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दूध बंद, पानी बंद.. उधारी से जल रहा चूल्हा
अमर उजाला मथुरा
Updated Sat, 19 Nov 2016 12:33 AM IST
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कैश
- फोटो : अमर उजाला
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होलीगेट के एटीएम पर लाइन में लगीं सुषमा की सुनकर किसी की भी आंख भर आएगी। सुषमा दो रोज से एटीएम के चक्कर लगा रही हैं लेकिन पैसे नहीं मिल रहे। कहीं लाइन लंबी थी तो कहीं पैसे नहीं थे। कहने लगीं, दूधिये ने दूध बंद कर दिया है। पानी की बोतल मंगवाते थे वह भी आनाकानी करने लगा। सबको समय पर पैसा चाहिए। लेकिन यह भी कोई सोचे कि कितनी दिक्कत है। कहां से लाएं पैसा।
कृष्णा नगर में एटीएम के पास लंबी लाइन थी। इस लाइन में सबसे पीछे प्रहलाद खड़े थे। पूछने पर बोले कृष्णानगर के पास एक मुहल्ले के रहने वाले हैं। कहने लगे, आज घर पर पैसे खत्म हो गए हैं। सोचा कि सुबह जल्दी जाऊंगा तो एटीएम पर भीड़ नहीं मिलेगी लेकिन मैं छह बजे पहुंचा तो पता चला कि पांच बजे से भी लोग खड़े हैं। आसपास के एटीएम देखे तो चार तो बंद थे जबकि तीन पर लाइन लगी है। पैसे नहीं मिले तो घर में सब्जी भी नहीं खरीदी जाएगी।
यहीं पास में रिक्शा चालक रोहिताश अपने रिक्शा पर बैठा था। पूछने पर कहने लगा, जिस सवारी को भी बैठाओ वही बड़ा नोट दिखाते हैं। अब 2000 का नोट दिखाने लगे। हम कहां से से लाएं छोटे नोट। सवारी तो मिल ही नहीं रही है। पड़ोसी से तीन दिन पहले 600 रुपये उधार लिए थे वह भी खत्म हो गए हैं। नए बस स्टैंड के पास पान की दुकान करने वाले सुभाष कहने लगे कि बड़े नोट बंद करने का फैसला बिलकुल सही है। लेकिन सरकार उस तरह से इंतजाम नहीं कर पा रही है। कहीं बैंक में पैसे नहीं हैं तो कहीं एटीएम खाली पड़े हैं।
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अब जिसे पैसे की जरूरत हो और पैसा न मिले तो दिक्कत तो होगी ही। यहीं खड़े विपिन जो आटो रिक्शा चलाते हैं बोले, बैंक वाले अपने करीबियों को पैसा दे रहे हैं। बड़े-बड़े सेठों का पैसा बदल रहे हैं। जब हम लोग जाते हैं तो कभी सिक्के या कभी दो-दो के नोट की गड्डी थमा देते हैं।
कलक्ट्रेट में चकबंदी विभाग में आए नौहझील के करतार सिंह, होशियार और राजेंद्र ने कहा कि दिक्कत देखनी है तो गांव में जाइए। किसान के पास खाद और बीज के लिए भी पैसा नहीं बचा है। बड़े नोट बंद करने से पहले बैंकों में भरपूर धन उपलब्ध कराया जाता। मीनू वर्मा अपने पिता राकेश के साथ यूनियन बैंक से पैसे निकालने आई थीं। कहा कि अगले महीने बहन की शादी है। अभी से पैसे निकाल रहे हैं। चौबीस हजार रुपये निकालेंगे तो कुछ सहारा लगेगा।
बेटी की सगाई, घर में पैसा नहीं
रमेश चंद्र निवासी गोवर्धन रोड की बेटी की सगाई है। यूनियन बैंक से पैसे निकालने पहुंचे थे। लेकिन पैसा निकल ही नहीं पाया। कहा कि तीन दिन पहले दस हजार रुपये निकाल लिए थे। अब बैंक वाले कह रहे हैं कि अगले सप्ताह ही पैसा निकाल सकते हैं। रमेश चंद्र परेशान हैं। कैसे और कहां से इंतजाम होगा, यही चिंता सता रही है।
