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विलायत से बहनों ने बांकेबिहारी के लिए भेजीं राखी
ब्यूरो, अमर उजाला वृंदावन
Updated Fri, 28 Aug 2015 11:21 PM IST
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राधे-राधे... क्या हाल है कन्हाजी, राधा रानी जी, यहां भी आपकी कृपा बरस रही है। आपकी कृपा से सब कुछ कुशल है। यह कहना है अंबाला की रहने वाली एक बहन का, जिसने ठाकुर बांकेबिहारी को अपनी राखी भेजने के साथ संदेश भी भेजा है। संदेश में बहन ने अपने भाई ठाकुर बांकेबिहारी से लड़कियों की रक्षा करने का वचन लिया है। कहा समय बहुत खराब है। बुरे लोगों को दूर कर दो, महिलाओं की रक्षा करना प्रभु।
भाई-बहन के पवित्र बंधन के पर्व रक्षाबंधन का भारतीय संस्कृति में विशिष्ट महत्व है। बड़ी संख्या में बहनों ने ठाकुर बांकेबिहारी महाराज को अपना भाई मानते हुए रक्षा के इस पवित्र बंधन से बांध लिया है। ठा. बांकेबिहारी को बहनों ने राखियां भेजी हैं। देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी बहनों ने ऐसी राखियां भेजी हैं।
मंदिर के प्रबंधक मुनीष शर्मा ने बताया कि रक्षाबंधन से पहले कार्यालय में अमेरिका, फ्रांस, लंदन, आस्ट्रेलिया सहित देश के दिल्ली, फरीदाबाद, गाजियाबाद, नोएडा, जयपुर से कई राखियां बांकेबिहारी मंदिर पहुंची हैं। बांकेबिहारी के सेवायत आशीष गोस्वामी ने बताया कि अमेरिका निवासी बंशिता ने राखी भेजने के साथ-साथ ठाकुरजी को एक पत्र में लिखा है कि मैं स्वयं तो वहां उपस्थित नहीं हो सकती, लेकिन मैं आत्मा से आपको अपना भाई मानते हुए आपसे अपनी रक्षा का वचन मांगती हूं। मेरी राखी को स्वीकार कीजिएगा।
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उन्होंने बताया कि जिन बहनों के भाई नहीं होते वे लिफाफे में राखियां रख अपने-अपने यजमान के माध्यम से ठाकुर बांकेबिहारी को समर्पित राखियां भेजती हैं।
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भाई-बहन के पवित्र बंधन के पर्व रक्षाबंधन का भारतीय संस्कृति में विशिष्ट महत्व है। बड़ी संख्या में बहनों ने ठाकुर बांकेबिहारी महाराज को अपना भाई मानते हुए रक्षा के इस पवित्र बंधन से बांध लिया है। ठा. बांकेबिहारी को बहनों ने राखियां भेजी हैं। देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी बहनों ने ऐसी राखियां भेजी हैं।
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मंदिर के प्रबंधक मुनीष शर्मा ने बताया कि रक्षाबंधन से पहले कार्यालय में अमेरिका, फ्रांस, लंदन, आस्ट्रेलिया सहित देश के दिल्ली, फरीदाबाद, गाजियाबाद, नोएडा, जयपुर से कई राखियां बांकेबिहारी मंदिर पहुंची हैं। बांकेबिहारी के सेवायत आशीष गोस्वामी ने बताया कि अमेरिका निवासी बंशिता ने राखी भेजने के साथ-साथ ठाकुरजी को एक पत्र में लिखा है कि मैं स्वयं तो वहां उपस्थित नहीं हो सकती, लेकिन मैं आत्मा से आपको अपना भाई मानते हुए आपसे अपनी रक्षा का वचन मांगती हूं। मेरी राखी को स्वीकार कीजिएगा।
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उन्होंने बताया कि जिन बहनों के भाई नहीं होते वे लिफाफे में राखियां रख अपने-अपने यजमान के माध्यम से ठाकुर बांकेबिहारी को समर्पित राखियां भेजती हैं।