोशिश करने वालों को सजा देता था। मारपीट करता था।
रामवृक्ष की मुंहबोली बेटी है गुड़िया
पुलिस के रामवृक्ष की मौत के बारे में एलान किया तो दिल्ली से एक गुड़िया नाम की महिला ने खुद को रामवृक्ष की बेटी बताते हुए शव मांगा था। एक अधिवक्ता के माध्यम से उसने प्रार्थनापत्र भेजा था। वह गुड़िया रामवृक्ष की सगी बेटी नहीं बल्कि मुंहबोली बेटी है। वीरेश ने बताया कि गुड़िया मध्यप्रदेश की रहने वाली है। रामवृक्ष उसे बेटी के समान ही मानता था।
मेरठ का कपिल लगाता था हाजिरी
कब्जाधारियों की हाजिरी लेने का काम मेरठ निवासी कपिल शर्मा करता था। बताया जाता है कि कपिल शर्मा रामवृक्ष का सबसे करीबी था। वीरेश के अनुसार रामवृक्ष कभी जवाहर बाग से बाहर जाता तो कपिल साथ में जरूर होता था।
मथुरा के संजीव ने सप्लाई की गैस
वीरेश यादव ने बताया कि संजीव गैस की सप्लाई करता था। संजीव को स्थानीय ही बताया जा रहा है। अब पुलिस उसकी तलाश में जुट गई है। सभी एजेंसी वालों से भी उसके बारे में पूछा जा रहा है।
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इसे ‘पागल सेना’ का नाम दिया गया था। इसमें कई अपराधी भी शामिल थे। यह लोग आए दिन मारपीट करते रहते थे। जब भी पुलिस या प्रशासनिक अधिकारियों ने जवाहर बाग में घुसने की कोशिश की, सबसे पहले इन लोगों ने ही उनको रोका था। वीरेश यादव ने बताया जब पुलिस जवाहर बाग में घुसी थी तब पुलिस पर सबसे पहला हमला भी इन्हीं लोगों ने किया था।
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वीरेश की जुबानी जवाहर बाग की कहानी
12 चौकियां...
जवाहर बाग में 12 सुरक्षा चौकियां थीं। 200 लोग तैनात थे। 6-6 घंटे की ड्यूटी लगती थी। महिलाओं की चौकियां अलग बनाई गई थीं। निर्देश थे कि जब पुलिस आए तो महिलाएं आगे आ जाएंगी। साठ महिलाओं को भी लगाया गया था।
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19 बड़ी टोलियां...
उन्नीस बड़ी टोलियां बनाई गई थीं। इन टोलियों की तीन-तीन घंटे की ड्यूटी लगती थी। टोली के लोग पूरे जवाहर बाग की सुरक्षा को देखते थे। इनमें कुछ लोगों को पुलिस-प्रशासन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए लगाया गया था। बक्सर का सुनील रामवृक्ष का सबसे बड़ा ‘जासूस’ था। वह बाग से बाहर जाकर पुलिस और प्रशासनिक गतिविधियों को चेक करता था।
हरदोई के उपेंद्र करते थे इलाज
जवाहर बाग में खोले गए अस्पताल में हरदोई के एक डाक्टर उपेंद्र को लगाया गया था। उपेंद्र ही मुख्य रूप से मरीजों का इलाज करते थे। हालांकि रामवृक्ष पहले क्लीनिक खोलकर लोगों का इलाज करता था लिहाजा वह भी दवाई देता था।
चार मास्टर ट्रेनर थे
डंडा चलाने, फायरिंग करने, निशाना साधने की ट्रेनिंग के लिए चार मास्टर ट्रेनर तैनात किए गए थे। इनमें एक गुरुजी नाम से जाना जाने वाला व्यक्ति, कानपुर देहात का महेश, अनूप और एक अन्य व्यक्ति शामिल था।
रामवृक्ष का बेटा राजनारायण देता था सजा
रामवृक्ष के दोनों बेटे जवाहर बाग में रहते थे। एक बेटा विवेक (लख्खो) कंप्यूटर का काम देखता था। दूसरा बेटा राजनारायण जवाहर बाग से भागने की कोशिश करने वालों को सजा देता था। मारपीट करता था।
रामवृक्ष की मुंहबोली बेटी है गुड़िया
पुलिस के रामवृक्ष की मौत के बारे में एलान किया तो दिल्ली से एक गुड़िया नाम की महिला ने खुद को रामवृक्ष की बेटी बताते हुए शव मांगा था। एक अधिवक्ता के माध्यम से उसने प्रार्थनापत्र भेजा था। वह गुड़िया रामवृक्ष की सगी बेटी नहीं बल्कि मुंहबोली बेटी है। वीरेश ने बताया कि गुड़िया मध्यप्रदेश की रहने वाली है। रामवृक्ष उसे बेटी के समान ही मानता था।
मेरठ का कपिल लगाता था हाजिरी
कब्जाधारियों की हाजिरी लेने का काम मेरठ निवासी कपिल शर्मा करता था। बताया जाता है कि कपिल शर्मा रामवृक्ष का सबसे करीबी था। वीरेश के अनुसार रामवृक्ष कभी जवाहर बाग से बाहर जाता तो कपिल साथ में जरूर होता था।
मथुरा के संजीव ने सप्लाई की गैस
वीरेश यादव ने बताया कि संजीव गैस की सप्लाई करता था। संजीव को स्थानीय ही बताया जा रहा है। अब पुलिस उसकी तलाश में जुट गई है। सभी एजेंसी वालों से भी उसके बारे में पूछा जा रहा है।