शहर के कई बैंकों में नहीं मिला पैसा
शुक्रवार को शहर के कई बैंकों में पैसा नहीं मिला। लोग लाइन लगाए रहे लेकिन मिला धेला नहीं। बैंक वालों ने कह दिया कि पैसा ही नहीं है।
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कृष्णा नगर में एटीएम के पास लंबी लाइन थी। इस लाइन में सबसे पीछे प्रहलाद खड़े थे। पूछने पर बोले कृष्णानगर के पास एक मुहल्ले के रहने वाले हैं। कहने लगे, आज घर पर पैसे खत्म हो गए हैं। सोचा कि सुबह जल्दी जाऊंगा तो एटीएम पर भीड़ नहीं मिलेगी लेकिन मैं छह बजे पहुंचा तो पता चला कि पांच बजे से भी लोग खड़े हैं। आसपास के एटीएम देखे तो चार तो बंद थे जबकि तीन पर लाइन लगी है। पैसे नहीं मिले तो घर में सब्जी भी नहीं खरीदी जाएगी।
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यहीं पास में रिक्शा चालक रोहिताश अपने रिक्शा पर बैठा था। पूछने पर कहने लगा, जिस सवारी को भी बैठाओ वही बड़ा नोट दिखाते हैं। अब 2000 का नोट दिखाने लगे। हम कहां से से लाएं छोटे नोट। सवारी तो मिल ही नहीं रही है। पड़ोसी से तीन दिन पहले 600 रुपये उधार लिए थे वह भी खत्म हो गए हैं। नए बस स्टैंड के पास पान की दुकान करने वाले सुभाष कहने लगे कि बड़े नोट बंद करने का फैसला बिलकुल सही है। लेकिन सरकार उस तरह से इंतजाम नहीं कर पा रही है। कहीं बैंक में पैसे नहीं हैं तो कहीं एटीएम खाली पड़े हैं।
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अब जिसे पैसे की जरूरत हो और पैसा न मिले तो दिक्कत तो होगी ही। यहीं खड़े विपिन जो आटो रिक्शा चलाते हैं बोले, बैंक वाले अपने करीबियों को पैसा दे रहे हैं। बड़े-बड़े सेठों का पैसा बदल रहे हैं। जब हम लोग जाते हैं तो कभी सिक्के या कभी दो-दो के नोट की गड्डी थमा देते हैं।
कलक्ट्रेट में चकबंदी विभाग में आए नौहझील के करतार सिंह, होशियार और राजेंद्र ने कहा कि दिक्कत देखनी है तो गांव में जाइए। किसान के पास खाद और बीज के लिए भी पैसा नहीं बचा है। बड़े नोट बंद करने से पहले बैंकों में भरपूर धन उपलब्ध कराया जाता। मीनू वर्मा अपने पिता राकेश के साथ यूनियन बैंक से पैसे निकालने आई थीं। कहा कि अगले महीने बहन की शादी है। अभी से पैसे निकाल रहे हैं। चौबीस हजार रुपये निकालेंगे तो कुछ सहारा लगेगा।
बेटी की सगाई, घर में पैसा नहीं
रमेश चंद्र निवासी गोवर्धन रोड की बेटी की सगाई है। यूनियन बैंक से पैसे निकालने पहुंचे थे। लेकिन पैसा निकल ही नहीं पाया। कहा कि तीन दिन पहले दस हजार रुपये निकाल लिए थे। अब बैंक वाले कह रहे हैं कि अगले सप्ताह ही पैसा निकाल सकते हैं। रमेश चंद्र परेशान हैं। कैसे और कहां से इंतजाम होगा, यही चिंता सता रही है।
शहर के कई बैंकों में नहीं मिला पैसा
शुक्रवार को शहर के कई बैंकों में पैसा नहीं मिला। लोग लाइन लगाए रहे लेकिन मिला धेला नहीं। बैंक वालों ने कह दिया कि पैसा ही नहीं है।