फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mathura News ›   railbus service will be benificiary for railway

...तो बर्बाद होने से बच जाएंगे रेलवे के 11 करोड़

Thu, 21 Apr 2016 11:13 PM IST
अमर उजाला मथुरा
अमर उजाला मथुरा Updated Thu, 21 Apr 2016 11:13 PM IST
विज्ञापन
railbus service will be benificiary for railway
रेलबस - फोटो : अमर उजाला
मथुरा-वृंदावन के बीच चलने वाली देश की अनूठी रेलबस एक बार फिर दौड़ेगी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पहल पर ऐसा होने की उम्मीद है। अगर रेलबस चली तो रेलवे के 11 करोड़ रुपये भी बर्बाद होने से बच जाएंगे। 
विज्ञापन


मथुरा से वृंदावन के बीच 14 किलोमीटर लंबा मीटर गेट रेलमार्ग है। ब्रिटिश शासन में बने इस रेल मार्ग पर रेलबस को सात फाटक पार करने होते हैं। पहले लाइन में लोहे के स्लीपर बिछे थे। देखरेख के अभाव में वे स्लीपर गल गए।
विज्ञापन


इस कारण आए दिन रेल बस उन स्लीपर में फंस कर खड़ी हो जाती थी। ट्रैक की हालत भी खस्ता हो गई थी। इस पर रेलवे के अधिकारियों ने रेलबस की गति 30 किमी प्रति घंटा कर दी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


चार साल पहले ही रेलवे ने 11.20 करोड़ की लागत से इस रेल मार्ग की मरम्मत कराई। इसमें सभी लोहे के स्लीपर हटाकर सीमेंट के स्लीपर लगा दिए गए। अब रेलबस इस मार्ग पर 80 से 100 किमी प्रति घंटा की स्पीड तक दौड़ सकती है। 

पहले चलती थी दो रेलबस 
15 साल पहले मथुरा से वृंदावन के लिए दो रेल बस का संचालन शुरू हुआ था। इसमें पहले जंक्शन से चलकर रेल बस मथुरा कैंट स्टेशन फिर वापस होकर मथुरा जंक्शन और वृंदावन पहुंचती थी। दोनों रेलबस रोजाना पांच-पांच चक्कर लगाती थी।

10 साल पहले एक रेल बस खराब हुई तो उसकी मरम्मत मुंबई से आए इंजीनियरों ने की। जब बड़ी तकनीकी खराबी आई तो रेलवे के अधिकारियों ने स्टैंड बाई के तहत एक बस को बंद कर उसके पुर्जे दूसरी में फिट करा दिए। एक रेलबस को यार्ड में खड़ा करा दिया। इसके बाद रेलबस जैसे-तैसे सफर कर रही थी। बीते 11 माह से तकनीकी खराबी के कारण रेलबस फिर यार्ड में खड़ी है। 



वृंदावन से कासगंज तक जाती थी राधारानी एक्सप्रेस 
रेलवे के रिटायर ड्राइवर और रेलबस को चार साल चला चुके मोहनलाल सारस्वत बताते हैं कि दो दशक पहले तक वृंदावन से कासगंज तक दो ट्रेन चलती थीं। ब्रज प्रेमी उन ट्रेन को राधारानी एक्सप्रेस नाम से पुकारते थे। दोनों में उस वक्त कोयले से चालित इंजन थे। कोयला इंजन बंद होने पर डीजल इंजन से संचालित कराया गया। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed