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Mathura News: बच्चियों की अश्लील वीडियो बनाकर बेचने वाले पुजारी को आजीवन कारावास
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मथुरा। जैंत थाना क्षेत्र के एक मंदिर में आने वाली बच्चियों की अश्लील वीडियो बनाकर विदेशियों को बेचने के मामले में एडीजे स्पेशल पॉक्सो एक्ट द्वितीय ब्रजेश कुमार ने आरोपी पुजारी श्याम बिहारी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 1.43 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। आरोपी गिरफ्तारी के बाद से जेल में बंद है।
सीबीआई ने 17 जून 2025 को इंटरपोल से मिली सूचना के आधार पर स्वत: संज्ञान लेते हुए प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद सीबीआई टीम ने जैंत थाना क्षेत्र के एक गांव स्थित मंदिर पर दबिश देकर वहां रहने वाले सराय आजमाबाद निवासी पुजारी श्याम बिहारी को गिरफ्तार किया।
जांच में सामने आया कि आरोपी मंदिर आने वाली छोटी बच्चियों को प्रसाद आदि का लालच देकर कमरे में ले जाता था और उनके साथ अश्लील हरकतों के वीडियो बनाता था। बाद में इन वीडियो को इंटरनेट के माध्यम से विदेशियों को बेचता था। मामले में सीबीआई ने 18 अगस्त 2025 को अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया।
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मुकदमे की सुनवाई एडीजे स्पेशल पॉक्सो एक्ट द्वितीय की अदालत में हुई। साक्ष्यों और सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 1.43 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
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14 गवाह और 39 दस्तावेजी साक्ष्य किए पेश
अभियोजन ने अदालत में पीड़िताओं, विद्यालयों के प्रधानाचार्यों, सीबीआई अधिकारियों, बैंक कर्मचारियों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों समेत 14 गवाह पेश किए। इसके अलावा 39 दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए। अदालत ने पीड़िताओं के बयानों, मोबाइल फोन से बरामद सामग्री और फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना। साथ ही अर्थदंड भी पूरी धनराशि पीड़ित को देने का निर्णय भी सुनाया है।
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अदालत ने इन धाराओं में माना दोषी
अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 एबी, पॉक्सो एक्ट की धारा 6, 8, 10, 12, 14 और 15 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67बी के तहत दोषी करार दिया। वहीं, आईपीसी की धारा 506 के आरोप में आरोपी को दोषमुक्त किया गया।
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सीबीआई ने 17 जून 2025 को इंटरपोल से मिली सूचना के आधार पर स्वत: संज्ञान लेते हुए प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद सीबीआई टीम ने जैंत थाना क्षेत्र के एक गांव स्थित मंदिर पर दबिश देकर वहां रहने वाले सराय आजमाबाद निवासी पुजारी श्याम बिहारी को गिरफ्तार किया।
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जांच में सामने आया कि आरोपी मंदिर आने वाली छोटी बच्चियों को प्रसाद आदि का लालच देकर कमरे में ले जाता था और उनके साथ अश्लील हरकतों के वीडियो बनाता था। बाद में इन वीडियो को इंटरनेट के माध्यम से विदेशियों को बेचता था। मामले में सीबीआई ने 18 अगस्त 2025 को अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया।
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मुकदमे की सुनवाई एडीजे स्पेशल पॉक्सो एक्ट द्वितीय की अदालत में हुई। साक्ष्यों और सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 1.43 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
14 गवाह और 39 दस्तावेजी साक्ष्य किए पेश
अभियोजन ने अदालत में पीड़िताओं, विद्यालयों के प्रधानाचार्यों, सीबीआई अधिकारियों, बैंक कर्मचारियों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों समेत 14 गवाह पेश किए। इसके अलावा 39 दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए। अदालत ने पीड़िताओं के बयानों, मोबाइल फोन से बरामद सामग्री और फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना। साथ ही अर्थदंड भी पूरी धनराशि पीड़ित को देने का निर्णय भी सुनाया है।
अदालत ने इन धाराओं में माना दोषी
अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 एबी, पॉक्सो एक्ट की धारा 6, 8, 10, 12, 14 और 15 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67बी के तहत दोषी करार दिया। वहीं, आईपीसी की धारा 506 के आरोप में आरोपी को दोषमुक्त किया गया।